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अग्नि परीक्षा

लीथियम-आयन बैटरियां अत्यधिक ज्वलनशील होने के अलावा काफी महंगी भी होती हैं और इलेक्ट्रिक वाहन की लागत का 20-40 फीसद इन्हीं पर खर्च हो जाता है. ऐसे में क्या इनका कोई विकल्प है?

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इलेक्ट्रिक वाहन: इनका कोई विकल्प है? इलेक्ट्रिक वाहन: इनका कोई विकल्प है?

अप्रैल की 22 तारीख को आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा निवासी ग्राफिक डिजाइनर 40 वर्षीय कोटकोंडा शिव कुमार ने 70,000 रुपये में एक नया ई-स्कूटर खरीदा था. उन्होंने रात भर चार्ज करने के लिए स्कूटर की बैटरी का चार्जर लगाया, लेकिन चार्जिंग के दौरान उसमें आग लग गई और विस्फोट हो गया जिससे कुमार की मौत हो गई. हादसे में कुमार की पत्नी और उनकी दो बेटियां गंभीर रूप से झुलस गईं. वहीं, 12 अप्रैल को महाराष्ट्र के नासिक में 20 इलेक्ट्रिक स्कूटरों के एक कंटेनर में आग लग गई थी. इसके पहले मार्च में तमिलनाडु के वेल्लोर में रात में बैटरी चार्ज करने के लिए लगाने पर ई-बाइक में आग लगने से 49 वर्षीय दुरई वर्मा और उनकी बेटी की दम घुटने से मौत हो गई थी.

एक महीने से भी कम समय में भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में आग लगने की आधा दर्जन घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इससे चिंतित केंद्र सरकार ने इन घटनाओं की जांच शुरू की है और ई-बाइक के निर्माताओं को चेतावनी दी है कि अगर उनकी गलती मिलती है तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, ''अगर किसी कंपनी की प्रक्रियाओं में लापरवाही पाई जाती है, तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा और सभी खराब वाहनों को वापस मंगवाने का आदेश भी दिया जाएगा.'' इन घटनाओं के आलोक में केंद्र सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए गुणवत्ता-केंद्रित दिशानिर्देश जारी करने की योजना भी बना रही है.

मार्च में पुणे में एक जलते हुए ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर का वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. उसके एक महीने बाद, 24 अप्रैल को ओला ने कहा कि वह ''उस बैच के स्कूटरों की विस्तृत नैदानिक जांच'' करने के बाद कुल 1,411 ई-स्कूटर इकाइयों को वापस मंगा रही है. कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल ने ट्विटर पर कहा कि इन मामलों की जांच के लिए विश्वस्तरीय एजेंसियों को लगाया गया है. एक अन्य घटनाक्रम में ओकिनावा ऑटोटेक, जिसके प्रेज ब्रान्ड के एक स्कूटर में त्रिची में आग लगी थी, ने स्वेच्छा से अपने 3,215 प्रेज प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटरों को वापस मंगाया है. एक अन्य स्कूटर निर्माता, प्योर ईवी ने घोषणा की है कि निजामाबाद (तेलंगाना) और चेन्नै (तमिलनाडु) में दो अलग-अलग मामलों में आग लगने की घटनाओं के बाद वह अपने 2,000 वाहनों को वापस मंगवा रही है. निजामाबाद वाली घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. इस बीच, केंद्र ने सेंटर फॉर फायर एक्सप्लोसिव ऐंड एनवायरनमेंट सेफ्टी (सीएफईईएस) से इन घटनाओं की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपचारात्मक कदम सुझाने को कहा है.

इन घटनाओं का भारत के उभरते इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग के लिए क्या अर्थ है? उद्योग की रिपोर्ट के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2021 में ई-स्कूटर की बिक्री एक साल पहले की तुलना में 132 फीसद बढ़कर 2,33,971 इकाई हो गई. लेकिन हालिया घटनाएं तेजी से बढ़ते इस क्षेत्र का खेल बिगाड़ सकती हैं. नाम न छापने की शर्त पर दिल्ली के एक कंसल्टेंट ने कहा, ''ऐसी घटनाएं इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति खरीदार की सुरक्षा धारणा को प्रभावित करेंगी.'' इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर इलेक्ट्रिक कारों के बाजार पर भी पड़ सकता है. वे कहते हैं, ''जहां तक किसी दोपहिया वाहन का संबंध है, तो दुर्घटना की स्थिति में उपयोगकर्ता शायद भाग सकता है, पर कार के मामले में तो लोग केबिन में फंस जाते हैं, इसलिए जोखिम अधिक होता है.''

भारत में इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने का कोई मामला सामने नहीं आया है, पर चिंता का स्पष्ट क्षेत्र इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लीथियम सेल, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयोग होने वाले लीथियम-एनएमसी (निकल-मैगनीज-कोबाल्ट) सेल, में ताप स्थिरता की समस्या होती है. अगर सेल पर्याप्त रूप से ठंडा नहीं हो पाता है, तो वह 'थर्मल रनअवे' का शिकार हो सकता है.

तकनीकी-खरीद संबंधी सलाह देने वाले पोर्टल टेकराडार में एक लेख के अनुसार, लीथियम बैटरी के कई फायदे हैं जो उन्हें ई-बाइक के लिए आदर्श बनाते हैं. इन्हें सैकड़ों बार चार्ज और डिस्चार्ज किया जा सकता है, ये अपेक्षाकृत हल्के, कॉम्पैक्ट और कम विषाक्त होते हैं, पर इनमें आग लगने की संभावना भी होती है क्योंकि बैटरी में दो इलेक्ट्रोडों के बीच भरा इलेक्ट्रोलाइट द्रव्य अत्यधिक दहनशील होता है. जब बैटरी सेल ज्यादा गर्म हो जाते हैं, तो गर्मी और दबाव उस बिंदु तक बढ़ जाता है जहां बैटरी फट जाती है.

कुछ विशेषज्ञों ने चीन में बनी बैटरियों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं. इनका आरोप है, ''चीन से कम लागत वाली बैटरियां आ रही हैं. चीन जो सामान अमेरिका जैसे विकसित देशों को बेचता है और भारत जैसे उभरते बाजारों को जिन चीजों का निर्यात करता है, उनमें साफ अंतर है.'' लीथियम-आयन, या ली-आयन, बैटरी की अत्यधिक ज्वलनशील प्रकृति के अलावा, एक और नुकसान यह है कि वे काफी महंगी हैं और एक इलेक्ट्रिक वाहन की लागत का 20-40 फीसद इन्हीं पर खर्च होता है.

ऐसे में क्या ली-आयन बैटरी के विकल्प हैं. एक आशाजनक विकल्प सोडियम-आयन बैटरी है. ये ली-आयन बैटरियों की तुलना में काफी सस्ती हैं. न्यू साइंटिस्ट पत्रिका में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, लीथियम आयन बैटरियों के विकल्प की तलाश में मैग्नीशियम, समुद्री जल, ग्लास बैटरी (जिसमें इलेक्ट्रोलाइट कांच पर लगे सोडियम आयनों से बना होता है), ईंधन सेल और तरल बैटरी (जिसमें सारे अवयव द्रव्य में घुले होते हैं) पर शोध चल रहा है.

इन नवाचारों के व्यावसायीकरण में वक्त लगेगा और तब तक ली-आयन बैटरी सबसे अच्छा विकल्प बनी रहेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि यह जरूरी है कि कंपनियां आग की घटनाओं के कारणों की गहन जांच करें और आग लगने की संभावना वाले वाहनों को मंगवाने के विकल्प का सहारा लें. ई-स्कूटर बनाने वालों को बैटरियों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण की प्रमाणन प्रक्रिया अपनाने की भी जरूरत है. यह प्रक्रिया थोड़ी महंगी हो सकती है, पर ऑटो निर्माताओं के पास अब कम ही विकल्प हैं.

20 अप्रैल को नीति आयोग ई-वाहनों के लिए बैटरी-स्वैपिंग का मसौदा नीति लेकर आया. इसके तहत, उपभोक्ता बिना बैटरी के साथ ई-वाहन खरीद सकता है, जिससे वाहन की कीमत कम हो जाती है. सेवा प्रदाताओं की ओर से एक शुल्क पर बैटरियां प्रदान की जाएंगी और उन प्रदाताओं को बैटरी की बेहतर सुरक्षा के लिए सख्त परीक्षण प्रटोकॉल का पालन करना होगा. अगर इलेक्ट्रिक बाइकों में ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना है तो सरकार और उद्योग को एक साथ काम करना होगा.

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