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भाजपाः सवालों के घने दायरे

संघ को यह एहसास है कि कोरोना की दूसरी लहर में सरकार और संगठन (भाजपा) लोगों की नजर में बेबस दिख रहे हैं.

हालात बेकाबू उत्तर प्रदेश के गाजीपुर श्मशान में जलती चिताएं हालात बेकाबू उत्तर प्रदेश के गाजीपुर श्मशान में जलती चिताएं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कोरोना की दूसरी लहर से मचे हाहाकार के बीच 24 अप्रैल को बयान जारी किया, ''समाज विघातक और भारत विरोधी शक्तियां इस गंभीर परिस्थिति का लाभ उठाकर देश में नाकारात्मक एवं अविश्वास का वातावरण खड़ा कर सकती हैं.'' इस बयान के ठीक तीन दिन बाद ही संघ के ही अनुषांगिक संगठन राष्ट्रीय शैक्षणिक महासंघ की उत्तर प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कड़ा पत्र लिखा कि महामारी के बीच में राज्य में पंचायत चुनाव कराना दुर्भाग्यपूर्ण है. पत्र में यह भी लिखा कि, ''महासंघ की जानकारी के मुताबिक इस चुनाव ड्यूटी में शामिल 135 शिक्षकों की कोरोना से मृत्यु हो गई है. ये सभी महासंघ से जुड़े हुए हैं और मृतकों के आश्रितों को 50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए.''

इन दो वाकयों से स्पष्ट है कि संघ को यह एहसास है कि कोरोना की दूसरी लहर में सरकार और संगठन (भाजपा) लोगों की नजर में बेबस दिख रहे हैं. लोगों की मदद करने में मंत्री, विधायक और भाजपा के कद्दावर नेता नाकारा साबित हो चुके हैं. संघ के एक पदाधिकारी कहते हैं, ''जो हालात हैं उसमें कोई भी कुछ करने की स्थिति में नहीं है, परेशान लोग खासकर भाजपा के शुभचिंतक और काडर जब मदद के अभाव में अपनों को खो रहे हैं तो यह संगठन के लिए चिंता की बात है.''

कुल मिलाकर संघ यह देख पा रहा है कि कोरोना की वजह से बने हालात आने वाले दिनों में सियासी रूप से भाजपा और केंद्र सरकार को नुकसान पहुंचा सकते हैं. राजनीतिक मामलों के जानकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि, ''संघ का बयान डेटारेंट की तरह है, ताकि भाजपा में असंतोष जोर न पकड़े. यह बयान भाजपा को बचाव का रास्ता दिखाने की कोशिश है, ताकि नेतृत्व पर सवाल उठाने वालों को भारत विरोधी बताया जा सके.''

बयान जारी करने के पीछे संघ की मंशा चाहे जो रही हो, लेकिन जिस तरह से उसके अनुषांगिक संगठन ने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, वह साधारण घटना नहीं लगती है. राजनैतिक टीकाकार एन. अशोकन कहते हैं, ''राष्ट्रीय शैक्षणिक महासंघ ने दत्तात्रेय होसबले के बयान के तीन दिनों के अंदर ही पत्र लिखा है तो इससे साफ है कि भाजपा और उसके समर्थक ही सरकार से नाखुश हैं.'' सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोरोना की इस भयावह दूसरी लहर में बतौर संगठन भाजपा क्या कर रही है? भाजपा के मंत्रियों के ट्विटर हैंडल या अन्य सोशल मीडिया के जरिए यह क्यों नहीं बताया जा रहा है कि उन्होंने कहां और किसकी मदद की.

इसके विपरीत, पिछले साल जब कोविड का प्रकोप चरम पर था और लॉकडाउन लगाया गया था, तब दर्जनों मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यह बता रहे थे कि उन्होंने कहां राशन बांटा, कहां प्रवासी मजदूरों को भेजने की व्यवस्था की. इस सवाल पर भाजपा के नेता चुप्पी साधे बैठे हैं. पार्टी के कई बड़े नेता फोन नहीं उठा रहे हैं. इस बारे में जब भाजपा के वरिष्ठ महासचिव भूपेंद्र यादव से इंडिया टुडे ने फोन पर पूछा कि संगठन के लिहाज से भाजपा, इस संकट में लोगों की मदद के लिए क्या कर रही है तो उन्होंने कहा, ''यह सवाल अनिल बलूनी (भाजपा मीडिया विभाग के प्रमुख) से पूछिए.'' कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भाजपा संगठन की ओर से किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए अनिल बलूनी कहते हैं, ''संकट की घड़ी में लोगों की मदद के लिए तत्पर हैं. हर राज्य के प्रदेश कार्यालय में हेल्पलाइन शुरू की गई. इसके अलावा हमारा बूथ कोरोना मुक्त निश्चित किया गया.''

हर जुबां पर सवाल

कोरोना की इस दूसरी प्रचंड लहर में भाजपा के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि संगठन और सरकार दोनों से पहली बार आम लोग सवाल पूछने लगे हैं. अभी तक सवाल विरोधी दलों या भाजपा विरोधी रुख वाले संगठनों की ओर से ही उठते थे. बात चाहे एनआरसी की हो या कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने या सीएए या किसान आंदोलन की, हर ममाले में यही देखा गया है. कोरोना की पहली लहर में भी थाली-ताली बजाने से लेकर लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के पलायन को लेकर मुद्दे विपक्ष की तरफ से उठ रहे थे. मणिकांत ठाकुर कहते हैं, ''यह पहली बार है जब सवाल आम लोगों के बीच से उठने लगे हैं. पश्चिम बंगाल की चुनावी सभाओं और रोड शो कराने का मसला हो या हरिद्वार में कुंभ का आयोजन, भाजपा ने परहेज तब तक नहीं किया जब तक लोगों के बीच से आलोचना होनी शुरू नहीं हुई.''

दूसरी बात यह है कि अब तो कई हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ने न सिर्फ केंद्र और राज्य सरकारों (भाजपा शासित भी) को बल्कि चुनाव आयोग तक को फटकारना शुरू कर दिया है. यानी अदालतें भी सरकार के रवैये से नाराज हैं. अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं, जहां कोरोना की वजह से मची तबाही भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है. खासकर सोशल मीडिया में जिस तरह मंगलवार 27 अप्रैल को फेल्ड मोदी हैशटैग तीन घंटों तक ट्रेंड करता रहा और शाम को रिजाइन मोदी ने ट्रेंड किया, वह भाजपा के लिए बड़ी चिंता की वजह हो सकती है.

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