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सभी विषयों पर संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से अध्ययन भविष्य की तस्वीर है

इलस्ट्रेशनः सिद्धांत जुमडे इलस्ट्रेशनः सिद्धांत जुमडे

सत्य राघवन

हर पीढ़ी के अध्ययन और सीखने का तरीका अलग होता है. हाल के वर्षों में अधिकतर भारतीयों ने स्कूलों और कॉलेजों में एक संयोजित शिक्षा हासिल की. इसके अलावा उन्होंने अपने सहपाठियों, परिवार के सदस्यों और मित्रों से भी बहुत कुछ सीखा. लेकिन आज के समय में जब सारी सूचनाएं फटाफट उपलब्ध हैं—बहुत ही कम खर्च में आधा अरब से ज्यादा भारतीयों के लिए उपलब्ध—तो सीखने का तरीका बड़ी तेजी से बदल रहा है और इसका श्रेय ऑनलाइन वीडियो को जाता है.

बेहतर कनेक्टिविटी और सस्ते डेटा के कारण देश भर में ऑनलाइन वीडियो सामग्री का बहुत ज्यादा उपयोग हो रहा है. संगीत, टेक्नोलॉजी, यात्रा और जीवनशैली जैसे विभिन्न विषयों पर पहले से ही बहुत बड़ी मात्रा में सामग्री उपलब्ध रही है, लेकिन पिछले दो वर्षों से भारत में यूट्यूब पर शैक्षिक विषयों पर भी बहुत तेजी से सामग्री उपलब्ध होने लगी है.

मांग और वृद्धि

वैश्विक रूप से देखें तो यूट्यूब पर एक दिन में ही करोड़ों लोग शैक्षणिक वीडियो देखते हैं. यहां तक कि भारत में भी बहुत बड़ी संख्या में यूट्यूब पर किसी चीज को लेकर 'कैसे करें' वाले सवाल किए जा रहे हैं. देश में हमारे रिसर्च से पता चलता है कि यूजर यूट्यूब पर हर तरह के सवाल पूछकर उसका फायदा उठा रहे हैं. उनके सवालों में रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों (टाई कैसे बांधें) से लेकर शिक्षा संबंधी सवाल (गुणा कैसे करें) और नए कौशल सीखने वाले सवाल (सालसा कैसे बनाएं) शामिल होते हैं. यूट्यूब पर उपलब्ध ऑडियो-विजुअल सामग्री से भारतीय यूजरों को दुनिया भर के हर तरह के विषयों पर जानकारी लेने में मदद मिलती है, वे तेजी और आसानी से उन विषयों को समझ जाते हैं.

रोचक बात यह है कि यूट्यूब पर सीखने का यह चलन केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है. अब दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में भी लोग कुछ भी सीखने के लिए यूट्यूब का फायदा उठा रहे हैं और अपनी आजीविका को बेहतर बना रहे हैं. शिक्षा संबंधी सामग्री जैसे गणित और विज्ञान से लेकर खेती और फोटोग्राफी जैसे पेशागत विषयों के अलावा डांस और कुकिंग जैसे शौकिया विषयों पर भी यूट्यूब पर बड़ी संख्या में वीडियो मिल जाते हैं. वे लगभग सभी भाषाओं में उपलब्ध होते हैं और सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए होते हैं. उदाहरण के लिए, गांवों में भी बहुत से यूजर अपने शिक्षा संबंधी सवालों का जवाब उस विषय के विशेषज्ञों से पा जाते हैं और उसे सीखकर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं. छोटे शहरों में अब कई शिक्षक क्षेत्रीय भाषाओं—खासकर तमिल और हिंदी—में चैनल बना रहे हैं जो छात्रों में बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं.

संक्षिप्त और सुगम सामग्री

यूट्यूब पर शैक्षणिक सामग्री सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए विभिन्न विषयों को आसानी से समझने में मददगार साबित हो रही है. आजकल कई अध्यापक अपने खुद के चैनलों पर क्लासरूम के लेक्चरों के वीडियो अपलोड कर रहे हैं. वाइफाइस्टडी जैसे चैनल ऑनलाइन कोचिंग सेंटर चला रहे हैं और एक दिन में 30 वीडियो तक डाल रहे हैं जिनमें सवाल और जवाब के सेशन होते हैं. इस तरह की सामग्री केवल स्वतंत्र अध्यापकों तक ही सीमित नहीं है. शिक्षा संस्थान भी इसकी पहुंच और इसके वितरण का फायदा उठा रहे हैं. उदाहरण के लिए, एनपीटीइएलएचआरडी के 15 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं.

क्रिएटर हमेशा से यूट्यूब की जान रहे हैं और हम उन्हें उनके दर्शकों के लिए सबसे अच्छी सामग्री तैयार करने में उनकी मदद कर रहे हैं.

लेखक यूट्यूब इंडिया के कंटेन्ट पार्टनरशिप्स के निदेशक हैं

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