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नहीं रही क्राइम डिटेक्टिव

क्राइम ऐंड डिटेक्टिव '90 के दशक में प्यार, धोखा और सेक्स की कहानियों के कॉकटेल के रूप में यह पत्रिका शुरू की गई

साभारः नई सदी प्रकाशन साभारः नई सदी प्रकाशन

एक अच्छी खबर होती है और एक बुरी. दिलचस्प यह है कि बुरी खबर पढऩे में क्या ही मजा आता है, बशर्ते वह सच में बुरी न हो. तो अब दिल थाम कर सुनिए कि क्राइम ऐंड डिटेक्टिव मैगजीन बंद हो गई है. कई पाठकों के लिए यह बड़ा धक्का है, खासकर सैन्यकर्मियों, पूर्वोत्तर के निवासियों और हिप्पियों, हाजिरजवाब और बुद्धिमान लोगों के लिए. इनमें से ज्यादातर पुरुष हैं.

दरअसल, क्राइम ऐंड डिटेक्टिव बेहद रोचक और शानदार मैगजीन थी. हजारों पाठकों को इस मैगजीन का नशा था. मेरे जैसे अनगिनत लोगों की रेल यात्राओं की यह पसंदीदा साथी थी, क्योंकि मैगजीन के पन्नों पर अंकित सुर्खियां हमारे महान राष्ट्र के गुमनाम अंधेरे कोनों में पनपते या घट रहे सनसनीखेज अपराधों का खुलासा करते हुए एक-दूसरे से अनजान रेल यात्रियों के मनोरंजन का दिलचस्प सामान बन जातीं.

फरीदाबादः "चाची के साथ भतीजे के पापपूर्ण संबंध ने चाचा की ली जान.'' रामपुरः "भगवान ऐसी बेटियों से माता-पिता की रक्षा करें.''  मुजफ्फरनगरः "प्यार में पागल महिला ने किया सनसनीखेज अपराध.'' रायपुरः "पति से भी ज्यादा प्यारा साबित हुआ प्रेमी.'' दिल्लीः "एक महिला का दोहरा जीवनः दो पति और दो धर्म.''

क्राइम ऐंड डिटेक्टिव के कार्यकारी संपादक शैलाभ रावत की लिखी और निर्देशित मशहूर "फोटो कॉमिक्स'' भी कम मजेदार नहीं थी जिसमें अच्छाई और बुराई पर आधारित कामुकतापूर्ण कहानियां परोसी जातीं.

इन कहानियों की खास पेशकश और किरदारों के रामसे ब्रदर्स और कभी सास, कभी बहू  की तर्ज पर आपसी बर्ताव और बातचीत (अनुवाद के तड़के के साथ) के अंदाज ने प्रशंसकों की अपनी अलग ही फौज तैयार की थी. इसमें पेश विषयों में विविधता तो थी ही, निर्भीकता भी थी. इसमें ढोंगी बाबाओं की पोल खोलने के साथ ट्रांसवेस्टाइट्स और बीडीएसएम के प्रति भी समझदारी जताने की बात भी कह जाती थी.

सीधे-सादे मनोरंजन से भरपूर मैगजीन की अचानक मौत कैसे हो सकती है? यह किसने किया? रावत का कहना है कि रेलवे प्लेटफॉर्म और कैंटोनमेंट के अलावा पूर्वोत्तर में मैगजीन की बिक्री सबसे ज्यादा थी, वहीं वितरण संबंधी कुछ "कानूनी और तकनीकी समस्याएं'' पैदा हुईं जिसके बाद इसे बंद करना पड़ा.

हालांकि, सब कुछ खत्म नहीं हुआ है. रावत के अनुसार, क्राइम ऐंड डिटेक्टिव का हिंदी मासिक संस्करण मधुर कथाएं जो फोटो कॉमिक्स का स्रोत भी थी, अब भी, 50 लाख पाठकों के साथ शीर्ष पर है.

अंग्रेजी पत्रिका के अंत से परेशान और उदास प्रकाशकों के लिए अच्छी खबर है कि नई सदी प्रकाशन क्राइम ऐंड डिटेक्टिव को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फिर से शुरू करने जा रहा है. चलिए, रोमांच के कामुक किस्सापसंद दिलों को थोड़ा करार तो आएगा.

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