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राज्यों की दशा-दिशाः सधे कदमों की तेज चाल

इंडिया टुडे स्टेट ऑफ द स्टेट्स कॉन्क्लेव में विजेता राज्यों के नेताओं ने साझा किए अपने दिलचस्प अनुभव. वे बता रहे थे कि महामारी के दौरान किस तरह उन्होंने न केवल नैया पार लगाई बल्कि राज्य को बेहतर भविष्य की ओर ले गए

श्रेष्ठ प्रदर्शन वाला  छोटा राज्य श्रेष्ठ प्रदर्शन वाला छोटा राज्य

सालाना इंडिया टुडे राज्यों की दशा-दिशा रैंकिंग भारत में राज्यों के कामकाज पर सबसे विश्वसनीय और विस्तृत अध्ययन है. इसमें दर्जन भर श्रेणियों—अर्थव्यवस्था, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा, समावेशी विकास, राजकाज, कानून और व्यवस्था, उद्यमिता, पर्यटन, पर्यावरण और सफाई—में राज्य की प्रगति का लेखा-जोखा किया जाता है. इस रैंकिंग से न केवल देश भर में सामाजिक-आर्थिक विकास के ग्राफ की झलक मिलती है, बल्कि यह भारतीय राज्यों की सेहत का निर्णायक पैमाना बनकर भी उभरी है.

इस सर्वे का उद्देश्य हमेशा राज्यों की हर तरह की सेहत के नाप-जोख के लिए नए-नए तरीके खोजना रहा है. इसीलिए इस साल एक नई श्रेणी—प्रसन्नता सूचकांक—जोड़ी गई. प्रसन्नता सूचकांक के अंकों की गणना के लिए राज्य की खुशहाली (प्रति व्यक्ति आय, आबादी की बकाया देनदारियां, सीपीआइ, बेरोजगारी दर) का वस्तुपरक डेटा और उसके साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, राजकाज, बुनियादी ढांचे, कानून और व्यवस्था, पर्यावरण तथा स्वच्छता में उसकी रैंकिंग के अंकों पर विचार किया गया.

इंडिया टुडे स्टेट ऑफ द स्टेट्स ई-कॉन्क्लेव विजेताओं के सम्मान के लिए 28 नवंबर को लाइव स्ट्रीम की गई. इसमें अवार्ड विजेता राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और अफसरशाहों ने अपने सफलता के मंत्र उजागर किए. भौगोलिक, राजनैतिक और नीतिगत भिन्नताओं के बावजूद जो बात इन सभी नेताओं को एक सूत्र में पिरोती थी, वह थी विकास के लाभ अपने-अपने राज्य के हरेक नागरिक तक पहुंचाने की उनकी मजबूत प्रतिबद्धता.

उन्होंने एक राय से यह कड़वा सच स्वीकार किया कि भारत जैसे लोकतंत्र में लोग सरकार से सबसे पहले यह उम्मीद करते हैं कि वह जनता की भलाई के काम करेगी.

कॉन्क्लेव में आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका का एक विशेष भाषण हुआ, जिसमें उन्होंने बताया कि हमारी सामूहिक कुशलता के लिए प्रसन्नता क्यों अहम है.

तमिलनाडु, श्रेष्ठ प्रदर्शन वाला बड़ा राज्य

एम.के. स्टालिन, मुख्यमंत्री

तमिलनाडु के नंबर 1 घोषित होने के बाद इस दर्जे को बनाए रखने के लिए और कड़ी मेहनत करने का मेरा संकल्प मजबूत हो गया है. सही लक्ष्य और साथ में दृढ़ संकल्प तथा कड़ी मेहनत के बूते तमिलनाडु अपनी खोयी प्रतिष्ठा फिर से प्राप्त कर सकता है. जल्द ही हम औद्योगिक सेक्टर, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक तथा सामाजिक मानकों पर अगुआ होंगे. यह अवार्ड तमिलनाडु के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है.''

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