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नई ऊचाइंयों की ओर चले गुजरात और दिल्‍ली

पिछले पांच साल के दौरान गुजरात सरकार ने आदिवासी तहसीलों के विकास को 18,000 करोड़ रु. की. वहीं 2011-12 में दिल्ली का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 11.3 फीसदी रहा, जो जीडीपी के राष्ट्रीय स्तर 6.9 फीसदी से कहीं ज्यादा है. राज्य के जीएसडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 82 फीसदी है.

राज्य के किसी सुदूर इलाके के किसान से लेकर राजधानी अमदाबाद में बैठे किसी कारोबारी तक गुजरात के हर कोने में विकास अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है. राज्य की मौजूदा दस फीसदी वृद्धि दर के पीछे असल वजह यह है कि यहां हर क्षेत्र को बराबर विकसित करने पर ध्यान दिया गया है. गुजरात इकलौता राज्य है जिसने उद्योग और कृषि दोनों क्षेत्रों में दो अंकों की वृद्धि दर हासिल की है.

पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य में विकास की रफ्तार तेज करने में दो योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई है. राज्य के 42 आदिवासी तहसीलों के विकास के लिए चलाई गई 18,000 करोड़ रु. की वनबंधु योजना और 38 तटवर्ती तहसीलों में खासकर मछुआरों के लिए चलाई गई 11,000 करोड़ रु. की सागरखेडु योजना. दोनों की शुरुआत 2007 में हुई और 2011 में इनकी अवधि खत्म हो गई. 2007 से पहले आदिवासी इलाकों में सरकार सिर्फ कृषि की पढ़ाई करवाती थी, वहां विज्ञान पढ़ाने वाले स्कूल नहीं होते थे.SOS

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2010-11 में गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों और किसानों की मदद के लिए कुछ नई योजनाओं का आरंभ किया. ऐसी ही एक योजना है गरीब समृद्धि योजना, जिसके तहत 150 नगर निकायों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाया जाना था. गुजरात के योजना सचिव वी.एन. मैरा भी कहते हैं, ‘‘सरकार के अच्छे प्रदर्शन का मुख्य कारण खर्च किए गए पैसे के बदले सकारात्मक नतीजे हासिल करना रहा है.’’

सरकार अब शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है. सरकार ने पिछले दो साल के दौरान शहरी विकास पर 3,000 करोड़ रु. खर्च किए हैं. इसके बावजूद सरकार की प्राथमिकता सूची में अब भी कृषि क्षेत्र ही है.

गुजरात में 8 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के तहत ला दिया गया है जबकि आज से एक दशक पहले सिर्फ 10,000 हेक्टेयर जमीन पर ऐसी सुविधा थी. कोलंबो स्थित इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के तुषार शाह ने 2012 में गुजरात के सौराष्ट्र और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का तुलनात्मक अध्ययन किया था. दो दशक पहले तक दोनों क्षेत्र कृषि के मामले में एक-दूसरे के बराबर थे लेकिन आज विदर्भ की तुलना में सौराष्ट्र तीन गुना बेहतर है.

शाह कहते हैं, ‘‘कृषि के मामले में गुजरात ने सतत वृद्धि का एक बेहतरीन उदाहरण सामने रखा है जिसमें कृषि अनुसंधान पर जोर दिया गया और किसानों तक वैज्ञानिक विधि से खेती को पहुंचाने का काम किया गया है.’’

गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों तक लाभ वितरण के तरीकों में बदलाव करने के लिए सरकार ने 2009 में गरीब कल्याण योजना शुरू की थी. इसके तहत सरकारी अधिकारी किसानों को सीधे लाभ वितरित करते हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है. इन योजनाओं के मद्देनजर विकास के शीर्ष पर गुजरात के होने पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

दिल्ली
सर्वाधिक सुधार वाला छोटा राज्य

नई चुनौतियों के लिए तैयार

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से आप उनकी कामयाबी का नुस्खा पूछिए तो वे बस हौले से मुस्करा भर देती हैं और फिर कहती हैं, ‘‘मैं नहीं जानती कि इसका राज क्या है, लेकिन इतना जरूर है कि मैं मेहनत बहुत करती हूं. हमने दिल्ली के प्रशासन को बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा तक हर क्षेत्र में गरीबों से लेकर अमीरों तक की जरूरतों को पूरा करने के हिसाब से गढऩे की कोशिश की है.’’

पिछले साल 2011 में सबसे बड़ी जीत के बारे में पूछे जाने पर वे कहती हैं, ‘‘चुनना मुश्किल है.’’ उनके अफसर हालांकि कामयाबियों की झ्ड़ी लगा देते हैं. राज्य में 150 किमी लंबी विश्वस्तरीय मेट्रो रेल सेवा और सार्वजनिक यातायात तंत्र है, 75 फ्लाइओवर हैं, एक खूबसूरत हवाईअड्डा है और 7,000 लो फ्लोर बसें हैं. दीक्षित कहती हैं, ‘‘यहां दूसरे महानगरों से कहीं ज्यादा चौड़ी सड़के भी हैं.’’Sheila Dixit

राजधानी के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि की दर 2011-12 में 11.3 फीसदी रही जो कि जीडीपी की राष्ट्रीय दर 6.9 फीसदी से कहीं ज्यादा है. दिल्ली का जीएसडीपी 2010-11 के 26.45 लाख करोड रु. से उछलकर 2011-12 में 31.39 लाख करोड़ रु. पर पहुंच गया है.

दीक्षित दिल्ली को एक सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती हैं क्योंकि राज्य के कुल जीएसडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 82 फीसदी है. वे कहती हैं, ‘‘हम डाइंग, प्रिंटिंग और धातु कारखानों को हतोत्साहित कर रहे हैं क्योंकि इनसे प्रदूषण बढ़ता है. बुनियादी ढांचे की जरूरतों और बढ़ती आबादी के घनत्व के लिहाज से दिल्ली सर्वाधिक हरित शहरों में है.’’ वे बताती हैं कि कैसे उनकी सरकार ने पिछले सात साल में असोला और भाटी माइंस के पथरीले इलाकों में पर्यावरण की हरी चादर दोबारा बहाल कर दी. एक और उपलब्धि जिस पर उन्हें गर्व है वह है अगस्त में 917 अवैध कॉलोनियों को नियमित किया जाना.

जून में बिजली की दरों में करीब 20 फीसदी तक इजाफा कर दिया गया था लेकिन 22 अक्तूबर को इसे 15 फीसदी कम कर दिया गया. अब उपभोक्ताओं से 200 यूनिट की खपत तक प्रति यूनिट 3.70 रु. लिए जाएंगे जबकि 201 से 400 यूनिट के बीच 5.50 रु. की दर से पैसे लिए जाएंगे. दीक्षित कहती हैं, ‘‘दिल्ली में बिजली के निजीकरण का मॉडल देश में सर्वश्रेष्ठ है. इसके बावजूद लोग इसे राजनैतिक मुद्दा बनाने में लगे रहते हैं.’’

दीक्षित की प्राथमिकताओं में सामाजिक क्षेत्र अहम है. इस साल 33,000 करोड़ रु. के कुल बजट आवंटन का 65 फीसदी इस क्षेत्र को दिया गया है. उन्होंने बताया, ‘‘इसे पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और स्कूलों पर खर्च किया जाएगा.’’

दीक्षित 1998 से लगातार तीन चुनाव जीत चुकी हैं. जाहिर है, 14 साल तक एक राज्य को चलाते रहना एक रस भी हो जाता होगा. इस पर वे हंसते हुए कहती हैं, ‘‘मेरे बोर होने से पहले ही नई चुनौतियां सामने आ जाती हैं. शासन करने के लिहाज से दिल्ली एक दिलचस्प जगह है.’’

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