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फंसे गहलोत के सूरमा

राजस्थान के मुख्य सचिव पर बीजेपी ने लगाया कि वे आचार संहिता लागू होने के बाद भी कांग्रेसी सरकार की मदद के लिए काम कर रहे हैं. इसके बाद वे दो माह की छुट्टी पर गए.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीति गरमाती जा रही है. बीजेपी ने राजस्थान के मुख्य सचिव सी. के. मैथ्यू पर आरोप लगाया है कि वे आचार संहिता लागू होने के बाद भी सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की मदद के लिए काम कर रहे हैं. इसके बाद वे दो महीने की छुट्टी पर चले गए हैं. मैथ्यू मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अफसर हैं और 1998 और 2003 के बीच अशोक गहलोत के पहले कार्यकाल के दौरान वे प्रमुख सचिव रहे. पिछले साल उन्हें मुख्य सचिव बनाया गया था.  

सरकार का कहना है कि अभी उनकी छुट्टी और उनकी जगह पर किसी और को लाने की बात पर कोई फैसला नहीं लिया है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक मैथ्यू ने बुधवार को छुट्टी पर जाने से पहले गहलोत की सहमति ले ली है. उनका कार्यालय छोडऩा गहलोत के लिए गहरा धक्का है. गहलोत ने प्रशासन और लोक-लुभावन योजनाओं पर अमल का जिम्मा उन्हें सौंप रखा था. बीजेपी के उपाध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक जैन से मैथ्यू सहित चार अधिकारियों के खिलाफ शिकायत कर हटाने की मांग की थी.

अन्य में आइजी एच.सी. मीणा (उनके भाई नमो नारायण मीणा केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री हैं), एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) अशोक संपत राम और एडीजी (कानून और व्यवस्था) नवदीप सिंह शामिल हैं. उनकी पत्नी परम नवदीप कांग्रेस विधायक हैं. मैथ्यू के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की 4 अक्तूबर की शाम राज्य में चुनाव की घोषणा के बाद राजस्थान में खाद्य सुरक्षा बिल को लागू करने का आदेश जारी किया था.

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