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क्रिप्टो करेंसीः भारत में क्रिप्टो का मजा किरकिरा?

यूरोपियन यूनियन में सितंबर 2020 में मार्केट्स इन क्रिप्टो-एसेट्स रेग्यूलेशन फ्रेमवर्क, जो क्रिप्टोकरेंसी को वित्तीय साधन की तरह देखता है, जारी किया गया था, पर इसका अनुमोदन अभी होना है

क्रिप्टोकरेंसी: खासी दिलचस्पी क्रिप्टोकरेंसी: खासी दिलचस्पी

लाखों भारतीय क्रिप्टोकरेंसी में पैसा लगा चुके हैं और शायद लाखों इसमें गोता लगाने से पहले फायदों और जोखिमों का अनुमान लगा रहे हैं. ऐसे में आने वाले क्रिप्टोकरेंसी और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2021 को लेकर खासी दिलचस्पी है. इस पर संसद के इसी शीतकालीन सत्र में चर्चा होने की उम्मीद है. उम्मीद है कि विधेयक में क्रिप्टो-व्यापार एक्सचेंज की जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटियां शामिल होंगी. लोग उम्मीद कर रहे हैं कि डिजिटल टोकन को शेयरों और रियल एस्टेट की तरह परिसंपत्ति ही माना जाएगा.

यह लगभग तय है कि बिटकॉइन और एथेरियम सरीखी निजी क्रिप्टो मुद्राओं को भारत की वैध मुद्रा के रूप में मान्यता नहीं मिलेगी. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 नवंबर को लोकसभा में कहा कि बिटकॉइन—मूल्य के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी—को मुद्रा के रूप में मान्यता देने की कोई योजना नहीं है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी को 'धन शोधन और आतंकी वित्तपोषण का जरिया' बनने से रोकने के उपायों के साथ इस क्षेत्र में 'गुमराह करने वाले, बढ़-चढ़कर वादे करने वाले और अपारदर्शी' विज्ञापनों के खिलाफ नियम-कायदों की संभावना है. यह बात सरकार के प्रवक्ता ने मध्य नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस विषय पर हुई एक बैठक के बाद कही थी.

उद्योग के सदस्य चाहते हैं कि क्रिप्टो को निवेश के अवसर के रूप में मान्यता मिले. क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनस्विच के संस्थापक और सीईओ आशीष सिंघल को उम्मीद है कि नियम-कायदों का जोर चार क्षेत्रों पर होगा—विनियमित क्रिप्टो वर्ग के रूप में क्रिप्टो मुद्राओं का वर्गीकरण; डिजिटल टोकन से और उनमें धन की आवाजाही का स्पष्ट ढांचा; उद्योग के लिए केवाइसी (अपने ग्राहक को जानें) की कठोर प्रक्रियाएं; और क्षेत्र के लिए स्वतंत्र नियामक. वे कहते हैं, ''भारत के पास क्रिप्टो नवाचार के मोर्चे पर आगे होने का मौका है. हमें एक देश के रूप में फायदा देने वाले नियम-कायदों की (जरूरत) है.''

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग क्रिप्टोकरेंसी पारिस्थितिकी तंत्र को 'वैकल्पिक डिजिटल अर्थव्यवस्था' बताते हैं, जो मौजूदा डिजिटल अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाली केंद्रीयकृत डेटाबेस टेक्नोलॉजी के विपरीत ब्लॉकचेन-क्रिप्टोग्राफी टेक्नोलॉजी पर टिकी है. वे तीन बड़े हिस्सों की पहचान करते है—वास्तविक वस्तुएं और सेवाएं (संगीत सेवाओं, डिजिटल एप्लीकेशंस और विकेंद्रीकृत वित्तीय सेवाओं सहित); डिजिटल परिसंपत्तियां (जैसे एनएफटी या नॉन-फंजिबल टोकन); और मुद्रा के रूप में क्रिप्टो का प्रयोग. वे कहते हैं, ''(सरकार को) तीनों पहलुओं के लिए नीतियां लानी चाहिए.''

भारत उन वैश्विक मिसालों से सीख सकता है जो निवेशकों की रक्षा के लिए नियम-बनाते हुए भी इसकी अंतर्निहित टेक्नोलॉजी में निवेश को प्रोत्साहित करती हैं. अमेरिका में क्रिप्टो-करेंसी को विनियमित करने के लिए हर राज्य के अपने कानून हैं. कुछ राज्य क्रिप्टोकरेंसी को सरकारी प्रतिभूति कानूनों और धन अंतरण व्यवस्थाओं से छूट देते हैं. 2018 में वहां ओहायो बिटकॉइन में कर का भुगतान स्वीकार करने वाला पहला राज्य बन गया था, हालांकि वह फैसला बाद में रद्द किया गया. ब्रिटेन में क्रिप्टो एक्सचेंज को फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी में, जो वित्तीय फर्म और बाजारों को विनियमित करता है, रजिस्टर करवाना जरूरी है. उपभोक्ता क्रिप्टो करेंसियां खरीद और बेच सकते हैं, पर उन्हें वैध मुद्रा के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है.

यूरोपियन यूनियन में सितंबर 2020 में मार्केट्स इन क्रिप्टो-एसेट्स रेग्यूलेशन फ्रेमवर्क, जो क्रिप्टोकरेंसी को वित्तीय साधन की तरह देखता है, जारी किया गया था, पर इसका अनुमोदन अभी होना है. इसके उलट चीन ने क्रिप्टोकरेंसी में निजी लेन-देन पर पाबंदी लगा दी. यह पाबंदी अत्यधिक नियम-कायदों से लदे उसके डिजिटल युआन को मिलने वाली प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए लगाई गई थी. नियम लागू करने पर तो विचार अलग-अलग हैं, पर सर्वानुमति यह दिखाई देती है कि निवेशकों की रक्षा के बेहतर उपाय करने की जरूरत है.

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