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बिछी 2024 की बिसात

भाजपा इन राज्यों के लिए जो रणनीति अपनाने या नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है, उसमें ज्यादा कुछ नया नहीं है. नया बस यह है इन पर एक दांव लोकसभा चुनाव का भी लगा है

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आगे की तैयारी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा
आगे की तैयारी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा

साल 2023 हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हमें नौ प्रदेशों में चुनाव लड़ना है. चुनाव के लिए कमर कस लें, हमें सभी में जीत दर्ज करनी है. जहां पार्टी की सरकार है उसे मजबूत किया जाए, जहां सरकार नहीं है उसे और मजबूत किया जाए.''

नई दिल्ली में आयोजित भाजपा की दो दिनों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में ये बातें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहीं. उनकी बातों और कार्यकारिणी में जो गतिविधियां हुईं उनसे साफ पता चल रहा है कि भाजपा इन विधानसभा चुनावों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और इन्हें अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देख रही है.

इस साल त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें से तीन राज्यों त्रिपुरा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, जबकि मेघालय, मिजोरम और नगालैंड की गठबंधन सरकार में पार्टी शामिल है. वहीं छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की पार्टी भारतीय राष्ट्र समिति सत्ता में है.

भाजपा इन चुनावों को कितना महत्वपूर्ण मान रही है, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनावी राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को पूरी तैयारी करके आने का निर्देश था. यहां उन्हें प्रजेंटेशन देने को भी कहा गया. कार्यकारिणी में उपस्थित पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी बताते हैं, ''सभी चुनावी राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों ने अपने प्रेजेंटेशन में चुनावी रणनीति, तैयारियों और चुनौतियों की जानकारी साझा की थी.''

चुनावी राज्यों की चुनौतियों के बारे में भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद कहते हैं, ''खुद पार्टी अध्यक्ष ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि सभी नौ राज्यों में जीत हासिल करना एक चुनौती है. उन्होंने तेलंगाना का खास तौर पर नाम लिया था.''

इन राज्यों में 83 लोकसभा सीटें हैं. इसलिए भाजपा नेतृत्व की सोच यह है कि पार्टी अगर अपनी उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन करती है तो यहां की सभी लोकसभा सीटों पर उसका स्ट्राइक रेट बेहतर रह सकता है.

चुनावी राज्यों में पार्टी की प्रदेश इकाई को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से रणनीति बनाने को कहा गया है. लेकिन इसके साथ ही पार्टी की एक साझा रणनीति भी है जो सभी राज्यों में लागू होगी. इसके तहत चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ही पार्टी का चेहरा होंगे. साथ ही कार्यकर्ताओं को मोदी सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार जमीनी स्तर तक ले जाते हुए इनके लाभार्थियों से संवाद करना है.  

राज्य इकाइयों को यह निर्देश भी दिया गया है कि विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के खिलाफ अभियान के जवाब में जनता के बीच मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए यह साबित किया जाए कि विपक्ष नकारात्मक प्रचार कर रहा है.

राज्य इकाइयों को यह प्रचार करने के लिए भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया में भारत की एक अलग पहचान बन रही है. इस नैरेटिव को पुख्ता बनाने के लिए इसे जी-20 में भारत की अध्यक्षता से भी जोड़ा जाएगा. इस संदर्भ में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खास तौर पर पार्टी कार्यकारिणी को संबोधित किया.

चुनावी राज्यों के पदाधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे राम मंदिर का मुद्दा उठाते हुए लोगों तक यह बात पहुंचाएं कि भाजपा ने जो कहा, वह कर दिखाया. राज्य इकाइयां काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर और चार धाम कॉरिडोर के हवाले से यह दिखाने की भी कोशिशि करेंगी कि भाजपा हिंदू सांस्कृतिक विरासतों के प्रति कितनी प्रतिबद्ध है.

भाजपा शासित राज्यों के पदाधिकारियों को गुजरात चुनाव से सबक लेने के लिए भी कहा है. केंद्रीय नेतृत्व ने इन नेताओं से कहा है कि वे गुजरात की तर्ज पर 'ऐंटी—इन्कंबेंसी' को 'प्रो—इन्कंबेंसी' में बदलने के लिए जुटें. 

भाजपा इन राज्यों के लिए जो रणनीति अपनाने या नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही है, उसमें ज्यादा कुछ नया नहीं है. नया बस यह है इन पर एक दांव लोकसभा चुनाव का भी लगा है. यानी इन रणनीतियों का नतीजा अगले आम चुनाव की दशा-दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है 

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