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अब चीन ने चली भूटान चाल

100 वर्ग किलोमीटर जमीन चीन डोकलाम के मजदीक चाहता था ताकि भारत के लिए नाजुक जगह चिकन्स नेक के नजदीक पहुंच सके.

अब चीन ने चली भूटान चाल अब चीन ने चली भूटान चाल

हाल का डोकलाम पर टकराव चीन की ओर से भारत-चीन-भूटान के तिराहे पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क बनाकर सिर्फ यथास्थिति को बदलने का मामला नहीं है. यह बीजिंग की ओर से एक अन्यजो शायद ज्यादा महत्वपूर्ण हैयथास्थिति को बदलने की कोशिश से भी जुड़ा हैः भारत के साथ भूटान के रिश्ते. बीजिंग में भूटान के साथ रिश्ते मजबूत करने की मांग बढ़ती जा रही है, क्योंकि उसके साथ चीन के कूटनीतिक संबंध नहीं हैं. 16 जून को टकराव के बाद के हफ्तों में यह साफ दिखाई देने लगा है.

पश्चिम बीजिंग के एक थिंकटैंक चारहार इंस्टीट्यूट में 25 जुलाई को डोकलाम के मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श के लिए जब प्रमुख सामरिक विशेषज्ञ जमा हुए तो दो दर्जन विशेषज्ञों, जिनमें भारत में काम कर चुके पूर्व राजनयिक शामिल थे, का एक ही मत था कि नेपाल और श्रीलंका की तरह भूटान के साथ भी रिश्ते मजबूत करने की सख्त जरूरत है. चीन ने नेपाल और श्रीलंका के साथ रिश्ते बढ़ाकर भारत के प्रभाव को कम करने की लगातार कोशिश की है.

चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से 2 अगस्त को दिए गए बयान में भी इस बात का संकेत देखने को मिला, जिसमें कहा गया कि '80 के दशक से चीन और भूटान एक स्वतंत्र सार्वभौम देश की तरह अपने सीमा विवाद को हल करने के लिए बातचीत करते रहे हैं. इस बयान में महत्वपूर्ण शब्द ''सार्वभौम" का इस्तेमाल किया गया था, क्योंकि बीजिंग में व्यापक रूप से यही माना जा रहा है कि भारत ने थिंपू के बुलावे के बिना ही डोकलाम में ''खल" दिया है. बयान में आगे यह भी कहा गया कि चीन और भूटान के बीच सीमा विवाद का भारत से कुछ भी लेना-देना नहीं है तथा तीसरे पक्ष के तौर पर भारत को चीन और भूटान के बीच सीमा के मुद्दे पर बातचीत में हस्तक्षेप करने या विघ्न डालने का कोई अधिकार नहीं है, साथ ही भूटान की ओर से इलाके पर दावा करने का तो बिल्कुल भी अधिकार नहीं है.

बयान में भारत पर इशारों में कटाक्ष करते हुए कहा गया, ''चीन ने हमेशा भूटान की सार्वभौमिकता और स्वतंत्रता का सम्मान किया है. दो देशों के बीच कोई औपचारिक संबंध न होने के बावजूद उच्च स्तर की बातचीत होने लगी है. जून 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ जब ब्राजील में भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री जिग्मी थिनले से मिले थे तो उन्होंने बताया था कि चीन ''शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों के आधार पर भूटान के साथ औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध बनाने के लिए तैयार है."

पिछले साल इस बयान को पहले से भी ज्यादा जोर के साथ तब दोहराया गया था जब विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा के मुद्दे पर 24वें चक्र की बातचीत के समय भूटान के विदेश मंत्री डैमचो दोरजी को बताया था कि दोनों देशों के बीच ''ल्दी ही राजनयिक संबंध स्थापित करना न सिर्फ दोनों देशों के साझा हित में है बल्कि क्षेत्रीय स्थायित्व और विकास के लिए भी फायदेमंद है."

चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज की कियू योंगहुई ने डोकलाम के मुद्दे पर विचार-विमर्श के दौरान कहा कि यह निश्चित है कि भारत भूटान में अपना प्रभाव खो देगा. वे कहती हैं, ''हां, भूटान हाल के दशकों में भारत की देखरेख में रहा है, खासकर ऊर्जा और अर्थव्यवस्था के मामले में. पहले नेपाल भी उस पर आश्रित था. लेकिन अब नेपाल धीरे-धीरे भारत के नियंत्रण से बाहर निकल गया है. 

1971 में भूटान के संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल होने के बाद वह (भूटान) कई बार सार्वजनिक रूप से भारत का विरोध कर चुका है. इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले दिनों में भूटान ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हो जाएगा."

चीन के इरादों की अस्पष्टता को देखते हुए यह पक्की तौर पर कहना असंभव होगा कि डोकलाम से होकर सड़क बनाने का उद्देश्य क्या यही था. बीजिंग में आम धारणा यही है कि भारत ने सीमा को लेकर 24वें चक्र की बातचीत को गड़बड़ा दिया है. इस बातचीत में चीन ने 1996 में मध्य सेक्टर में 495 वर्ग किमी और पश्चिमी सेक्टर में विवादित 269 वर्ग किमी जमीन देने की पेशकश की थी और इसके बदले में तिराहे के नजदीक डोकलाम में करीब 100 वर्ग किमी जमीन दिए जाने की मांग की थी, जिससे वह भारत के लिए नाजुक जगह ''चिकेंस नेक", या सिलीगुड़ी गलियारे के नजदीक पहुंच जाता. 

बीजिंग में चर्चा के दौरान पूर्व राजनयिक माओ सिवेई का कहना था कि भूटान ने शुरू में उसकी इस पेशकश को स्वीकार कर लिया था लेकिन ''ई कारणों से और शायद भारतीय सुरक्षा संबंधी समस्या के चलते वे आखिरकार पीछे हट गए." बीजिंग का मानना है कि हमेशा ऐसा नहीं होगा. चीन को लगता है कि भूटान आने वाले दिनों में भारत के प्रभाव से बाहर निकलेगा. ऐसा प्रयोग वह पहले भी नेपाल के मामले में कर चुका है. इसलिए चीन इस बार भी अपने इरादों को अमली जामा पहनाने में जुटा है.

 

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