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डॉक्टरी का माकूल नुस्खा

डॉक्टरी का माकूल नुस्खान तो महामारी, न ही लॉकडाउन इस संस्थान को अपने बुनियादी सिद्धांतों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से डिगा पाए.

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 भविष्य की तैयारी : एम्स की डीन डॉ. नीना खन्ना और डॉ. अंबुज रॉय छात्र-छात्राओं के साथ एसईटी सुविधा केंद्र में भविष्य की तैयारी : एम्स की डीन डॉ. नीना खन्ना और डॉ. अंबुज रॉय छात्र-छात्राओं के साथ एसईटी सुविधा केंद्र में

सोनाली आचार्जी

भारत के बेस्ट कॉलेज 2022 : मेडिकल  
नंबर 1- ऑल इंडिया इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया जिस कांच की दीवार के पीछे बैठते हैं, वह उस गंभीर और महत्वपूर्ण भूमिका की याद दिलाता है जो संस्थान ने भारत को कोविड संकट से लड़ने में मदद करते हुए निभाई थी. अकादमिक क्षेत्र में किए गए कई नए प्रयासों के साथ-साथ संस्थान ने परिसर के 33,000 कर्मचारियों, छात्रों और कर्मचारियों को कोविड प्रबंधन और संक्रमण नियंत्रण के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया था. उन छात्रों और शिक्षकों को, जो कोविड शोध में रुचि रखते थे, उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए सीड मनी दी गई जिसका परिणाम रहा कि एम्स से 900 से अधिक पेपर प्रकाशित हुए जिन्हें लिखने और समीक्षा करने वाले एम्स के लोग ही थे. 

अप्रैल 2021 में कोविड की दूसरी और क्रूर लहर जब अपने चरम पर थी, देश के इस सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान ने एक दिन में करीब 1,000 रोगियों के इलाज के लिए 1,700 बिस्तरों की व्यवस्था की. एम्स को देश में आरटी-पीसीआर जांच बढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया था और इसके संकाय ने विभिन्न जांच केंद्रों को डेटा और तकनीकी सहायता प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप पिछले साल के मध्य तक एक दिन में रिकॉर्ड 20 लाख जांच संभव हो सकीं.

एम्स के छात्रों और कर्मचारियों ने कोविड रोगियों का इलाज करते हुए जो अनुभव हासिल किया था उसे उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर आयोजित 4,00,000 से अधिक वेबिनार के माध्यम से पूरे देश में पहुंचाया. इनमें से कुछ वेबिनार विदेश मंत्रालय के सहयोग से सार्क देशों के लिए भी आयोजित किए गए थे. एम्स ने अपने ई-आईसीयू के माध्यम से देश के लगभग 550 अस्पतालों को भी परामर्श दिया ताकि कोविड के इलाज को सुव्यवस्थित किया जा सके और डॉक्टरों को नवीनतम दवाओं और उनकी प्रभावशीलता से अवगत कराया जा सके. 

भारत में 600 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं लेकिन कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने में एम्स की प्रतिबद्धता के साथ-साथ उत्कृष्टता ही उसे देश में चिकित्सा की पढ़ाई के इच्छुकों की पहली पसंद बनाती है. यह चिकित्सा अनुसंधान के अवसरों, बुनियादी ढांचे, नवाचार और प्रशिक्षण की पेशकश में अद्वितीय है. इसे डॉ. गुलेरिया से बेहतर कोई नहीं बता सकता क्योंकि एम्स से उनका जुड़ाव बचपन से ही रहा है. उनके पिता जे.एस. गुलेरिया यहां के डीन रहे हैं.  डॉ. गुलेरिया कहते हैं, ''एम्स ने हमेशा भविष्य के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया है.

आज, इसका मतलब होता है संचार कौशल, जीवन कौशल, चिकित्सा नैतिकता, आधुनिक तकनीक, नवाचार पर ध्यान देना.’’ यह पूछे जाने पर कि देश में एम्स चिकित्सा शिक्षा के शिखर पर स्थाई रूप से स्थान कैसे बनाए रखता है, उन्होंने विस्तार से बताया, ''आधुनिक चिकित्सा अब सिर्फ तथ्यों को सीखने भर सीमित नहीं रह गई है. वास्तविकता यह है कि वे सारी चीजें तो अब गूगल पर उपलब्ध हैं. आधुनिक चिकित्सा का अर्थ है सही प्रश्न पूछना, उन प्रश्नों के उत्तर खोजना और फिर उन उत्तरों को व्यवहार में लागू करने में सक्षम होना. और यही कौशल छात्र एम्स में सीखते आए हैं, और अभी भी पा रहे हैं.’’ 

यहां तक कि कोविड भी एम्स की उस प्रतिबद्धता को रोक नहीं सका. एम्स फैकल्टी ने कभी पढ़ाने से छुट्टी नहीं ली. डॉ. गुलेरिया कहते हैं, ''हमने अपना पाठ्यक्रम ऑनलाइन किया और पिछले साल से, हम छात्रों को छोटे-छोटे बैच में डमी पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग करा रहे हैं.’’ अगर कोविड के कारण छात्र तनाव और चिंता के शिकार होते तो उन्हें परामर्श देने और तनाव की स्थिति से बाहर निकालने के लिए एम्स का मनोचिकित्सा विभाग पूरे शैक्षणिक वर्ष में मुस्तैदी से तैयार रहा. 

संस्थान को अपग्रेड करने का काम भी साथ-साथ चला. डॉ. गुलेरिया बताते हैं, ''हमारे पास एक पुराना और एक नया मातृ एवं शिशु चिकित्सा ब्लॉक है. हमारे पास एक नई ओपीडी भी है, जिससे प्रतीक्षाकक्षों में भीड़ कम हो गई है. आने वाले वर्षों में अभी बहुत कुछ देखने को मिलेगा.’’ तकनीक-प्रेमी होने से लेकर शोध-उन्मुख मानसिकता रखने तक, डॉक्टरों को आज आधुनिक चिकित्सा की बढ़ती अपेक्षाओं को पूरा करने की आवश्यकता है. और एम्स का लक्ष्य उन सभी को इन सारी खूबियों से लैस करना है जो इससे जुड़ते हैं. 

गुरु वाणी
‘‘हमने हमेशा भविष्य के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया है. चाहे वह एआइ हो, टेलीकंसल्टिंग या शोध - हमारे विद्यार्थी सिर्फ तथ्य याद करना नहीं सीखते, बल्कि उनका इस्तेमाल करना, उन पर सवाल उठाना सीखते हैं. और यह भी सीखते हैं कि आधुनिक चिकित्सा की जरूरतों को पूरा करने के लिए कैसे नए प्रयोग किए जाएं 
डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, एम्स

पूर्व छात्र की राय
‘‘एम्स में यूजी और पीजी स्तर पर क्लिनिक टीचिंग असाधारण थी. मुझे वहां देर रात (शाम सात बजे से लेकर 12 बजे रात तक) तक चलने वाली कक्षाएं याद हैं, जहां हमारे एक प्रोफेसर (दिवंगत) दो-तीन घंटे तक एक केस पढ़ाते थे. इन कक्षाओं में सभी सेमेस्टरों से 20-30 स्टूडेंट आते थे. हमारी पढ़ाई के दौरान हम यहां आने वाले ऐसे अलग-अलग केसों से सीखते थे जो दूसरे मेडिकल कॉलेज के छात्र शायद अपने पूरे जीवन में नहीं देख पाते होंगे.हमारे प्रोफेसर बेहद पढ़े-लिखे, समझदार और पढ़ाने लिए तत्पर रहते थे’’
डॉ. अनूप मिश्रा 
चेयरमैन, फोर्टिस सी डॉक, प्रधानमंत्री  के पूर्व मानद फिजिशियन

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