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विधानसभा चुनाव 2022ः ठाकुर? नहीं, माथुर

शोले के ठाकुर के उलट, मथुरा के माथुर सहानुभूति पर भी निर्भर हैं. उन्हें इसकी जरूरत भी होगी.

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एक हाथ से कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप माथुर
एक हाथ से कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप माथुर

उत्तर प्रदेश
इस बार दो शातिर भाड़े के गुंडों को किराए पर लेने का दूर-दूर तक कोई संकेत नहीं है. इसलिए, शोले के ठाकुर का अपना काम खुद ही करना होगा... अरे, रुकिए, ठाकुर नहीं, इसे माथुर पढ़िए. चुनाव अभियान की भागमभाग में मथुरा से कांग्रेस उम्मीदवार और चार बार विधायक रहे 66 साल के प्रदीप माथुर एक हादसे के शिकार हो गए.

उनके बाएं हाथ पर इसका असर पड़ा है—एक्स-रे की रिपोर्ट में मल्टीपल फैक्चर दिख रहा है. लेकिन माथुर पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. इसके बजाए, उन्होंने अपना ऑपरेशन टाल दिया और चुनाव अभियान में लगे रहे और शोले के मशहूर डायलॉग को अपना लिया: 'एक हाथ ही काफी है.

भाजपा को हराने के लिए.’ मथुरा में 10 फरवरी को वोटिंग होनी है, और यह उन सीटों में से एक है जहां कांग्रेस का भाजपा के साथ सीधा मुकाबला है. शोले के ठाकुर के उलट, मथुरा के माथुर सहानुभूति पर भी निर्भर हैं. उन्हें इसकी जरूरत भी होगी. अगले पन्ने पर 'शर्मा के ऊपर धर्मा’ आइटम पढ़ेंगे तो आपको इसकी वजह का पता चल जाएगा.


शर्मा के ऊपर धर्मा
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी 'जरूरी’ के साथ तुकबंदी से परेशान होने वाले अकेले शख्स नहीं हैं. अब भाजपा के मथुरा से उम्मीदवार श्रीकांत शर्मा के लिए एक नकारात्मक नारा पेश किया गया है.

एक स्थानीय व्यापारी ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि श्रीकांत शर्मा ने बतौर विधायक पिछले कार्यकाल में हर किसी को निराश किया है, लेकिन उन्हें योगी आदित्यनाथ की वजह से मजबूरन भाजपा को ही वोट करना पड़ेगा!

वे कहते हैं, ''श्रीकांत मजबूरी हैं, क्योंकि योगी जरूरी हैं.’’ भले ही इससे ज्यादातर लोगों की भावनाएं मेल न खाती हों, लेकिन कांग्रेस के एक हाथ वाले योद्धा प्रदीप माथुर ने इस पर निगाह टिका रखी होगी.
 

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