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उत्तराखंड में मंत्रियों की किचकिच से सरकार की किरकिरी

सत्तारूढ़ भाजपा के मंत्रियों और नेताओं के समर्थकों के बीच मारपीट और खींचतान की घटनाओं से संगठन में जा रहा नकारात्मक संदेश.

मंत्रणाः पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से बातचीत करते भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट मंत्रणाः पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से बातचीत करते भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट

खींचतान दिख रही है. मंत्रिमंडल के सदस्यों से लेकर पार्टी के भीतर तक रस्साकशी से संदेश गलत जा रहा है. पहले दो मंत्रियों सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत का कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री के सामने ही भिड़ जाना सुर्खी बना, तो फिर हरिद्वार में सतपाल महाराज और मदन कौशिक समर्थकों के बीच हाथापाई हुई और मेयर मनोज गर्ग के अस्पताल पहुंचने से सरकार और भाजपा की किरकिरी हुई है.

विभागों के बंटवारे पर मंत्रियों में असंतोष को लेकर पहले ही चर्चाओं का बाजार गर्म था. हालांकि तब मंत्रियों की नाखुशी सतह तक नहीं आ पाई, लेकिन अंदरखाने कुछ ने अपनी नाराजगी प्रकट करने से गुरेज भी नहीं किया. इसके बाद कद्दावर नेता और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज कुछ कैबिनेट बैठकों से अनुपस्थित रहे.

इसका कारण पर्यटन और तीर्थाटन मंत्री होने के बावजूद चारधाम यात्रा के लिए बसों की रवानगी के समय उन्हें न बुलाया जाना और उनके विरोधी छोटे भाई को इसमें बुलाया जाना था. इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्र के एक दौरे में उनके हेलिकॉप्टर का उन्हें वहीं छोड़कर वापस आ जाना भी उनकी नाराजगी के कारणों मे शामिल था.

इसकी शिकायत उन्होंने मुख्यमंत्री से भी की थी. इसके बाद महाराज और वन मंत्री हरक सिंह रावत की मंत्रिमंडल की बैठक में ही केदारनाथ में प्राधिकरण के मामले मे एक-दूसरे के साथ भिड़ंत हो गई. महाराज जिस प्राधिकरण को महत्वपूर्ण बता रहे थे हरक सिंह ने उसके कामकाज पर उंगलियां उठाईं. हद तब हो गई जब हरिद्वार में महाराज और मंत्री मदन कौशिक के समर्थकों में जमकर लाठी-डंडे चले. राजनैतिक विश्लेषक इसे मंत्रियों के बीच बढ़ती दूरियों के रूप में देख रहे हैं.

इन तमाम घटनाओं से अब भाजपा में भी भितरघात का अंदेशा नेताओं को सताने लगा है. चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए विजय बहुगुणा की अजय भट्ट से मुलाकात ने सियासी अटकलों पर मुहर लगा दी. अटकलें हैं कि बहुगुणा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी भेंट कर सकते हैं. विरोधी मानते हैं कि बहुगुणा की सक्रियता बेटे का राजनैतिक कद बढ़ाने केलिए है.

बहुगुणा अपने पुत्र और सितारगंज से विधायक सौरभ बहुगुणा के साथ अजय भट्ट के निवास पर पहुंचे थे और आधे घंटे वहीं रहे. इसके बाद बहुगुणा हरक सिंह से भी मिले. इस मुलाकात में बहुगुणा ने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं की उपेक्षा पर चर्चा की. हालांकि भट्ट ने इससे इनकार किया कि बहुगुणा अपने पुत्र को मंत्री बनवाने का प्रयास कर रहे हैं.

हरक सिंह भी कैबिनेट बैठक में अनुपस्थित रहने के पीछे नाराजगी से इनकार करते हैं. उन्होंने कोटद्वार के हॉस्पिटल में कहने के बावजूद डॉक्टर न भेजने पर नाराजगी जरूर जताई. पिछले दिनों हरिद्वार जिले में तिरंगा यात्रा के दौरान जिले के खानपुर में हरिद्वार के सांसद निशंक और कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में गए और खानपुर से विधायक बने कुंवर प्रणव चैंपियन समर्थकों के बीच लड़ाई के मामले को भी जिले के भाजपा कार्यकताओं की गुटबाजी के रूप में देखा जा रहा है.

अपने खिलाफ एफआइआर दर्ज होने से चैंपियन नाराज हैं. उनके साथ हरिद्वार ग्रामीण के विधायक यतीश्वरानंद और ज्वालापुर के विधायक सुरेश राठौर ने भी इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से मुलाकात की. प्रदेश अध्यक्ष ने इन मामलों में मुख्यमंत्री के संकटमोचन की भूमिका निभाते हुए मुक्चयमंत्री से इन विधायकों को अपने साथ ले जाकर मुलाकात तो कराई ही कुंवर प्रणव चैंपियन को भी मुख्यमंत्री से मिलवाकर उनके खिलाफ दर्ज रपट की बाबत जानकारी दी और मामले को शांत कराने का प्रयास किया. अजय भट्ट ने कहा कि पार्टी में कहीं भी कोई गुटबाजी या असंतोष नहीं है.

हरिद्वार में प्रेमनगर आश्रम पर नगर निगम की जमीन और एक नाले पर अतिक्रमण का आरोप कुछ स्थानीय लोग लगाते रहे हैं. इसी को लेकर प्रेमनगर आश्रम में मौजूद महाराज के समर्थक लाठी-डंडों से लैस होकर मेयर और उनके साथ आए नगर विकास मंत्री मदन कौशिक समर्थकों पर टूट पड़े. पथराव और लाठी-डंडे चलने के कारण नगर मेयर समेत कई कार्यकर्ता चोटिल हो गए. समर्थकों के बीच टकराव के बाद भी अजय भट्ट ने प्रेमनगर आश्रम पहुंचकर उनसे एकांत में बात की. भट्ट ने दोनों मंत्रियों के बीच मध्यस्थता की और मामले को बढऩे से बचाया. बहरहाल, खींचतान की एक के बाद एक हो रही घटनाओं से संगठन और जनता में नकारात्मक संदेश जरूर जा रहा है.

 

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