scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 29/- रुपये में

उत्तर प्रदेशः रवींद्र पुरी बनाम रवींद्र पुरी

नरेंद्र गिरि की मृत्यु के बाद उभरे शून्य ने हिंदू समाज के अखाड़ों को अचानक विपरीत ध्रुवों पर ला दिया है. इनकी आपसी लड़ाई उत्तर प्रदेश की राजनीति पर गहरा असर डाल सकती है.

X
रवींद्र पुरी, 52 वर्ष
रवींद्र पुरी, 52 वर्ष

अखाड़ा परिषद

रवींद्र पुरी, 52 वर्ष
श्री निरंजनी अखाड़ा के अध्यक्ष रवींद्र पुरी 25 अक्तूबर को प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष चुने गए. रवींद्र पुरी को संन्यासी (शैव) संप्रदाय के छह अखाड़े, निर्मल अखाड़ा के रेशम सिंह गुट और निर्मोही अखाड़े के मनमोहन दास गुट का समर्थन मिला था. दिल्ली स्थित श्री निरंजनी अखाड़ा के आश्रम में वर्ष 1980 में रवींद्र पुरी ने रामानंद पुरी से संन्यास लिया था. वर्ष 2001 में रवींद्र निरंजनी अखाड़े के उपमहंत और 2003 में श्रीमहंत बने थे.


रवींद्र पुरी, 50 वर्ष
महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव और हरिद्वार में कनखल दक्षेश्वर महादेव मंदिर के परमाध्यक्ष रवींद्र पुरी को 21 अक्तूबर को कनखल स्थित महानिर्वाणी अखाड़ा परिसर में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया. पुरी को सन्यासियों के एक, वैष्णव के तीन, उदासीन के दो और निर्मल अखाड़ा के ज्ञान देव सिंह गुट और निर्मोही अखाड़े के दामोदरदास गुट का समर्थन मिला. पुरी 1998 में महानिर्वाणी अखाड़े की कार्यकारिणी में शामिल हुए. वर्ष 2001 में वह श्रीमहंत पर काबिज हुए. 2007 में महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव बने.

साधु-संतों के बीच विवाद और टकराव को रोकने के लिए बनी ''अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’’ के भीतर दंगल शुरू हो गया है. परिषद के पूर्व अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव नरेंद्र गिरि की प्रयागराज स्थित बाघम्बरी मठ में 20 सितंबर को आत्महत्या के बाद परिषद के सचिव हरि गिरि ने 25 अक्तूबर को प्रयागराज के निरंजनी अखाड़ा मुख्यालय में नए अध्यक्ष के चुनाव की तारीख तय की थी.

लेकिन 21 अक्तूबर को हरिद्वार में किसी पूर्व सूचना के बगैर सात अखाड़ों ने अचानक महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी को परिषद का अध्यक्ष चुन लिया. नई कार्यकारिणी भी चुनी गई, जिसमें वैष्णव संप्रदाय के राजेंद्र दास को महामंत्री, निर्मल अखाड़े के जसविंदर सिंह को कोषाध्यक्ष, वैष्णव संप्रदाय के रामकिशोर दास को मंत्री और गौरीशंकरदास को प्रवक्ता पद पर चुना गया.

तीन दिन बाद 25 अक्तूबर को प्रयागराज के निरंजनी अखाड़ा में हुई बैठक के दौरान निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी को परिषद का अध्यक्ष और जूना अखाड़े के हरि गिरि को सचिव चुन लिया गया. बहुमत के लिए 13 में से 7 अखाड़ों का समर्थन जरूरी था. निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी ने आठ अखाड़ों के समर्थन का दावा किया है. अखाड़ा परिषद के दो गुटों में बंटने के साथ उदासीन संप्रदाय का निर्मल अखाड़ा और वैरागी संप्रदाय का निर्मोही अखाड़ा भी दो धड़ों में बंट गया है.

''अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’’ के अध्यक्ष का पद पहले भी विवादों से घिरा रहा है. वर्ष 2010 में प्रयागराज में हुए अखाड़ा परिषद के चुनाव को इलाहाबाद हाइकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जब नरेंद्र गिरि अध्यक्ष चुने गए थे. वर्ष 2013 में कोर्ट ने परिषद के चुनाव पर रोक लगा दी थी. वर्ष 2014 में नरेंद्र गिरि फिर से अध्यक्ष चुने गए, और इस बार अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी के महंत ज्ञानदास ने चुनाव को हाइकोर्ट में चुनौती दी.

कोर्ट ने चुनाव पर रोक लगा दी. इसके बावजूद अखाड़ों ने नरेंद्र गिरि को ही अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष माना. उज्जैन के 2016 कुंभ में एक बार फिर नरेंद्र गिरि को ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के तौर पर मंजूरी मिली. श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा, हरिद्वार के महामंडलेश्वर महेशानंद गिरि कहते हैं, ''नरेंद्र गिरि अधिकतर अखाड़ों के बीच सर्वमान्य थे लेकिन उनके बाद अखाड़ों के बीच विवाद और होड़ का सिलसिला शुरू हो सकता है.’’

अखाड़ा परिषद में दो फाड़ होने के बाद संतों का एक गुट इसके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहा है. हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ भ्रूमा निकेतन के अध्यक्ष अच्युतानंद तीर्थ इसे ''झगड़ा परिषद’’ कहते हैं. अच्युतानंद कहते हैं, ''साधु संतों के झगड़ों व टकराव से बचने के लिए अखाड़ा परिषद का गठन हुआ था, लेकिन 50 से अधिक वर्ष बीतने के बाद भी अखाड़ा परिषद पंजीकृत संगठन नहीं बन पाया है.

न ही इसकी कोई नियमावली है और न कोई कार्यालय.’’ प्रयागराज में निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखाड़ा परिषद के एक गुट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी कहते हैं, ''बहुत से अखाड़े अभी तक रजिस्टर्ड नहीं हैं. ऐसे में अखाड़ा परिषद को रजिस्टर्ड संस्था बनाने में दिक्कतें हैं. अभी तक परिषद का कोई कार्यालय भी नहीं है. दोनों गुटों की एकता के बाद अखाड़ा परिषद को रजिस्टर्ड संस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा.’’

अखाड़ों के बीच विवाद को खत्म कराने के लिए राजनेता भी कोशिश कर रहे हैं. उन्नाव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और निर्मल अखाड़े के महामंडलेश्वर साक्षी महाराज ने अखाड़ा परिषद के एक गुट के सचिव हरि गिरि से बात की है. केंद्र में राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर हैं.

निरंजन ज्योति ने निरंजनी अखाड़े के पदाधिकारियों से अखाड़ा परिषद के दोनों गुटों के बीच एकता करने की पेशकश की है. फिलहाल दोनों गुट अपने दावे कर रहे हैं. (देखें आरोप-प्रत्यारोप) अगर सुलह नहीं हुई तो अखाड़ा परिषद के दोनों धड़े कुंभ, अर्ध कुंभ और महाकुंभ में भूमि आवंटन से लेकर संतों और भक्तों की सुविधाओं के लिए अपने अलग दावे पेश करेंगे. इससे विवादों का अंतहीन सिलसिला शुरू होगा.

अखाड़ों की राजनैतिक महत्वकांक्षाएं गुटबाजी का कारण बनती रही हैं. नरेंद्र गिरि की समाजवादी पार्टी से नजदीकियां थी. वर्ष 2019 के प्रयागराज कुंभ में स्नान करने पहुंचे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ नरेंद्र गिरि की गंगा में डुबकी लगाती हुई तस्वीरों ने खासा चर्चा बटोरी थी. वहीं प्रयागराज कुंभ के दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के शिविर में पूजा करने के बाद संतों के साथ भोजन किया था.

जूना अखाड़ा का मुख्यालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पड़ता है. वाराणसी दौरे के दौरान नरेंद्र मोदी कई बार जूना अखाड़े के संतों से आशीर्वाद लेते रहे हैं. डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर सुशील पांडेय कहते हैं, ''भगवान राम और कृष्ण भाजपा के एजेंडे में हैं. इसी वजह से विष्णु को मानने वाले वैरागी संप्रदाय से जुड़े अखाड़े राजनैतिक रूप से ज्यादा प्रभावशाली हो गए हैं. अखाड़ों की अंदरूनी राजनीति में बदलाव की एक वजह यह भी है.’’

अखाड़ा परिषद कुंभ और अर्धकुंभ में संतों की व्यवस्था करता है. विभिन्न अखाड़े सरकार पर दबाव बनाकर कुंभ परिसर में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दिलाने का प्रयास करते हैं. 2021 के हरिद्वार कुंभ में वैरागी संप्रदाय के तीन अखाड़ों ने खुद को उपेक्षित महसूस कर अखाड़ा परिषद से अलग कर लिया था.

यहीं से अखाड़ा परिषद में विभाजन की नींव तैयार हुई थी. वैरागी अखाड़ा का आरोप था कि हरिद्वार कुंभ में उन्हें दूसरे अखाड़ों की तुलना में काफी कम जगह आवंटित हुई थी. शाही स्नान में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया था. इन अखाड़ों के आपसी द्वंद्व हिंदू समाज और उसकी राजनीति को दूर तक प्रभावित कर सकते हैं.

''अखाड़ा परिषद में लंबे समय से संन्यासी परंपरा के निरंजनी और जूना जैसे बड़े अखाड़ों के वर्चस्व को तोड़ने के लिए वैरागी और उदासीन परंपरा के अखाड़ों के समर्थन से हरिद्वार में अखाड़ा परिषद के एक अलग गुट का गठन हुआ है’’

—सुशील पांडेय,
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर

क्या है अखाड़ा परिषद
आदि शंकराचार्य की प्रेरणा से समाज में धर्म विरोधी शक्तियों से निबटने के लिए अखाड़ों का गठन हुआ था. वर्तमान में कुल 13 अखाड़े हैं जो हिंदू त्योहारों का आयोजन करते हैं. कुंभ और अर्धकुंभ के आयोजन में इन अखाड़ों की बड़ी भूमिका होती है. कुंभ के दौरान अखाड़ों के बीच होते संघर्ष को रोकने के लिए 1954 में ''अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद’’ का गठन किया गया था. इसमें सभी 13 अखाड़े शामिल हैं.

कैसे होता है चुनाव
प्रत्येक अखाड़ा अपने दो सदस्यों को अखाड़ा परिषद के सदस्य के रूप में मनोनीत करता है. इस प्रकार 13 अखाड़े के सभी 26 सदस्य अपने बीच से अध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मंत्री, प्रवक्ता का चुनाव करते हैं. परिषद का चुनाव हर पांच वर्ष पर होता है.

हिंदू धर्म में अखाड़े
कुल 13 जो तीन मतों यानी शैव संन्यासी, वैरागी
और उदासीन में बंटे हुए हैं 
शैव संन्यासी संप्रदाय 
(इसके तहत कुल सात अखाड़े हैं. शिव और उनके अवतारों को मानते हैं.)
  श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, कनखल, हरिद्वार
 श्री पंच अटल अखाड़ा, वाराणसी
 श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी, दारागंज, प्रयागराज
 श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती, त्रयंबकेश्वर, नासिक
 श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, बाबा हनुमान घाट, वाराणसी
 श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा, दशाश्वमेध घाट, वाराणसी
 श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा, गिरीनगर, भवनाथ, जूनागढ़, गुजरात
वैरागी संप्रदाय 
(इसमें कुल तीन अखाड़े हैं. यह विष्णु के उपासक हैं.)
 श्री दिगंबर अनी अखाड़ा, शामलाजी खाक चौक मंदिर, साबरकांठा, गुजरात
 श्री निर्वानी अखाड़ा, हनुमान गढ़ी, अयोध्या
 श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा, धीर समीर मंदिर बंसीवट, वृंदावन
(यह दो गुटों में बंट गया है.)
उदासीन संप्रदाय 
(इसमें कुल तीन अखाड़े हैं. मुख्यत: सिख-साधुओं से जुड़ा अखाड़ा. सनातन धर्म को मानने वाले)
 श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, कृष्णनगर, कीडगंज, प्रयागराज
 श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, कनखल, हरिद्वार
 श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा, कनखल, हरिद्वार, उत्तराखंड 
(यह दो गुटों में बंट गया है.).

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें