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केरलः पिनाराई का हाइवे सफर

गरीबों और उनसे अधिक समृद्ध लोगों की आकांक्षाओं से सावधानीपूर्वक जोड़ी गई इस योजना से, शायद पहली बार केरल में वाम मोर्चा सरकार ने राजनीति और विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है.

प्रगति की सड़क कोच्चि फ्लाइओवर का उद्घाटन करते केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन प्रगति की सड़क कोच्चि फ्लाइओवर का उद्घाटन करते केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन

नया लोकप्रिय शब्द है कनेक्टिविटी. अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में ही, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सचेत ढंग से और जान-बूझकर उस रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, जिसके बारे में उन्हें उम्मीद है कि इससे वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की सरकार के खिलाफ कोई भारी-भरकम सत्ता विरोधी भावना नहीं पनपेगी. पिनाराई का नया नारा—नव केरलम (न्यू केरल) बड़े पैमाने पर बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क के माध्यम से राज्य के आधारभूत ढांचे के विकास पर केंद्रित है. गरीबों और उनसे अधिक समृद्ध लोगों की आकांक्षाओं से सावधानीपूर्वक जोड़ी गई इस योजना से, शायद पहली बार केरल में वाम मोर्चा सरकार ने राजनीति और विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है.

राज्य सरकार कासरगोड-तिरुवनंतपुरम राजमार्ग जैसे मुख्य मार्गों को चौड़ा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. इससे गुजरना भारी यातायात, बढ़ती दुर्घटनाओं और जर्जर हालत के कारण एक भयावह अनुभव है. जनसंख्या के भारी घनत्व से राजमार्गों को चौड़ा करने के लिए भूमि अधिग्रहण जटिल समस्या है. विजयन कहते हैं कि उनका उद्देश्य इसे बदलने का है.

'पहाड़ी और तटीय सड़कों सहित 60 मीटर चौड़े राष्ट्रीय राजमार्ग और 12 मीटर चैड़े राज्य राजमार्ग' की योजना का अनावरण करते हुए मुख्यमंत्री विजयन कहते हैं, ''सड़कों के बिना राज्य प्रगति नहीं कर सकता.'' उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार सड़कों के लिए जमीन अधिग्रहण की खातिर बाजार मूल्य और बढिय़ा पुनर्वास पैकेज दे रही है. मुख्य सचिव को निजी तौर पर भूमि अधिग्रहण की निगरानी के लिए कहा गया है.

विजयन दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं. पेचीदा जमीन अधिग्रहण को सरल बनाया गया है. मुख्य सचिव के.एम. अब्राहम कहते हैं, ''सरकार ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया है कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की गति बढ़ाई जाए. हम प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं और प्रक्रियाओं में बाधाओं को दूर कर रहे हैं.''

केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआइआइएफबी) के माध्यम से परियोजना के लिए फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है. राज्य को प्रवासी चिट फंड के माध्यम से भी 10,000 करोड़ रु. मिलने की उम्मीद है, जिसमें आप्रवासी केरलवासी निवेश कर सकते हैं और अपने गृह राज्य को बेहतर बनाने में योगदान भी दे सकते हैं.

नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के 20,000 करोड़ रु. की लागत से चैड़े किए जाने वाले 610 किलोमीटर के राजमार्गों के अलावा, कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक के 13 जिलों को जोडऩे वाले 1,251 किलोमीटर के पहाड़ी राजमार्गों और 623 किलोमीटर के तटीय राजमार्गों को 2020 तक पूरा किया जाना है.

केरल में बेहतर सड़क संपर्क के लिए मुख्यमंत्री की कोशिश ने उन्हें सभी वर्गों से प्रशंसा दिलाई है. कोच्चि स्थित वित्तीय सेवा कंपनी के प्रबंध निदेशक सी.जे. जॉर्ज ने मुख्यमंत्री की उन निहित स्वार्थों के खिलाफ खड़े होने के लिए सराहना की जो दशकों से भूमि अधिग्रहण में बाधा बनते रहे. एक अग्रणी पर्यटन पेशेवर जोस डोमिनिक भी प्रसन्न हैं. वे कहते हैं, ''इससे पर्यटन को बेहद जरूरी प्रोत्साहन मिलेगा.'' ऐसा लगता है कि अंततः 'भगवान के अपने देश' का सफर निर्बाध हो सकेगा.

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