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तकनीक के शिखर पर

देश की यह टॉप टेक्निकल यूनिवर्सिटी शोध और नवाचार का स्नायु केंद्र है और इंजीनियरिंग एक्सेलेंस के मानक तय करती है.

अत्याधुनिक आइआइटी दिल्ली के नैनोस्केल रिसर्च फैसिलिटी में ई-बीम लिथोग्राफी मशीन अत्याधुनिक आइआइटी दिल्ली के नैनोस्केल रिसर्च फैसिलिटी में ई-बीम लिथोग्राफी मशीन

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली (आइआइटी दिल्ली) में शोध और नवाचार पर भरपूर जोर है. इंडिया टुडे-एमडीआरए बेस्ट यूनिवर्सिटी सर्वेक्षण में इसे सर्वश्रेष्ठ संस्थान चुना गया है. इसकी आविष्कारशीलता का हालिया उदाहरण है, इसके शोधकर्ताओं की ओर से विकसित कोरोना वायरस डायग्नोस्टिक किट कोरोश्योर जो जांच की लागत और समय दोनों कम करती है.

इसे आइसीएमआर का अनुमोदन भी मिल गया है. संस्थान तकनीकी नवाचार के मामले में हमेशा सबसे आगे रहा है. मई में आइआइटी दिल्ली के एक स्टार्ट-अप नैनोसेफ सॉल्यूशंस ने एनसेफ नामक एक ऐंटी-माइक्रोबियल, वॉशेबल फेस मास्क लॉन्च किया. यह अपनी तरह का पहला आविष्कार है. इसमें मास्क को 50 बार तक धोया जा सकता है और इसमें बैक्टीरिया फिल्टर करने की दक्षता लगभग 99.2 प्रतिशत है. ये दो उदाहरण संकेत हैं कि जब बात भारत में टेक्निकल एजुकेशन की आती है तो आइआइटी दिल्ली क्यों सबसे आगे दिखता है.

1961 में स्थापित सात मूल आइआइटी में से एक, आइआइटी दिल्ली को 2018 में 'इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’ का दर्जा दिया गया था और लगभग पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की गई थी. कॉलेज कई स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट प्रोग्राम्स प्रदान करता है, लेकिन यह विशेष रूप से स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए जाना जाता है. उत्कृष्टता की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए, संस्थान ने हाल ही में मटीरियल्स के अध्ययन और बहु-विषयक शोध को बढ़ावा देने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ मटीरियल्स साइंस और इंजीनियरिंग का विभाग भी शुरू किया है.

आइआइटी दिल्ली कई डिग्री प्रदान करता है, जिसमें एमटेक, एमएससी (शोध), एमडीएस और एमबीए शामिल हैं. इनमें दाखिला कठोर प्रतिस्पर्धी प्रणाली के माध्यम से मिलता है. संस्थान में प्रवेश के लिए उच्च मानक हैं—हर साल सिर्फ 1,900 छात्रों को स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए दाखिला मिलता है.

एमटेक प्रोग्राम के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को गेट (ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग), एमएससी के लिए आवेदन करने वालों को जेएएम (मास्टर्स के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा), एमडीईएस प्रोग्राम में आवेदन करने वालों को सीईईडी (डिजाइन के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा) से गुजरना होता है, और एमबीए उम्मीदवारों को कैट (कॉमन एडमिशन टेस्ट) के जरिए चुना जाता है.

स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए अप्लायड मैकेनिक्स, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग और बायोटेक्नॉलोजी, केमिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, सिविल इंजीनियीरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल ऐंड फाइबर इंजीनियरिंग सहित कई विभाग हैं. साइंस, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में यह संस्थान छात्रों को सर्वोत्तम शोध, विकास और प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करता है. एमटेक डिग्री प्रोग्राम में एप्लाइड मैकेनिक्स, एटमोस्फेरिक साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग, केमिस्ट्री, सिविल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग मैकेनिक्स और डिजाइन इंजीनियरिंग जैसे विषय शामिल हैं.

आइआइटी दिल्ली तीन तरह के सेंटर ऑफ एक्सेलेंस (सीओई) का भी केंद्र है, जिनमें से कुछ संस्थान की ओर से और कुछ उद्योग से वित्त पोषित हैं. इसके कुछ प्रोजेक्ट्से, प्रायोजित प्रोजेक्ट्स के रूप में भी चलते हैं. संस्थान की ओर से स्थापित सीओई में जैविक रूप से प्रेरित रोबोट और साइबर सिस्टम तथा इन्फॉर्मेशन एश्योरेंस जैसे क्षेत्रों पर शोध हो रहे हैं, जबकि उद्योग प्रायोजित सीओई तेल प्रौद्योगिकी, अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ बुनियादी ढांचे पर काम कर रहे हैं. प्रायोजित प्रोजेक्ट्स के रूप में वित्त पोषित सीओई में डीआरडीओ-आइआइटी दिल्ली के उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र जैसे कई अन्य शामिल हैं.

—शेली आनंद

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