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जनहित सर्वोपरि

महामारी ने टिस्स में ऑफलाइन कक्षाएं नहीं होने दीं, लेकिन इस आपदा ने संस्थान को और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मौका उपलब्ध कराया.

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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज

भारत के बैस्ट कॉलेज 2022 : सोशल वर्क
नंबर. 1- टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस्स), मुंबई

बोझो और बिस्लेरी रोमांचित हैं. मुंबई के देवनार के हरे-भरे इलाके में स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस्स) का कैंपस 18 महीने तक सुनसान रहा. कैंपस फिर से गुलजार होने लगा है और हॉल के बीच के गलियारे उन छात्रों से भरे हुए हैं जिन्हें ये दो कुत्ते प्यार जताते हुए चाट सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं और अपने लिए कुछ बढ़िया खाने की मांग कर सकते हैं.

इंफाल के क्रिस्टो कामरा उन छात्रों में से एक हैं, जिन्हंए बहुत कम दिनों के लिए ही सही लेकिन कैंपस लाइफ का आनंद मिल सका. इस साल की शुरुआत में, जब क्रिस्टो और थेमरेइसो औंगशी को पता चला कि एक महीने के लिए ही सही लेकिन उन्हें ऑफलाइन क्लास में शामिल होना है, तो मणिपुर के ये दोनों छात्र रोमांचित हो गए. 

उनके दो साल के कोर्स की अधिकांश कक्षाएं ऑनलाइन ही हुईं. औंगशी का कहना है, ''ऑनलाइन  में जो जुड़ाव होता है वह खोखला होता है क्योंकि उसमें भावनाओं का अभाव होता है और वे बहुत मददगार भी नहीं रहे. यहां आने के बाद ही हमने बहुत सारे दोस्त बनाए.’’ महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की प्राची भेलने इस बैच को ''सबसे लचीला’’ बताती हैं. वे कहती हैं, ''बहुत सारी चुनौतियां थीं, लेकिन हमने इसका अधिकतम लाभ उठाया.’’ 

173 स्नातकों के नवीनतम बैच के लगभग 70 प्रतिशत को हीरो मोटर कॉर्प, डेलॉइट, आइसीआइसीआइ फाउंडेशन के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रमों से लेकर एकलव्य, मेलजोल और प्रदान जैसे गैर-सरकारी संगठनों तक में, कई तरह की नौकरियां मिली हैं.

डॉ. बिपिन जोजो, जिन्होंने पिछले साल स्कूल ऑफ सोशल वर्क (एसओएसडब्ल्यू) के डीन के रूप में पदभार संभाला था, ने ब्रेकआउट रूम और ग्रुप एक्सरसाइज तथा प्रेजेंटेशन को प्रोत्साहित करके ऑनलाइन कक्षाओं की शिक्षण पद्धति में कुछ नयापन लाने के प्रयास जारी रखे. वे बताते हैं, ''विचार यह था कि ऑनलाइन क्लास में छात्रों को इतना ही सक्रिय रखा जाए जितना ऑफलाइन में होता है.’’

टिस्स ने उन छात्रों को आर्थिक और दूसरी सहायता भी दी जो खर्चे उठाने में सक्षम नहीं थे. लैपटॉप (27 छात्रों को) और इंटरनेट डेटा पैक (65 छात्रों को) प्रदान करने से लेकर भोजन और यात्रा खर्चों में मदद से लेकर फील्ड वर्क (13 छात्रों को) के लिए वित्तीय मदद दी की गई. 

ऑनलाइन शिक्षा का एक फायदा यह है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग भी संभव हो जाता है. उदाहरण के लिए, एसओएसडब्ल्यू के सेंटर फॉर लाइवलीहुड ऐंड सोशल इनोवेशन ने मानव केंद्र डिजाइन पर एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया, जिसमें टिस्स मुंबई के छात्रों ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांताक्रूज के छात्रों के साथ स्क्रीन स्पेस साझा किया. डॉ. जोजो ने देश के समाज कार्य से संबद्ध साहित्य को प्राथमिकता दी है और अपने सहयोगियों को अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में अधिक एकेडमिक पेपर लिखने के लिए प्रोत्साहित किया है.

महामारी ने टिस्स जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को और आवश्यक बना दिया है. सार्वजनिक और मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रमों के लिए आवेदनों में वृद्धि हुई है. डॉ. जोजो कहते हैं, ''सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली ने महामारी के दौरान बहुत ध्यान आकर्षित किया है. मनोवैज्ञानिक-सामाजिक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता बढ़ गई है.’’

एसओएसडब्ल्यू के सेंटर फॉर विमेन सेंटर्ड सोशल वर्क ने पुलिस के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, असम और बिहार में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिए अपने विशेष सेल का विस्तार किया. एक फील्ड वर्क असाइनमेंट में छात्रों ने केरल के एर्णाकुलम में जिले के  अधिकारियों को कोविड की दूसरी लहर के दौरान प्रवासी श्रमिकों के लिए एक केंद्र चलाने में मदद की. 

टिस्स में जुलाई में छात्रों की एक बड़ी आमद दिखाई देगी क्योंकि संस्थान अंतत: ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू कर रहा है. बिस्लेरी और बोजो दुम हिलाते नए छात्रों का इंतजार कर रहे होंगे. 
 

गुरु वाणी
‘‘हम हर प्रकार की विविधता को समाहित करने में सक्षम हैं— विकलांगता की, सेन्न्सुुएलिटी की, जाति, वर्ग या क्षेत्र की. हमारे सेलेन्न्शन पैनल में एक सदस्य एससी/एसटी समुदाय का भी होता है, ताकि सामाजिक समावेशीकरण के मामले पर ध्यान दिया जा सके. यह संस्थान का सबसे खास पहलू है’’

डॉ. बिपिन जोजो
डीन, स्कूल ऑफ सोशल वर्क, टिस्स, मुंबई
 

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