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अब बिजली वाली स्कूटी से नापिए शहर

नए-नए डिजाइन में, खूबसूरत और महंगी भी. नए जमाने के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक दुपहिया वाहनों की आमद ने इस सेग्मेंट के बाजार में मचाई हलचल.

खुश और उत्साहित ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भवीश अग्रवाल 15 अगस्त को अपने ई-स्कूटर के लॉन्च के अवसर पर खुश और उत्साहित ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भवीश अग्रवाल 15 अगस्त को अपने ई-स्कूटर के लॉन्च के अवसर पर

पिछले तीनेक वर्षों से कुछ नए उत्पाद आने और कुछ बड़े दुपहिया निर्माताओं के अपनी भावी योजनाओं की घोषणा के बावजूद भारतीय दुपहिया इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र में एक तरह की शांति ही थी. चंद ईवी उत्पाद जिन्होंने खबरें बनाईं उनमें एक था एथर 450 जिसे काफी विलंब के साथ सितंबर 2018 में बेंगलूरू में लॉन्च किया गया.

इसके अलावा बजाज ऑटो ने अपने चेतक स्कूटर को ईवी संस्करण के साथ पुनर्जीवित किया और टीवीएस मोटर ने अपना आइक्यूब इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च किया था. पर इस साल अगस्त में भारतीय टैक्सी सेवा प्रदाता कंपनी ओला ने बड़े धूमधाम के साथ अपना इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च किया और दुपहिया क्षेत्र में छाई सुस्ती खत्म हो गई.

1 लाख रुपए कीमत वाले स्कूटर के लॉन्च के साथ ओला अत्यधिक मूल्य संवेदनशील भारतीय बाजार में आंतरिक दहन इंजन (आइसीई) वाले दुपहिया वाहनों के मौजूदा निर्माताओं के कड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरा है.

ओला के एस1 और एस2 प्रो के लॉन्च के साथ, जिसके लिए प्री-लॉन्च बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी थी, अब भारत में चार स्वदेसी ई-स्कूटर निर्माता हो गए हैं. दुपहिया पोर्टल bikedekho.com पर दी गई जानकारी के अनुसार ओला के प्रतिद्वंद्वी एथर एनर्जी के स्कूटर 1.13 लाख रुपए से शुरू होते हैं.

एथर 4503 की प्रीमियम रेंज की कीमत 1.32 लाख रुपए है. जनवरी 2020 में बजाज ऑटो ने अपने चेतक स्कूटर के इलेक्ट्रिक अवतार को 1 लाख रुपए की एक्स-शोरूम कीमत रेंज में उतारा. यह अर्बेन और प्रीमियम श्रेणियों में उपलब्ध है. टीवीएस मोटर ने जुलाई में अपना आइक्यूब ई-स्कूटर लॉन्च किया था और इसकी ऑन-रोड कीमत लगभग 1.23 लाख रु. बताई जाती है.

इस क्षेत्र में टॉर्क मोटर्स (2009 के बाद से), अल्ट्रावॉयलेट, ओरक्सा एनर्जी और एमफ्लक्स मोटर्स जैसे स्टार्ट-अप भी उतरे हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक कोई भी वाहन व्यावसायिक स्तर पर लॉन्च नहीं किया है.

इस कैलेंडर वर्ष के पहले छह महीनों में भारत में केवल 52,000 ई-स्कूटर की बिक्री हो पाई थी जो कुल दुपहिया वाहन सेग्मेंट का सिर्फ 0.7 प्रतिशत है. सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक वेहिकल्स के अनुसार, 2020-21 के लिए ई-स्कूटर की बिक्री 6 प्रतिशत गिरकर 1,43,837 यूनिट हो गई जो पिछले वर्ष 1,52,000 यूनिट्स थी.

विशेषज्ञ ई-स्कूटर सेग्मेंट के प्रति कम झुकाव के लिए आइसीई समकक्षों की तुलना में ई-स्कूटर की ऊंची कीमतें, उनकी मजबूती और लंबे समय के लिए टिकाऊ होने की क्षमता पर संदेह, चार्जिंग के बुनियादी ढांचे का अभाव और एक मजबूत वित्तपोषण तंत्र की कमी को जिम्मेदार ठहराते हैं.

हालांकि कई राज्यों ने अपनी ईवी नीति शुरू की है पर कुछ ने इसे अभी तक लागू नहीं किया है. यह भी एक कारण है. भारी उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 19 जुलाई तक देश में दुपहिया और कारों सहित 1,04,806 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण किया गया था. ई-वाहन पोर्टल के अनुसार पिछले तीन वर्षों में देश में कुल 5,17,322 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत किए गए हैं.

बढ़ रही उत्सुकता
कम बिक्री संख्या के बावजूद ईवी को लेकर उत्सुकता, केंद्र और राज्य सरकारों की ईवी नीतियों और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण ये चर्चा में बने हुए हैं. एथर और अब ओला के आने से पहले स्टार्ट-अप ई-स्कूटर उद्यमी चीन से ईवी किट का आयात करके उन्हें यहां असेंबल करते थे.

विशेषज्ञों का कहना है कि उनके पास बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों को लॉन्च करने के लिए साधन और कौशल की कमी थी. दूसरी ओर, दुपहिया क्षेत्र के मौजूदा खिलाड़ी पारंपरिक वाहनों के लिए अपनी रणनीतियों से संतुष्ट थे क्योंकि इससे उन्हंर अपनी बिक्री की संख्या अच्छी खासी रखने में मदद मिलती रही.

भारत में आइसीई वाहनों का बाजार बहुत बड़ा है. हालांकि महामारी के कारण, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 में कुल दुपहिया वाहनों की बिक्री में 3 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन वर्ष की दूसरी छमाही में बिक्री में काफी वृद्धि हुई थी. नतीजतन, वित्त वर्ष 2020 में 1.82 करोड़ की तुलना में वित्त वर्ष 2021 में भारत में 1.76 करोड़ दुपहिया वाहन बेचे गए.

विशेषज्ञों का मानना है कि ईवी रणनीति को सफल बनाने के लिए तीन प्रमुख तत्वों की आवश्यकता है. ऑटो इंटेलिजेंस फर्म डायनामिक्स इंडिया के अध्यक्ष और निदेशक रवि भाटिया कहते हैं, ''सबसे पहले, ग्राहक ज्यादा अग्रिम भुगतान के लिए तैयार हों. दूसरा, सेक्टर की स्टार्ट-अप कंपनियों को शुरुआत में बड़े नुक्सान के लिए तैयार रहने की जरूरत है. तीसरा, सरकार को ईवी निर्माताओं और खरीदारों दोनों की मदद करने के लिए कुछ सब्सिडी प्रदान करनी होगी. ’’ 

यह कुछ हद तक भारत में हो रहा है. शुरुआती कठिन दौर में जब निवेश रिटर्न से अधिक है, निजी इक्विटी कंपनियों के बड़े फंड एथर और ओला जैसे खिलाड़ियों के साथ मजबूती से खड़े हैं. ओला की हालिया एंट्री ने इस सेग्मेंट में एक नया उत्साह पैदा कर दिया है. अधिकांश शहरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर को पार कर गई हैं, और केंद्र और राज्य दोनों सरकारें ईंधन पर वसूले जाने वाले करों में रियायत के प्रति अनिच्छुक दिखती हैं क्योंकि वे सरकार के राजस्व का एक बड़ा स्रोत हैं.

ईंधन की ऊंची कीमतें खरीदारों को ईवी जैसे विकल्पों की ओर आकर्षित कर रही हैं. कुछ सरकारी नीतियों ने भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहित किया है. छह साल पहले केंद्र ने भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से प्रचलन और निर्माण के लिए एक योजना (फेम) तैयार की थी. 1 अप्रैल, 2019 से शुरू हुई योजना के दूसरे चरण को 10,000 करोड़ रुपए के बजटीय समर्थन के साथ पांच साल के लिए लागू किया जा रहा है.

इस साल जून में भारी उद्योग विभाग ने फेम-II योजना में कुछ संशोधन किए. ई-स्कूटर की खरीद के लिए प्रोत्साहन राशि को 50 प्रतिशत बढ़ाकर प्रति किलोवाट घंटा बैटरी क्षमता पर 15,000 रुपए कर दिया गया. इस प्रोत्साहन की सीमा भी एक्स-शोरूम कीमत के 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है. 

केंद्र ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अन्य पहलें भी की है. मई 2021 में इसने बैटरी की कीमतों को कम करने के लिए भारत में उन्नत केमिस्ट्री सेल के उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी. केंद्र ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी (माल और सेवा कर) को भी 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है.

इससे पहले, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने घोषणा की थी कि बैटरी से चलने वाले वाहनों को ग्रीन लाइसेंस प्लेट दिए जाएंगे और परमिट आवश्यकताओं से छूट दी जाएगी. राज्यों को इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स माफ करने की सलाह देने वाली अधिसूचना भी जारी की गई. 

रोमांच बरकरार 
ईवी क्षेत्र की संभावनाओं ने निर्माताओं को उत्साहित किया है. ओला के संस्थापक और सीईओ भवीश अग्रवाल ने हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार में कहा, ‘‘ईवी क्रांति वास्तव में एक क्रांति है, यह केवल इंजन को बाहर निकालने और मोटर लगा देने भर तक सीमित नहीं है.’’

वे चाहते हैं कि ऑटो उद्योग पेट्रोल और डीजल वाहनों को अलविदा कह दें और 2025 तक पूरी तरह दुपहिया ईवी बनाना शुरू कर दें. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कहना आसान है, करना मुश्किल. ईवी को लेकर शुरुआती उत्साह तब तक कायम नहीं रह सकता जब तक उत्पाद की कीमतें कम नहीं होतीं.

यह तभी होगा जब भारत ईवी पुर्जों के आयात पर अपनी निर्भरता को कम कर दे और उन्हें देश में बनाया जाए, विशेष रूप से वाहन का पावरट्रेन जिसमें इंजन, ट्रांसमिशन, एक्सल आदि जैसे अहम घटक शामिल हैं. भारत बैटरी और अन्य घटकों के लिए चीन पर बहुत अधिक निर्भर है.

हालांकि स्टार्ट-अप उद्यमी अपनी संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन देखना होगा कि यह उत्साह तब कितना रहता है जब दुपहिया क्षेत्र के पुराने खिलाड़ी इसमें जोर-शोर से कूदेंगे क्योंकि वे अपनी उपलब्ध पूंजी, बुनियादी ढांचे और वितरण नेटवर्क के बूते ईवी बाजार को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बना देंगे. भाटिया कहते हैं, ‘‘बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियां अभी खेल देख रही हैं.

अगर ईवी व्यवसाय एक सफलता बन जाता है तो वे इसमें जोर-शोर से उतरेंगी.’’ अपने चेतक ईवी के अलावा, बजाज ऑटो ने 2021-2022 में इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर और क्वाड्रिसाइकिल (चार पहिए वाली छोटी गाड़ियां) लॉन्च करने की घोषणा की है.

इसका प्रीमियम बाइक ब्रांड केटीएम भी कथित तौर पर ई-मोटरबाइक की एक रेंज पर काम कर रहा है, जिसे भारत में पेश किया जा सकता है. प्रतिद्वंद्वी हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस मोटर कंपनी पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए समर्पित सुविधाओं और निवेश योजनाओं की घोषणा कर चुकी है.

ई-स्कूटर के मोर्चे पर जंग अभी शुरू ही हुई है. ईवी को मिले शुरुआती आकर्षण से परे देखते हुए, कंपनियों को पारंपरिक आइसीई वाहन उपयोगकर्ताओं को ईवी के सामर्थ्य, टिकाऊपन और डिजाइन को लेकर आश्वस्त करना होगा. हो सकता है वे अभी तक आइसीई वाहनों के लिए एक चुनौती पेश न कर पाए हों पर कौन जाने कल को यही ट्रेंड बन जाए. ठ्ठ

इस साल 19 जुलाई तक देश भर में 1,04,806 इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण हुए हैं. इनमें दुपहिया वाहन और कारें भी शामिल हैं


ईवी ब्रांड चेतक
निर्माता
बजाज ऑटो
कीमत (एक्स शोरूम):
करीब 2 लाख रु.

ईवी ब्रांड
एथर 4503
निर्माता
एथर एनर्जी
कीमत (प्रीमियम रेंज):
1.32 लाख रु.

ईवी ब्रांड
एस1, एस1 प्रो
निर्माता
ओला इलेक्ट्रिक
कीमत (एक्स-शोरूम)
करीब 1 लाख रु. (एस1),
करीब 1.3 लाख रु.
(एस1 प्रो)

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