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स्मृतिः रपटा धाम पर रजा की याद में कुछ

चित्रकार एस.एच. रजा की याद में होगा छातों पर कल्पना के रंग उभारने का अनूठा आयोजन.

रपटा धाम रपटा धाम

भारत के मूर्धन्य चित्रकार एस.एच. रजा की याद में रजा फाउंडेशन दिल्ली में नियमित कुछ न कुछ करता रहा है. अब रजा की दूसरी बरसी के मौके पर मध्य प्रदेश के मंडला जिले में—उनकी जन्मभूमि और जहां उन्हें दफनाया गया—पांच दिन का सांस्कृतिक जलसा हो रहा है.

नर्मदा के किनारे रपटा धाम पर 19 से 23 जुलाई तक हो रहे इस आयोजन के 5-6 हिस्से हैं. पर इसमें एक दिलचस्प उपक्रम रखा गया है, जिसका नाम है छाते पर रंग. इसके तहत वहां 200 छाते आम जनता के बीच इस सोच के साथ रखे जाएंगे कि जो भी आए, किसी एक छाते पर रंगों से अपनी कल्पना उतारे और छाता ले जाए.

इसके पीछे मकसद स्थानीय आदिवासी आबादी के भीतर की कलात्मकता को उकसाना है. आयोजक रजा फाउंडेशन के प्रमुख अशोक वाजपेयी वैसे भी इस तरह के उकसावे के लिए जाने जाते हैं. "नर्मदाजी के किनारे'' आयोजन में भैरूंसिंह चौहान के कबीर गायन और ऋतु वर्मा की पंडवानी के अलावा शेख गुलाब की नर्मदा बंबूरिया की प्रस्तुति होगी.

यहीं पर युवा चित्रकार कार्यशाला में आपको दर्जन भर नए-ताजे चेहरे दिखेंगे. युवा कला लेखक कार्यशाला भी है. आयोजन की आखिरी कड़ी बिंझिया गांव के कब्रिस्तान में, दो वर्ष पूर्व दिवंगत रजा के समाधि दर्शन की है.

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