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नई संस्कृति-नए नायकः विजेताओं की कतार

पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्रियों ने विकास का अपना नजरिया पेश किया, तो मंत्रियों ने कामयाबी के अपने-अपने मंत्रों का विस्तार से खुलासा किया

फोटोः चंद्रदीप कुमार फोटोः चंद्रदीप कुमार

राज्यों की दशा-दिशा जाहिर करने वाले इंडिया टुडे ग्रुप के सालाना अवार्ड समारोह के 17वें संस्करण में केंद्रीय सूचना-प्रसारण, वन और पर्यावरण और भारी उद्योग मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यों के बीच सहकारी संघवाद की भावना की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र की पहचान रही है. 23 नवंबर को नई दिल्ली में आइटीसी मौर्य होटल में आयोजित पुरस्कार समारोह में उन्होंने कहा, ''राज्यों की दशा-दिशा अवार्ड से पता चलता है कि आखिर 'सहकारी संघवाद' है क्या. राज्य एक-दूसरे की सहायता करते हैं, तो एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा भी करते हैं.''

देश की वास्तविकता को सामने लाने वाले कई दृष्टिकोणों के मद्देनजर उन्होंने कहा कि मीडिया घराने निष्पक्ष रहेंगे, तो लोगों में उनकी विश्वसनीयता बनी रहेगी. उन्होंने जोर दिया कि घटनाओं को सभी कोणों से कवर करने की कोशिश करनी चाहिए ताकि सचाई के करीब पहुंच जा सके. उन्होंने कहा, ''किसी भी स्टोरी के हर पक्ष को सामने लाया जाना चाहिए. मुझे इंडिया टुडे ग्रुप पर इस मामले में भरोसा है.''

उनसे पहले इंडिया टुडे ग्रुप एडिटोरियल डाइरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा ने स्वागत भाषण में राज्यों के सर्वेक्षण की पद्धति के बारे में विस्तार से बताया. पिछले संस्करणों की तरह, इस वर्ष के सर्वेक्षण में भी राज्यों की कई मापदंडों पर रैंकिंग की गई और 200 से अधिक विषयों पर राज्यों के कामकाज का आकलन किया गया. बड़े राज्यों में तमिलनाडु सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाला राज्य बनकर उभरा और असम सर्वाधिक सुधार वाला राज्य साबित हुआ. छोटे राज्यों में गोवा सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाला राज्य रहा जबकि त्रिपुरा सर्वाधिक सुधार वाला राज्य रहा.

उसके बाद पुरस्कारों के वितरण से पहले, पांच मुख्यमंत्रियों—राजस्थान  के अशोक गहलोत, हिमाचल प्रदेश के जयराम ठाकुर, अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू, पुदुच्चेरी के वी. नारायणसामी और मणिपुर के एन. बीरेन सिंह ने अपने राज्यों में समावेशी विकास के लिए अपने रोडमैप की चर्चा की. श्रेष्ठ गवर्नेंस का पुरस्कार पाने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने प्रशासन की उपलब्धियों को गिनाया लेकिन साथ ही देश और अर्थव्यवस्था की बदहाली और अनिश्चितता पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा, ''देश में वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है. लोग निरंतर अनिश्चितता के डर में जी रहे हैं. यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.''

शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले बड़े राज्य हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वस्तर पर भारत की छवि अच्छी हुई है. उन्होंने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के फैसले का जिक्र करके कहा, ''1947 जब देश स्वतंत्र हुआ, तब से एक राज्य ऐसा था जिसमें दो झंडे थे. अब, कश्मीर से कन्याकुमारी तक, केवल एक झंडा लहराता है—हमारा तिरंगा.''

इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और कानून-व्यवस्था के मामले में सर्वाधिक सुधरे छोटे राज्य का पुरस्कार पाने वाले अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पूर्वोत्तर सड़क निर्माण पर जोर के कारण बुनियादी रूप से बदल गया है. उन्होंने कहा, ''कनेक्टिविटी हमारे राज्य में एक प्रमुख मुद्दा रहा है, अब उसका ध्यान रखा जा रहा है. सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है और तवांग जैसी जगहों को रेल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है.'' उन्होंने कहा कि देश के छोटे राज्यों को धन के लिए केंद्र की ओर ताकने के बजाए, अपने स्वयं के संसाधनों पर भरोसा रखने का प्रयास करना चाहिए.

हालांकि, स्वास्थ्य और उद्यमिता के क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले छोटे राज्य पुदुच्चेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि क्षेत्रीय बजट का समर्थन करने वाले अनुदानों के आवंटन की बात आए तो केंद्र को छोटे राज्यों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा, ''इसमें दो राय नहीं कि देश प्रगति नहीं कर सकता, अगर कुछ राज्य ही विकसित रहें और बाकी अन्य अविकसित रह जाएं. यह एक मुख्य और महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसका हमें निश्चित रूप से समाधान खोजने की आवश्यकता है.''

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, जिनके राज्य ने सर्वाधिक सुधार वाले छोटे राज्यों के बीच समावेशी विकास के लिए पुरस्कार जीता, ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में अलगाववाद और नशीली दवाओं की बिक्री और तस्करी जैसी समस्या को दूर करने में सफल रही है, जो लंबे समय से बड़ी समस्या रही है. उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदीजी ने ढाई साल पहले चुनाव प्रचार के दौरान मेरे सामने एक चुनौती रखी थी. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी भाजपा सरकार को 15 महीनों में वह हासिल करके दिखाना है, जो पिछली कांग्रेस सरकार 15 साल में नहीं कर सकी थी.''

पुरस्कार वितरण के बाद विजेता राज्यों के नौ मंत्री और एक सांसद के बीच पैनल वाद-विवाद में सभी ने अपने-अपने राज्यों के विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा की. जाहिर है, ऐसी चर्चाएं राज्यों को एक-दूसरे की कार्ययोजना को जानने और उसके हिसाब से अपने राज्य में भी विकास की गति आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. शर्त सिर्फ यह है कि इन बातों में गंभीरता हो.

—साथ में गुलाम जीलानी

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