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उत्तराखंडः अपने ही करा रहे फजीहत

राज्य में भाजपा के विभिन्न नेता अपनी हरकतों से पार्टी की किरकिरी करा रहे हैं जो उसे भारी पड़ सकता है

देहरादून के धरमपुर विधानसभा से भाजपा विधायक के घर के बाहर धरना देने आई क्षेत्र की जनता के बीच स्वयं धरने पर बैठ गए चमोली देहरादून के धरमपुर विधानसभा से भाजपा विधायक के घर के बाहर धरना देने आई क्षेत्र की जनता के बीच स्वयं धरने पर बैठ गए चमोली

उत्तराखंड में भाजपा आलाकमान किसी भी तरह दोबारा सत्ता में आने की जी तोड़ कोशिश में लगा है. उसने इसी धुन में चार महीने में एक-एक करके राज्य के तीन मुख्यमंत्री बदल डाले. अब भाजपा आलाकमान निर्दलीय और मुख्य प्रतिपक्षी कांग्रेस के विधायकों को अपने पाले में लाकर चुनाव जीतने की नई बिसात बिछा रहा है. इसी के तहत पार्टी ने चुनाव प्रभारी के रूप में इस तरह की नाराजगी से निबटने की जिम्मेदारी चुनाव प्रभारी बनाकर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, सह प्रभारी लॉकेट चटर्जी और सरदार आर.पी. सिंह को भी उत्तराखंड में सिख और बंगाली समुदायों को साधने के लिए भेजा है. अब तक एक निर्दलीय और एक कांग्रेस के विधायक को भाजपा में लाकर पार्टी आलाकमान ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में जुटी भीड़ की हवा निकालने की कोशिश की है. लेकिन, आलाकमान की इस जीतोड़ मेहनत पर भाजपा के मंत्री और विधायक ही पानी फेरते दिख रहे हैं.

दरअसल, कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि ढैंचा बीज मामले में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की बात मान लेते तो त्रिवेंद्र सिंह रावत पर मुकदमा दर्ज हो जाता, और वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाते. उनके अनुसार, हरीश रावत ने बतौर मुख्यमंत्री एम्स में भर्ती रहने के दौरान ढैंचा बीज मामले की फाइल मंगवाई थी. लेकिन हरक सिंह ने उस फाइल पर त्रिवेंद्र के पक्ष में दो पेज का नोट लिखा था, जिससे हरीश रावत कुछ कर नहीं पाए. हरक सिंह ने कहा कि उन्होंने त्रिवेंद्र सिंह रावत का हमेशा साथ दिया, पर हरीश रावत को समझना बहुत मुश्किल है, हरीश रावत आज त्रिवेंद्र की तारीफ कर रहे हैं.

असल में हरीश रावत भाजपा में आग लगाने के लिए समय-समय पर त्रिवेंद्र सिंह रावत की बतौर मुख्यमंत्री तारीफ करते रहे हैं. उनकी तारीफ का असल मकसद त्रिवेंद्र के कार्यकाल में दूध की मक्खी की तरह निकाल दिए गए कांग्रेस के उन बागी नेताओं के जख्मों पर नमक छिड़कना होता है जो कि भाजपा सरकार में मंत्री तो बन गए, लेकिन प्रचंड बहुमत के चलते बतौर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने उनको कोई लिफ्ट नहीं दी थी. कांग्रेस से 2016 और 2017 में बगावत कर ये नेता तब हरीश रावत के लिए मुसीबत बन गए थे. इसी के चलते हरीश रावत पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की तारीफ करते हुए इनके जख्मों पर नमक छिड़कने की कोशिश करते हैं.

इसी तारीफ के चलते भाजपा सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत ने एक इंटरव्यू में एक तीर से दो निशाने साधे हैं. एक तरफ उन्होंने प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह के कृषि मंत्री के कार्यकाल में हुए ढैंचा बीज घोटाले के जिन्न को फिर से बोतल से बाहर निकालते हुए कहा है कि हरीश अपने मुख्यमंत्रित्व काल में त्रिवेंद्र सिंह को जेल भेजना चाहते थे. वहीं, हरक सिंह यह भी कह दिया कि इस फाइल में उन दिनों बतौर कृषि मंत्री उन्होंने दो पेज का सकारात्मक नोट लिखकर त्रिवेंद्र सिंह को जेल जाने से बचा दिया था. साथ ही, ढैंचा बीज प्रकरण की चर्चा करके हरक सिंह ने त्रिवेंद्र सिंह को असहज भी कर दिया है.

हरक सिंह के इस खुलासे पर जहां पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह सफाई देते यह कहकर प्रकारांतर में हरक सिंह पर निशाना साध रहे हैं कि उत्तराखंड में ढैंचा ढैंचा गधा करता है. वहीं हरीश रावत भी कहने लगे हैं कि रावतों की क्रॉस फायरिंग में उन्हें न घसीटा जाए. उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने यहां ऐसे बहुत से लोग इकट्ठा कर रखे हैं, जो एक दूसरे का सिर फोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं. अपनी सफाई में उन्होंने कहा, ''मैं उस वक्त एम्स में भर्ती था. जिंदगी और मौत से जूझ रहा था. इतना समय नहीं था कि मैं इन चीजों पर विचार कर पाता कि किसको जेल भेजना है और किसको नहीं. जब मैं स्वस्थ्य हो गया तो मैं फाइल का अध्ययन कर पाया कि इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्री और सचिव पर भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता है.''

हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने हरक सिंह को उनके बयानों पर आलाकमान की नाराजगी के बारे में बता दिया लेकिन उनके तेवर नरम नहीं हुए. हरक सिंह ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के लिए कांग्रेस से बगावत की थी. यह संकेत है कि वे एक बार फिर से जोखिम लेने के मूड में हैं.

इस बयान के सार्वजनिक होते ही उत्तराखंड में अपना जनाधार खड़ा करने की कवायद में जुटी आम आदमी पार्टी बीच में कूद पड़ी. आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि हरक सिंह रावत के बयान से जाहिर हो चुका है कि कैसे कांग्रेस-भाजपा की अंदरखाने एक-दूसरे से मैच फिक्सिंग है और कैसे हरक सिंह ने मंत्री रहते हुए ढैंचा बीज घोटाले में त्रिवेंद्र सिंह पर कार्रवाई को रोका था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा की सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार पर खुलकर विरोध इसी मिलीभगत के कारण नहीं कर पाती. उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार होती है तब भाजपा भी उसके भ्रष्टाचार पर चुप्पी साध लेती है. आम आदमी पार्टी इस प्रकरण को भ्रष्टाचार के खिलाफ चुनावी मुद्दा बनाने की जुगत में जुट गई है.

उधर, देहरादून के धरमपुर से भाजपा विधायक और पूर्व मेयर रहे विनोद चमोली ने भी पार्टी की किरकिरी करा दी. दरअसल, 12 सितंबर को उनकी विधानसभा में पड़ने वाले ऋषि विहार के नाले को उनके कार्यकाल के साढ़े चार साल पूरे होने के बाद भी अंडर ग्राउंड न किए जा सकने पर उस क्षेत्र के लोगों ने उनके घर के बाहर धरना देना शुरू कर दिया. आगामी चुनाव के सिर पर होने और मौके की नजाकत को भांपते हुए खुद विनोद चमोली अपने ही विरोध में चल रहे धरने में बैठकर यह जताने लगे मानो उस मांग के पक्षधर वे खुद हों और मांग को पूरा करने की जिम्मेदारी उनकी नहीं, किसी और की हो. इससे भाजपा की खूब किरकिरी हुई.

इसके दो दिन पहले राज्य के कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत भी ऐसा पैंतरा अपने विधानसभा क्षेत्र में अपनाते दिखे. 10 सितंबर की रात को वे अपने विधानसभा क्षेत्र में बिजली विभाग के खिलाफ गांव वालों की ओर से दिए जा रहे धरने में बैठ गए. इससे प्रदेश की धामी सरकार की किरकिरी होना स्वाभाविक थी. इसको लेकर हरीश रावत और कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, दोनों ने ही भाजपा सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया. असल में हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर में बिजली गुल रहने से गुस्साए लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ धरना दिया तो मौके की नजाकत भांपकर स्थानीय विधायक होने के चलते भगत ने भी धरने में ही शामिल होना उचित समझा.

हरीश रावत ने उनके धरने पर बैठने को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंशीधर भगत ने चौराहे पर सरकार की हांडी फोड़ दी है. हरीश रावत ने ट्वीट किया, ''बंशीधर भगत धरने पर हैं, कह रहे हैं बिजली विभाग चोर है. विपक्ष कहे बात समझ में आती है. अब तो सरकार ही अपने एक हिस्से को चोर बता रही है. ऐसे में 'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फारसी क्या' यह सामूहिक उत्तरदायित्व की बात है. बंशीधर भगत ने चौराहे पर इस सरकार की हांडी फोड़ दी है.''

असल में भाजपा में यह चर्चा आम है कि आगामी चुनाव में पार्टी से आम लोगों की नाराजगी के चलते पार्टी 20 से अधिक विधायकों के टिकट काटने जा रही है. इसी भय और अपना टिकट बचाने की कोशिश में विधायकों ने यह पैंतरा आजमाना शुरू कर दिया है और जनता के बीच बने रहने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. ऐसा करते हुए दिखाई देने के लिए वे सरकार को भी असहज करने से नहीं चूक रहे. देहरादून की रायपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ, जो कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में आए थे, की मुख्यमंत्री के क्षेत्र में उनके कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत की मौजूदगी में पार्टी कार्यकर्ताओं से औकात देखने और दिखा देने की धमकियों को बयान करतीं तस्वीरें और वायरल वीडियो दिल्ली आलाकमान तक पहुंचा दी गईं. उमेश शर्मा काऊ खुद भी दिल्ली में आलाकमान से मिलकर आ गए. दिल्ली से लौटते ही न केवल उन्हें उनके साथ कांग्रेस से बगावत कर आए हरक सिंह का साथ मिला, बल्कि मंत्री सतपाल महाराज और सुबोध उनियाल का भी समर्थन मिला. इसने पार्टी के अंदरूनी झगड़े को चौराहे पर ला दिया.

इसके बाद भी भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ है. रायपुर क्षेत्र में भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने अपने ही विधायक के खिलाफ महापंचायत कर डाली और विधायक को पार्टी से निकालने की मांग भी की. जाहिर है, ठीक चुनाव से पहले ऐसी हरकतों से भाजपा और उसके संगठन को तो नुक्सान होगा ही, सरकार को भी इससे असहज होना पड़ रहा है. यह राज्य की सत्तारुढ़ भाजपा को भारी पड़ सकता है.

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