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इलाहाबाद: ऊंचाई छूती संगम नगरी

तीन दिशाओं में नदियों से घिरे इस शहर का विस्तार अब मुख्य रूप से ऊंचाई में हो रहा है और लोगों में भी बढ़ रही इनमें रहने की चाहत.

इलाहाबाद इलाहाबाद

इलाहाबाद दो मायनों में उत्तर प्रदेश का अनोखा शहर है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे प्रदेश के दूसरे बड़े शहरों से अलग करती है. यह शहर तीन ओर से नदियों से घिरा है, जिसने यहां पर रहने के लिए जमीन को सीमित कर रखा है. दूसरी ओर इलाहाबाद प्रदेश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला भी है. जनसंख्या ज्यादा और जमीन सीमित होने के कारण विशालकाय बंगलों वाले इस शहर में अब तेजी से ऊंची इमारतें सिर उठा रही हैं और उससे भी ज्यादा तेजी से फ्लैट्स की मांग के कारण उनकी कीमतें आसमान छू रही हैं.

यहां सरकारी विभागों और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार हो रहे विस्तार की वजह से बलिया से लेकर बनारस तक फैले पूर्वांचल के जिलों से लोग लगातार पलायन करके इलाहाबाद पहुंच रहे हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार इलाहाबाद की जनसंख्या उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक लगभग 60 लाख है और हर साल यहां एक लाख से अधिक लोग आकर बस रहे हैं. इन लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इलाहाबाद में वर्टिकल ग्रोथ ही एकमात्र सहारा रह गया है. यहां का सिविल लाइंस का इलाका व्यावसायिक और रिहाइशी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना बनकर उभरा है. विकसित इन्फ्रास्ट्रक्चर ही इसे शहर के अन्य क्षेत्रों से अलग करता है. तुलसियानी स्क्वायर, अनंत टावर समेत यहां एक दर्जन से ज्यादा हाउसिंग सोसाइटी बन चुकी हैं.

मुख्य शहर में ज्यादा जमीन उपलब्ध न होने की वजह से इस इलाके की ज्यादातर इमारतें पांच से छह मंजिला ऊंची हैं. वर्तमान में शहर की सबसे ऊंची रिहाइशी 12 मंजिला इमारत सिविल लाइंस के लोहिया मार्ग पर एक लाख वर्ग फुट एरिया में बन रही है. इसका निर्माण कर रहे सन शाइन इंफ्रा एस्टेट लिमिटेड के हेमंत कुमार सिंधी कहते हैं, ''48 लग्जरी फ्लैट्स वाली इस मल्टीस्टोरी बिल्डिंग की खासियत है विशालकाय अंडरग्राउंड पार्किंग. इसके अलावा यह इलाहाबाद की पहली और इकलौती बिल्डिंग होगी, जिसमें एक्सप्रेस लिफ्ट की सुविधा है.” इन खूबियों के चलते चार बेडरूम वाले लग्जरी फ्लैट्स की कीमत 90 लाख रु. तक पहुंच गई है. इलाहाबाद के अन्य पॉश इलाकों जैसे मम्फोर्डगंज, अशोक नगर, हेस्टिंग रोड, लूकरगंज, टैगोर टाउन और जॉर्ज टाउन में भी बहुमंजिला रिहाइशी इमारतें तेजी से खड़ी हो रही हैं.

बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट क्षेत्र में काम करने वाले कुलदीपक बाहरी कहते हैं, ''शहर में मांग इतनी ज्यादा है कि किसी हाउसिंग सोसाइटी की योजना शुरू होते ही तुरंत सारे फ्लैट बिक जाते हैं.” इलाहाबाद में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, एकाउंटेंट जनरल, राजस्व परिषद, माध्यमिक और बेसिक शिक्षा परिषद, उच्च शिक्षा निदेशालय समेत कई बड़े सरकारी कार्यालय और हाईकोर्ट होने की वजह से यहां सरकारी नौकरी-पेशा लोगों और शिक्षकों की संख्या चार लाख से ऊपर है. इनमें से तकरीबन 2,000 लोग हर साल रिटायर होते हैं, जो रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि का उपयोग फ्लैट्स में इन्वेस्टमेंट के लिए कर रहे हैं.

इलाहाबाद के सिविल इंजीनियर अनुपम मिश्र कहते हैं, ''शहर की बहुत सारी जमीन अब भी  फ्री होल्ड नहीं हो पाई है. इसने जमीन की कमी को और गहरा दिया है और अब हाइराइज बिल्डिंग ही एकमात्र विकल्प है.”

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश के उन चुनिंदा शहरों में से था, जहां आवास और बाजार के लिए जमीन की भीषण मांग के चलते सबसे पहले वर्टिकल ग्रोथ  शुरू हुई. शुरुआत व्यावसायिक क्षेत्र से हुई. 1987 में यहां पहली नौ मंजिला इमारत बनकर तैयार हुई. सरकारी क्षेत्र की इस इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर 62 दुकानदारों को दुकानें दी गईं और बाकी में सरकारी दफ्तर बने. 1991 में इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (एडीए) ने 12 मंजिला संगम प्लेस का निर्माण कराया, जो इस शहर का सबसे ऊंचा कॉमर्शियल प्लाजा है. निजी क्षेत्र भी अब बहुमंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्सों के निर्माण में कूद पड़ा है. पिछले तीन साल में सिविल लाइंस में महात्मा गांधी मार्ग और सरदार पटेल मार्ग पर आधा दर्जन मॉल खुल चुके हैं.

कॉमर्शियल बिल्डिंग के साथ सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है. इसलिए नई बनने वाली इमारतें अत्याधुनिक तौर-तरीके अपना रही हैं. सिविल लाइंस में बन रही पांच मंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंग में ऑटोमैटिक पार्किंग सिस्टम लगाया जा रहा है. यहां ऑटोमैटिक तरीके से गाडिय़ां पार्क की जाएंगी. इलाहाबाद में काम कर रहे ओमेक्स ग्रुप के अधिकारी अजय मिश्र बताते हैं, ''तेजी से बढ़ती जनसंख्या और जमीन के सीमित होने के कारण रेजीडेंशियल और कॉमर्शियल स्पेस की कीमत में कुछ साल में 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है. 10 साल पहले सिविल लाइंस में 1,000 वर्ग फुट का फ्लैट 10 से 12 लाख रु. में उपलब्ध था, लेकिन अब इनकी कीमत दोगुनी से भी ज्यादा पर पहुंच गई है.” कॉमर्शियल जगहों के तो कहने ही क्या उनके दाम आकाश छू रहे हैं.

रेजिडेंशियल सेक्टर में बढ़ती डिमांड को देखकर एडीए भी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के क्षेत्र में काम करने जा रहा है. एडीए के सचिव अमरनाथ उपाध्याय कहते हैं, ''दो नदियों के संगम के बीच होने के कारण इलाहाबाद में जमीन की कमी है जबकि मांग ने रफ्तार पकड़ रखी है. इससे निबटने के लिए एडीए शहर में ग्रुप हाउसिंग स्कीम की योजना पर काम कर रहा है. इसमें निर्धारित मानकों के अनुरूप ही मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों का निर्माण किया जाएगा.” इसे देखकर तो ऐसा ही लगता है कि संगम नगरी जल्द ही ऊंची इमारतों की नगरी बन जाएगी.

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