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उत्तर प्रदेशः बुंदेली जमीन पर बिछने लगी बिसात

बुंदेलखंड के महत्व को समझते हुए योगी आदित्यनाथ ने फरवरी 2019 में बुंदेलखंड विकास बोर्ड का गठन किया था

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मिशन के लिए तैयार महोबा में 19 नवंबर को जल परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मिशन के लिए तैयार महोबा में 19 नवंबर को जल परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बुंदेलखंड में वीर आल्हा-ऊदल की धरती महोबा से खास नाता रहा है. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने 24 अक्तूबर, 2016 को महोबा में 'परिवर्तन रैली' कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मिशन-बुंदेलखंड का आगाज किया था. यह पहला मौका था जब कोई प्रधानमंत्री बुंदेलखंड के पिछड़े जिले महोबा पहुंचा था. मोदी के जरिए भाजपा की रणनीति काम कर गई और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड की सभी 19 विधानसभा सीटों पर पहली बार भगवा झंडा फहराया.

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कुछ ऐेसे ही नतीजों की उम्मीद के साथ मोदी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक बार फिर 19 नवंबर को महोबा के पुलिस लाइन ग्राउंड से मिशन-बुंदेलखंड का आगाज कर रहे थे. इस अवसर पर मोदी ने 3,240 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुईं चार जल परियोजनाओं—अर्जुन सहायक परियोजना, भावनी बांध परियोजना, रतौली बांध परियोजना और मसगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर परियोजना—का लोकार्पण किया. इनसे बुंदेलखंड के महोबा, हमीरपुर, बांदा, और ललितपुर के 4.30 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध हो सकेगा. सूखाग्रस्त क्षेत्र की पहचान रखने वाले बुंदेलखंड में पानी की योजनाओं के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व की विपक्षी दलों की सरकारों पर निशाना साधा. मोदी ने कहा, ''यूपी की पिछली सरकारों ने ताल-तलैया के नाम पर केवल फीता काटने का काम किया. बांधों और नालों की खुदाई में कमीशनखोरी का खेल खेला. दूसरी तरफ बुंदेलखंड के लोग बूंद-बूंद पानी को तरसते रहे.''

महोबा से प्रधानमंत्री मोदी सीधे वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की धरती झांसी पहुंचे. यहां पर मोदी ने डिफेंस कॉरिडोर के झांसी नोड में मिसाइल कंपनी 'भारत डायनमिक्स लिमिटेड' के 400 करोड़ रुपए के प्लांट का शिलान्यास करने के साथ ही नेशनल वॉर मेमोरियल के डिजिटल कियोस्क को लॉन्च किया. झांसी के किले के नजदीक मैदान में आयोजित 'राष्ट्ररक्षा समर्पण कार्यक्रम' के जरिए प्रधानमंत्री ने न केवल राष्ट्रवाद का संदेश दिया बल्कि अपने भाषण में सरदार पटेल के सपनों का भारत बनाने का संकल्प लेने और स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, अवंतीबाई और ऊदादेवी के योगदान का जिक्र करके राजनीतिक समीकरण भी साधने का प्रयास किया.

उत्तर प्रदेशः बुंदेली जमीन पर बिछने लगी बिसात
उत्तर प्रदेशः बुंदेली जमीन पर बिछने लगी बिसात

प्रधानमंत्री मोदी की हुंकार से 48 घंटे पहले 17 नवंबर को कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी बुंदेलखंड में धर्मनगरी के नाम से प्रसिद्ध चित्रकूट जिले में मौजूद थीं. यहां मंदाकिनी नदी के किनारे रामघाट पर मौजूद मत्तगजेंद्रनाथ शिव मंदिर में पूजा करने के बाद प्रियंका नाव से ही भरतघाट पर 'मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं: शक्ति संवाद कार्यक्रम' में शिरकत करने पहुंचीं. मंदाकिनी नदी पर ही कार्यक्रम का मंच बनाया गया था. इस दौरान प्रियंका ने यूपी की 7 करोड़ महिलाओं तक कांग्रेस की पहुंच बनाने के लिए 'आधी आबादी अभियान' लॉन्च किया. इस तरह प्रियंका ने महिलाओं में पैठ बनाकर बुंदेलखंड में कांग्रेस के सूखे को दूर करने की कोशि‍श शुरू की.

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने में डेढ़ महीने से कम का समय रह गया है. ऐसे में सात जिलों, चार लोकसभा सीट और 19 विधानसभा सीटों वाले बुंदेलखंड में राजनीतिक दलों की अचानक बढ़ी सक्रियता इस क्षेत्र के राजनीतिक महत्व की ओर भी इशारा कर रही है. बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य बाबूलाल तिवारी बताते हैं ''बुंदेलखंड यूपी के दूसरे इलाकों की तुलना में काफी पिछड़ा है. यह सूखाग्रस्त क्षेत्र है. यहां के ज्यादातर किसान बहुत छोटी जोत वाले हैं. साथ ही यहां पर दलितों और पिछड़ों की आबादी का प्रतिशत भी दूसरे क्षेत्रों से ज्यादा है. यही वजह है कि राजनीतिक दल बुंदेलखंड में अपनी सक्रियता दिखाकर प्रदेश के दूसरे इलाकों के किसानों, दलितों और पिछड़ी जातियों को सकारात्मक संदेश देते आए हैं. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी यही प्रयास शुरू हो गए हैं.''

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड की सभी 19 विधानसभा सीटों पर विजय हासिल करने के साथ प्रदेश में सरकार बनाने वाली भाजपा ने इस इलाके पर खास ध्यान देना शुरू किया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 फरवरी, 2019 को 'बुंदेलखंड विकास बोर्ड' का गठन करके विकास योजनाओं में तेजी लाने की योजना तैयार की थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रहे कुंवर मानवेंद्र सिंह को दस सदस्यीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाने के साथ बुंदेलखंड की समस्याओं का समाधान सुझाने के लिए 14 अलग-अलग समितियों का भी गठन किया गया है.

बुंदेलखंड विकास बोर्ड के सदस्य पवनपुत्र बादल बताते हैं, ''बुंदेलखंड इलाके को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली पेयजल और सिंचाई परियोजनाएं आकार ले रही हैं.'' इसके अलावा योगी सरकार ने बुंदेलखंड के लिए 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास योजनाएं भी शुरू की हैं. इनमें बुंदेलखंड को सीधे आगरा-लखनऊ एक्प्रसेसवे से जोड़ने वाला 296 किलोमीटर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे सबसे महत्वपूर्ण है. प्रधानमंत्री मोदी ने 29 फरवरी, 2020 को चित्रकूट से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था. 15 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस एक्सप्रेसवे का निर्माण 80 फीसद पूरा हो चुका है. बादल बताते हैं ''झांसी को डिफेंस कॉरिडोर का नोड बनाने के साथ बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन का हब बनाने के प्रयास से इस इलाके की छवि बदली है. पिछड़ा बुंदेलखंड अब विकसित होने की राह पर है.''

उत्तर प्रदेशः बुंदेली जमीन पर बिछने लगी बिसात
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बुंदेलखंड में राजनीतिक और सामाजिक समीकरण मजबूत करने के लिए भाजपा ने जालौन जिले से राजनीति की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ नेता स्वतंत्रदेव सिंह को जुलाई, 2019 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. बाबूलाल तिवारी बताते हैं, ''कुर्मी जाति से आने वाले सिंह की बुंदेलखंड की दूसरी जातियों में अच्छी पकड़ है.'' बुंदेलखंड में दलितों के बीच पैठ बनाने के लिए 7 जुलाई को हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जालौन-गरौठा संसदीय सीट से पांचवीं बार सांसद बने भानु प्रताप वर्मा को मंत्री बनाया गया है. इससे पहले ललितपुर से आने वाले दलित जाति के मुन्नूलाल कोरी को योगी मंत्रि‍मंडल में जगह दी गई थी. दलितों के साथ महिलाओं का समर्थन जुटाने के लिए भाजपा ने बाराबंकी (सुरक्षित) सीट से पूर्व सांसद और प्रदेश महामंत्री प्रियंका सिंह रावत को कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र का प्रभारी बनाया है. दलित जाति से ताल्लुक रखने वाली कोई महिला पहली बार कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की प्रभारी बनी है. बुंदेलखंड की महिलाओं के समर्थन को ध्यान में रखते हुए ही मोदी ने 10 अगस्त को महोबा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उज्ज्वला योजना के दूसरे चरण का शुभारंभ किया था.

यूपी के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए बुंदेलखंड इलाका हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है. सपा ने वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा छह सीटें जीती थीं. वर्ष 2022 में बुंदेलखंड में साइकिल के लिए समर्थन बटोरने के वास्ते सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 13 अक्तूबर को हमीरपुर में 'विजय यात्रा' निकाली थी. इससे पहले अखि‍लेश ने जनवरी में बांदा और चित्रकूट जिले में चार दिन का प्रवास किया था. इस दौरान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अरिमर्दन सिंह सपा में शामिल हुए. इसके बाद सपा लगातार बुंदेलखंड में दूसरी पार्टियों के नेताओं को शामिल कर अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है. हमीरपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी, जालौन से विधायक रहे विनोद चतुर्वेदी और महोबा के दिग्गज कांग्रेसी नेता मनोज तिवारी 2 अक्तूबर को सपा में शामिल हो गए.

सपा की नजर बुंदेलखंड की गैर-यादव पिछड़ी जातियों पर है. अखि‍लेश ने बुंदेलखंड की गैर-यादव पिछड़ी जा‍तियों के बीच सपा की पैठ बनाने का जिम्मा सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप को सौंपा है. कश्यप ने 22 अक्तूबर को झांसी से 'न्याय यात्रा' की थी. अक्तूबर के अंत तक उन्होंने महोबा, हमीरपुर और ललितपुर में 'न्याय यात्रा' के जरिए पिछड़ी जातियों को सपा के पक्ष में लामबंद करने की कोशि‍श की थी. कश्यप बताते हैं, ''बुंदेलखंड में पानी, जमीन और जंगल से जुड़ी समस्याएं हैं जिससे किसानों के साथ दलित और पिछड़ी जातियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. इनके बीच सपा शासनकाल में चलाई गई लाभकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ योगी सरकार की गलत नीतियों से भी इन्हें अवगत कराया जा रहा है. दूसरे चरण में सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ बुंदेलखंड में बूथ स्तर पर बैठकों का आयोजन कर रहा है.''

बुंदेलखंड का इलाका हमेशा से बसपा का गढ़ रहा है. वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव तक बसपा ने यहां सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं. बाबूलाल तिवारी बताते हैं, ''बुंदेलखंड की दलित और अति पिछड़ी जातियों में पकड़ होने के कारण बसपा यहां काफी मजबूत थी. बुंदेलखंड में बसपा के चेहरे रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबूसिंह कुशवाहा, दद्दू प्रसाद जैसे नेता पार्टी छोड़ चुके हैं. इस वजह से बसपा बुंदेलखंड में राजनीतिक रूप से हाशि‍ए पर पहुंच गई है. ''वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने के लिए बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने चार वरिष्ठ नेताओं अशोक गौतम, लालाराम अहिरवार, बृजेश जाटव और रामबाबू चिरगइंया को बुंदेलखंड का प्रभारी बनाया है. इसके अलावा झांसी के रविकांत मौर्य को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर दलित-पिछड़ा मतदाताओं का समर्थन बटोरने की रणनीति अपनाई गई है. ब्राह्मणों को लुभाने के लिए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने 26 अगस्त को बांदा और चित्रकूट जिले से बुंदेलखंड में 'प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन' की शुरुआत की थी.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कई बार बुंदेलखंड में किसानों के बीच पहुंचकर उनके मुद्दों को उठाते रहे हैं. बुंदेलखंड में किसानों के जरिए पैठ बनाने के लिए कांग्रेस ने झांसी के मऊरानीपुर निवासी किसान नेता शिव नारायण सिंह परिहार को पार्टी के किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. परिहार बुंदेलखंड में खाद की समस्या से परेशान किसानों के समर्थन में लगातार भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलनरत हैं. पिछड़ी जातियों के बीच कांग्रेस का समर्थन बटोरने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बुंदेलखंड के सभी जिलों का दौरा कर सभाएं कर रहे हैं. बांदा जिले में 17 नवंबर को सभा करके बघेल ने अपने स्वजातीय कुर्मी समाज के लोगों से वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की.
जाहिर है, बुंदेलखंड भले ही विकास में पिछड़ा हो, लेकिन यूपी की राजनीति में अगड़ा बनने की राह यहीं से होकर गुजरती है.

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