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दो मुख्यमंत्रियों की परीक्षा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके छत्तीसगढ़ी समकक्ष भूपेश बघेल. बघेल को असम और उत्तर प्रदेश की चुनावी जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, पर वे पार्टी की सीटों में इजाफा नहीं कर सके

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हैसियत तय होगीः अशोक गहलोत और  भूपेश बघेल
हैसियत तय होगीः अशोक गहलोत और भूपेश बघेल

गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के साथ कांग्रेस ने उन दो नेताओं पर भी ध्यान लगाया है जो दोनों राज्यों में चुनावों की देख-रेख कर रहे हैं—राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके छत्तीसगढ़ी समकक्ष भूपेश बघेल. बघेल को असम और उत्तर प्रदेश की चुनावी जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, पर वे पार्टी की सीटों में इजाफा नहीं कर सके. लेकिन गहलोत ने 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में कांग्रेस की ऐसी मदद की कि वह अपना दशकों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाई और भाजपा को वाकई डरा दिया. नतीजों का दिन—8 दिसंबर—दोनों मुख्यमंत्रियों की हैसियत तय कर सकता है, खासकर जब उनके अपने गृहराज्यों में पार्टी के बागी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

गुजरात मॉडल?

गुजरात में विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की पहली सूची से जब भाजपा ने 38 मौजूदा विधायक टपका दिए गए, तो उसकी गूंज सुदूर कर्नाटक में भी सुनाई दी. इस दक्षिणी राज्य में मई 2023 में चुनाव होने वाले हैं और प्रदेश भाजपा को अपनी छवि बदलने की सख्त जरूरत है. लिहाजा, जब राज्य से राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया ने ट्वीट किया कि जिस तरह गुजरात में बड़े नेताओं ने युवाओं के लिए जगह खाली की, ''कर्नाटक में भी यह मॉडल कारगर होना चाहिए'', तो इससे राज्य भाजपा में खलबली मच गई.

तारीफों के पुल 

आप जब तक मंत्री हैं, तब तक मुझे बिहार के लिए सोचने की जरूरत नहीं.'' बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की यह टिप्पणी अपनी पार्टी या महागठबंधन के किसी मंत्री के लिए नहीं थी. उन्होंने यह बात केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नितिन गडकरी के लिए कही. गडकरी बिहार के रोहतास में एक पुल के शिलान्यास के लिए आए थे, मगर इस मौके पर गडकरी और तेजस्वी दोनों ने एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांधे. इससे किसी को यह समझ में नहीं आ रहा था कि ये दोनों परस्पर विरोधी पार्टी के मेंबर हैं.  

चाचा की अहमियत

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चाचा शि‍वपाल यादव को विधानसभा चुनाव के बाद हुए आजमगढ़ और रामपुर के लोकसभा उपुचनाव और गोला गोकर्णनाथ विधानसभा उपचुनाव से दूर रखा था. मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में उन्हें चाचा शिवपाल यादव की याद आई है. सपा ने मैनपुरी सीट के तहत जसवंतनगर से विधायक शिवपाल को न केवल स्टार प्रचारक बनाया है बल्कि‍ अखिलेश ने पत्नी और सपा प्रत्याशी डिंपल यादव के साथ चाचा के घर पहुंचकर उनका आशीर्वाद लिया. चाचा का आशीर्वाद बहू डिंपल को कितना फलीभूत होता है, यह चुनाव नतीजा ही बताएगा.

ये कौन मूर्तिकार है

राजस्थान विधानसभा में बनाया गया देश का पहला डिजिटल म्यूजियम इन दिनों चर्चा में है. चर्चा पहले डिजिटल म्यूजियम को लेकर कम बल्कि इसमें तैयार की गई मूर्तियों को लेकर ज्यादा है. इमनें से कई मूर्तियां असली चेहरों से मेल नहीं खातीं. इन मूर्तियों को आम जन तो क्या, खुद नेता भी नहीं पहचान पा रहे हैं. मसलन, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे की मूर्ति को देखकर लगता है कि यह अशोक गहलोत सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री ममता भूपेश की मूर्ति है. पूर्व विधानसभाध्यक्ष परसराम मदेरणा की पोती दिव्या मदेरणा ने अपने दादा की मूर्ति देखकर कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया दी. 'राजनीतिक आख्यान संग्रहालय' नामक इस म्यूजियम में राजस्थान के अब तक के मुख्यमंत्रियों और विधानसभाध्यक्षों की मोम की मूर्तियां लगाई गई हैं. सयाने बस यही सवाल कर रहे हैं— 'ये कौन मूर्तिकार है?'

—साथ में पुष्यमित्र और आनंद चौधरी

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