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खुशीः एक बार में एक सीढ़ी

मुंबई के सरकारी स्कूलों में सैकड़ों बच्चे अंग्रेजी में बातचीत करना सीख रहे हैं और यह प्रयास उनके लिए नई दुनिया खोल रहा है.

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खाई पाटने के लिए पहला अक्षर की कार्यक्रम निदेशक राधा गोयनका बच्चों के साथ एक बार में एक सीढ़ी
खाई पाटने के लिए पहला अक्षर की कार्यक्रम निदेशक राधा गोयनका बच्चों के साथ एक बार में एक सीढ़ी

मुंबई के वर्ली सी फेस स्थित राजकीय विद्यालय में नौवीं कक्षा की छात्रा आरुषि झा सवालों के जवाब अंग्रेजी में देने पर जोर देती है. हालांकि वह धीमी गति से जवाब दे पाती है पर सुनिश्चित करती है कि संवाद करने के लिए सही शब्दों और व्याकरण का उपयोग करे.

आजकल उसकी पसंदीदा कहानी 'ऑटर विजडम’ है, जहां एक ऊदबिलाव प्रकृति के साथी जानवरों से मिलता है और उनसे कुछ सीखते हुए उनके साथ अपना ज्ञान साझा करता है. आरपीजी एंटरप्राइजेज की ओर से संचालित 'पहले अक्षर’ कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर यह और ऐसी ही दूसरी कहानियां तथा अन्य साहित्य मुंबई के सरकारी स्कूलों के बच्चों के सामने एक पूरी नई दुनिया खोल रहा है. 

राधा गोयनका के दिमाग की उपज इस कार्यक्रम का मकसद उन विद्यार्थियों में अंग्रेजी बोलचाल की हिचक दूर करना है जिनके माहौल में इस भाषा का धाराप्रवाह उपयोग करने के हालात नहीं हैं. इस पहल के लिए अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने वाली कार्यक्रम निदेशक गोयनका कहती हैं, ''मध्याह्न भोजन योजना के साथ ही शिक्षा का अधिकार देश के सबसे सफल कार्यक्रमों में से एक है, लेकिन हमने महसूस किया कि बहुत सारे बच्चे अभी भी सरकारी स्कूलों को छोड़ रहे थे क्योंकि वे तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे.

ऐसे में हमने कामकाजी अंग्रेजी में अंतर को पाटने की ठानी.’’ उन्होंने 2008 में स्वयंसेवकों की टीम के साथ यह काम शुरू किया था, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि निरंतरता और गुणवत्ता के लिए उन्हें एक टीम बनानी होगी. कार्यक्रम में स्कूली शिक्षकों के लिए एक पाठ्य क्रम, एक ऐप और प्रशिक्षण शामिल है.

बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल स्कूल की 55 वर्षीया जसवंत कौर उन लोगों में से हैं जिन्हें इस कार्यक्रम से अत्यधिक लाभ मिला. कक्षा 10 के बाद उनकी औपचारिक शिक्षा खत्म हो गई थी, लेकिन अब उन्होंने इस प्रशिक्षण से व्याकरण और कक्षा प्रबंधन तकनीकों में सुधार किया है. कौर कहती हैं कि बच्चे अब कक्षाओं का अधिक आनंद लेते हैं और जब वे अंग्रेजी में जवाब देती हैं तो पारिवारिक व्हाट्सऐप समूहों में उन्हें 'अंग्रेजन’  कहा जाने लगा है.

एक अन्य 52 वर्षीया शिक्षिका अमीना शेख का कहना है कि इसकी मदद से उन्होंने भाषा का प्रवाह सुधारा है और वे आभारी हैं कि यह कार्यक्रम ''अच्छे-बुरे पर टिप्पणी करने वालों की नामौजूदगी के कारण एक सुरक्षित स्थान’’ था. वे 'पहले अक्षर’ ऐप पर खूब लेख पढ़ती हैं और 'नई चीजें आजमाने के लिए तैयार रहो’ उनका पसंदीदा उद्धरण है. बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के शिक्षा निरीक्षक किवाडे पाटिल कहते हैं, ''प्रशिक्षण मॉड्यूल उन शिक्षकों की कठिनाइयों को समझने की कोशिश करता है जो अंग्रेजी बोलने से झिझकते हैं.

मराठी और हिंदी माध्यम के स्कूलों के सभी शिक्षकों को इस कार्यक्रम को अपनाना चाहिए.’’
इस कार्यक्रम के दीक्षा ऐप में लगभग 500 पाठ हैं और डीडी सह्याद्रि पर पूरे महाराष्ट्र में 'अंग्रेजी कक्षाओं’ का प्रसारित करने के लिए एससीईआरटी महाराष्ट्र के साथ साझेदारी भी है. गोयनका का लक्ष्य अब इस कार्यक्रम को मुंबई से आगे महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों तक ले जाना है.

सुनील गावस्कर और सोनाक्षी सिन्हा जैसी हस्तियों ने 2020 में लॉकडाउन की शुरुआत में शुरू हुए 'ए स्टोरी ए डे’ कार्यक्रम के लिए स्वेच्छा से अपनी आवाज दी है. कंपनी के अनुसार, 'पहले अक्षर’ कार्यक्रम अब तक 2,00,000 छात्रों तक पहुंचने के साथ ही तीन राज्यों के 7,000 शिक्षकों को प्रशिक्षित कर चुका है. यह अभी तक स्व-वित्तपोषित है. 

कार्यक्रम से छात्रों में भी नया आत्मविश्वास आया है. वर्ली सी फेस स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र विनायक सोनी कहते हैं, ''अंग्रेजी बोलना मेरे लिए बड़े गर्व की बात है. मैं अंग्रेजी में तभी बोलता हूं जब मैं कक्षा में होता हूं’’. वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं. मुंबई के एक बीएमसी स्कूल में 9वीं कक्षा के छात्र वृदंत को फ्लैश कार्ड की मदद से भाषा सीखने में मजा आया.

उनका कहना है कि उन्हें अंग्रेजी में डॉक्यूमेंट्री देखना पसंद है और मैन वर्सेज वाइल्ड उनका पसंदीदा कार्यक्रम है. उनकी महत्वाकांक्षा पायलट बनने की है और उनका मानना है कि अंग्रेजी जानने से इसमें बड़ी मदद मिलेगी. इसे औपनिवेशिक खुमारी कहा जा सकता है, लेकिन भाषा में दक्षता को अभी भी आकांक्षाओं, महत्वाकांक्षा और एक बड़ी और बेहतर दुनिया की खिड़की के साथ जोड़ कर देखा जाता है. सोनी कहते हैं कि पहले अक्षर कार्यक्रम ''सम्मानित किए जाने’’ की अंतर्निहित जरूरत को पूरी जतन से पूरा कर रहा है. 

खुशी की खोज: इंडिया टुडे और आरपीजी समूह का संयुक्त उद्यम है जो प्रसन्नता का प्रसार करने की अनुकरणीय पहलों का उत्सव मनाता है.

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