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गोवा हवाई अड्डा: दूसरी उड़ान के लिए तैयार मनोहर पर्रीकर

दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रस्ताव के फिर चर्चा में आने से उत्तर और दक्षिण गोवा दो फाड़. क्या मुख्यमंत्री इसे सुरक्षित मंजिल तक पहुंचा सकेंगे?

उत्तर गोवा स्थित मोपा में दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने के गोवा सरकार के प्रस्ताव ने राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया है. दक्षिण गोवा के धनी-मानी और असरदार लोग इस प्रस्ताव के खिलाफ गोलबंद हो रहे हैं. उनकी नजर में यह हवाई अड्डा उनके कारोबार और आजीविका को निगल जाएगा. दाबोलिम में गोवा का मौजूदा हवाई अड्डा नौसेना का है.

दाबोलिम में उड़ानों के प्रबंधन की जिम्मेदारी भारत विमानपत्तन प्राधिकरण की है. कुल 1,900 एकड़ जमीन में से 35 एकड़ इसके संचालन के लिए निर्धारित है.

मनोहर पर्रीकर 9 मार्च को मुख्यमंत्री के रूप में एक साल पूरा करेंगे. उन्हें अपनी पसंदीदा मोपा हवाई अड्डा परियोजना को साकार करने के लिए मानमनौव्वल के अपने तमाम कौशल को आजमाना होगा.

सितंबर, 2012 में तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही पर्रीकर ने बीजेपी के गढ़ उत्तर गोवा में मोपा हवाई अड्डा बनाने के पुराने प्रस्ताव को फिर जिंदा कर दिया. सन् 2000 से यह प्रस्ताव दबा हुआ था. पर्रीकर का मानना है कि काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए अपना खुद का हवाई अड्डा होना जरूरी है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन की रिपोर्ट का हवाला भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि यात्रियों की बढ़ती तादाद और 2014 तक बेतहाशा हवाई यातायात से निबटने में दाबोलिम हवाई अड्डा पूरी तरह से सक्षम नहीं है. वहां भीड़ बहुत बढ़ जाएगी. मुख्यमंत्री चाहते हैं कि नए हवाई अड्डे पर 2015 तक विमानों की आवाजाही शुरू हो जाए. उनका तर्क है, ''दाबोलिम हवाई अड्डे का अगर विस्तार और सुधार हो जाए तो भी वह यात्रियों की बढ़ती तादाद को संभाल नहीं पाएगा. इस तादाद के 2017 तक 60 लाख से भी ऊपर निकल जाने की संभावना है.

अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन की रिपोर्ट 2010 में जारी हुई थी, जिसमें राज्य में पर्यटन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मोपा को सबसे बढिय़ा विकल्प बताया गया है. 7 फरवरी को विधानसभा में एक बयान में पर्रीकर ने दाबोलिम हवाई अड्डा बंद किए जाने की संभावना से साफ इनकार किया था. उन्होंने कहा था, ''दाबोलिम हवाई अड्डे के सुधार पर करीब 350 करोड़ रु. खर्च हुए हैं. मोपा के चालू होने के बाद उसे बंद करने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि राज्य को दोनों हवाई अड्डों की सेवाएं चाहिए.” उन्होंने मोपा हवाई अड्डा चालू होने से पहले उत्तर और दक्षिण गोवा के बीच बेहतर आवाजाही के लिए 6 लेन के हाइवे का वादा किया है.

पर्रीकर को इस मामले में विपक्षी पार्टी कांग्रेस से अप्रत्याशित समर्थन मिला है. विपक्ष के नेता प्रताप सिंह राणे का कहना है कि दक्षिण गोवा में होटल मालिकों की लॉबी मोपा हवाई अड्डे का विरोध करवा रही है. उलटा वे सवाल करते हैं कि दो हवाई अड्डे होने से आखिर नुकसान क्या है? अगर पर्यटक हजारों किलोमीटर दूर से गोवा आ सकते हैं तो वे दक्षिण गोवा में होटलों तक पहुंचने के लिए 60 किलोमीटर और सफर क्यों नहीं कर सकते?

दूसरी ओर, मोपा के विरोधियों का तर्क है कि इससे राज्य का आर्थिक संतुलन गड़बड़ा जाएगा. अब तक उत्तर गोवा अपने समुद्र तटों, रेस्तरां और शराब घरों के लिए लोकप्रिय है, जबकि दक्षिण गोवा मेहमाननवाजी, सेवा क्षेत्र तथा पूजा स्थलों के लिए प्रसिद्ध है. एक गैर-सरकारी संगठन फोरम फॉर प्रमोटिंग एंप्लॉयमेंट ऐंड आंटरप्रेन्योरशिप इन गोवा ने 17 फरवरी को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था, ''दक्षिण गोवा के कोलवा, वारसा, केवलोसिम और बेनाउलिम जैसे लोकप्रिय बीच ही मोपा से 60 किलोमीटर से ज्यादा दूर हैं. दस साल में दाबोलिम हवाई अड्डा अपने आप मर जाएगा और उसके साथ ही दक्षिण गोवा का कारोबार भी दफन हो जाएगा.”

2011-12 में गोवा का सकल घरेलू उत्पाद 44,460 करोड़ रु. था. गोवा वाणिज्य और उद्योग मंडल के अध्यक्ष मनगुईरिश पई रायकर का कहना है कि सकल घरेलू उत्पाद में दक्षिण गोवा का योगदान उत्तर गोवा से ज्यादा है. उनके विचार में, ''आप दो जिलों का सकल घरेलू उत्पाद अलग-अलग करके नहीं देख सकते क्योंकि पूरा राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक के पड़ोसी जिलों से भी छोटा है. मैं तो यही कह सकता हूं कि मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था यानी विदेशों में बसे गोवावासियों से राज्य में अपने संबंधियों को आने वाले पैसे और खनन उद्योग से उत्तर के मुकाबले दक्षिण गोवा में ज्यादा कमाई होती है.”

प्रस्तावित हवाई अड्डे के खिलाफ यह अभियान दक्षिण गोवा में फतोरदा से निर्दलीय विधायक विजय सरदेसाई चला रहे हैं. उनका कहना है, ''टुअर ऑपरेटर विज्ञापन दे रहे हैं कि तटवर्ती महाराष्ट्र के सैर-सपाटे के स्थल गोवा हवाई अड्डे से ज्यादा नजदीक हैं. गोवा पर्यटन में ब्रांड बन चुका है और वे इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.” दक्षिण गोवा में बेनाउलिम, सेराउलिम, केवलोसिम, चिनचिनिम, तलाउलिम, कारमोना और माकाजाना सहित अनेक ग्राम सभाएं भी हवाई अड्डे का विरोध कर रही हैं.

व्यापारियों, टुअर एजेंसियों, टैक्सी ऑपरेटरों, छोटे होटलों, मोटलों और रेस्तरां मालिकों ने मोपा हवाई अड्डे का विरोध करने के लिए साउथ गोवा एक्शन फोरम नाम से एक संगठन बना लिया है.

मोपा विरोधी कार्यकर्ता गोवा और महाराष्ट्र से कांग्रेस और भाजपा नेताओं के साथ-साथ रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े लोगों पर भी निशाना साध रहे हैं. उनका आरोप है कि इन्होंने मोपा के आसपास करीब 30 लाख वर्ग मीटर जमीन खरीद ली है. साउथ गोवा एक्शन फोरम के अध्यक्ष विलफ्रेड फर्नांडीस का कहना है, ''वे कहीं ऊंचे दाम पर ये जमीन बेचेंगे या इस पर बड़े-बड़े रिहाइशी परिसर या होटल बनाकर मोटा मुनाफा कमाएंगे.”

एक ईमानदार नेता की पर्रीकर की छवि के भरोसे बीजेपी मार्च 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के गढ़ दक्षिण गोवा में सेंध लगाने में कामयाब हो गई थी. वहां उसने दस में से आठ सीटों पर जीत हासिल की थी. पार्टी को कुल मिलाकर 40 में से चौबीस सीटें मिली थीं. कांग्रेस के पुराने समर्थक कैथलिक समुदाय ने उससे छिटककर पर्रीकर को अभूतपूर्व समर्थन दिया था. अब अगर पर्रीकर मोपा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पक्ष में पर्याप्त जनमत नहीं बना पाए तो हो सकता है कि उनके करिश्मे पर ग्रहण लगना शुरू हो जाए.

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