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जल विशेषांकः नदी का पुनरूद्धार

राज्य अपने सीवरेज नेटवर्क सिस्टम को चाक-चौबंद कर रहा है ताकि उसके शहरों से गंगा में जाने वाला अपशिष्ट जल गंदगी से मुक्त हो.

मोर्चे पर  बेऊर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के प्रभारी कुमार सौरभ मोर्चे पर  बेऊर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के प्रभारी कुमार सौरभ

अमिताभ श्रीवास्तव

कुमार सौरभ अपने कार्यालय—पटना के बेउर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)—में प्रतिदिन सुबह 9 बजे पहुंच जाते हैं और 2.17 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्लांट का दौरा करके अपने दिन की शुरुआत करते हैं. इस वोल्टास-संचालित सुविधा के संचालन और रखरखाव के प्रभारी, 33 वर्षीय सौरभ के दैनिक निरीक्षण का पहला पड़ाव प्राइमरी स्क्रीनिंग जोन होता है जहां बाहर से आने वाला अपशिष्ट जल सबसे पहले पहुंचता है. पर्यावरणीय इंजीनियरिंग में एम.टेक की डिग्री रखने वाले सौरभ कहते हैं, ‘‘यह एक पुरानी आदत-सी हो गई है.

इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मेरे वहां मौजूद रहने की आवश्यकता नहीं है. अपशिष्ट जल की सफाई स्वचालित तरीके से और निरंतर होती रहती है. प्राथमिक टैंक में अपशिष्ट जल के पांच मीटर के स्तर तक पहुंचने के साथ ही पंप स्वत: चालू हो होता है.’’

गंगा नदी के कुल 2,525 किलोमीटर के प्रवाह क्षेत्र में से 445 किलोमीटर, बिहार में है. इसलिए नमामि गंगे कार्यक्रम (एनजीपी) के लिए राज्य बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. और अपशिष्ट यहां नदी के लिए सबसे बड़ी परेशानी बना हुआ है. अकेले पटना से 250 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) प्रदूषित जल गिरता है.

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि राज्य के लिए नमामि गंगे की 6,017.37 करोड़ रुपए की निधि का 92 प्रतिशत या 5,487.75 करोड़ रुपए सीवेज ट्रीटमेंट (अपशिष्ट शोधन) की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आवंटित की गई है.

2009 बैच के आइएएस अधिकारी, रमन कुमार की अगुवाई में शहरी विकास निकाय बीयूआइडीसीओ (बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम), सीवेज ट्रीटमेंट और जल निकासी की 30 परियोजनाओं को संभाल रहा है. 15 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) में से तीन पहले ही चालू हो चुके हैं, नौ अन्य प्लांट्स का कार्य पूरा होने के विभिन्न चरणों में हैं, जबकि तीन अन्य प्लांट्स जिन्हें मुंगेर, बक्सर और हाजीपुर में स्थापित किया जाना है, की निविदा प्रक्रिया चल रही है. बीयूआइडीसीओ को 15 इंटरसेप्शन और डायवर्जन परियोजनाएं भी सौंपी गई हैं, जिनमें से 12 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और तीन परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

11 एसटीपी और जल निकासी परियोजनाओं में से अधिकतर पटना में हैं; स्वीकृत परियोजनाओं को शामिल कर लिया जाए तो पूरे राज्य की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 651.5 एमएलडी हो जाएगी. वहीं, इनमें से दो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 22 परियोजनाएं प्रगति पर हैं और छह परियोजनाएं काम कर रही हैं.

150 करोड़ रुपए के पटना के दो प्रोजेक्ट-37 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाला करमलीचक और 43 एमएलडी के ट्रीटमेंट क्षमता वाला बेउर- टाटा समूह की कंपनी वोल्टास को सौंपे गए हैं. सितंबर 2020 से बेउर एसटीपी चालू हो गया है.

बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अशोक घोष कहते हैं, ''बिहार में गंगा के पानी में सिर्फ 5 फीसद हिस्सा उस 'गंगाजल’ का है, जिसकी उत्पत्ति हिमालय में होती है.’’ उम्मीद है नमामि गंगे से स्थिति बदलेगी. ठ्ठ

बड़ी तस्वीर 
समस्या यहां अपशिष्ट की निकासी सबसे बड़ा मसला है. अकेले पटना 250 एमएलडी अपशिष्ट जल पैदा करता है

समाधान बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बीयूआइडीसीओ) 30 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स और 15 ड्रेनेज परियोजनाओं को संभाल रहा है

92 %
6,017 करोड़ रु. का या 5,487 करोड़ रु. एनजीपी फंड का बिहार में सीवेज इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए तय.

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