scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 25/- रुपये में

हरियाणाः परिवारों को पहचान पत्र क्यों दे रही सरकार

हरियाणा की खट्टर सरकार की परिवार पहचान पत्र योजना का उद्देश्य सामाजिक कल्याण के लाभों की डिलिवरी में सुधार करने के लिए प्रमाणित नागरिकों का डेटा तैयार करना है.

सहज शासन  एक लाभार्थी को परिवार पहचान पत्र सौंपते डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और सीएम मनोहरलाल खट्टर (4 अगस्त, 2020) सहज शासन  एक लाभार्थी को परिवार पहचान पत्र सौंपते डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और सीएम मनोहरलाल खट्टर (4 अगस्त, 2020)

इस साल जनवरी में हरियाणा सरकार के ‘परिवार पहचान पत्र (पीपीपी)’ के लिए पंजीकरण कराते समय सोनीपत के नागरिक नवीन कुमार सरकारी रिकॉर्ड में खुद को मृतकों की सूची में देखकर स्तब्ध रह गए. पता चला कि उनके पिता टेक राम की जगह उन्हीं के नाम का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया था.

टेक राम का देहांत 25 मई, 2018 को हो गया था. सरकारी आंकड़ों में नाम की गड़बड़ी और गलत पता समेत इस तरह की खामियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को विश्वास है कि उनकी यूनिक फैमिली आइडी, पीपीपी योजना गेम चेंजर साबित होगी. 

पीपीपी का उद्देश्य राज्य के सभी परिवारों का प्रमाणित डेटा तैयार करना है ताकि पहचान संबंधी गलतियों की वजह से नागरिकों को सामाजिक कल्याण के लाभों से वंचित न किया जाए. हरियाणा 1 नवंबर को यूनीक फैमिली आइडी योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया.

इससे जन्म, मृत्यु और संपत्ति का पंजीकरण, छात्रवृत्ति समेत 456 सेवाएं और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम जुड़े होंगे. राज्य का 2021-22 का कुल खर्च 1.55 लाख करोड़ रु. तय किया गया है और खट्टर को उम्मीद है कि सामाजिक क्षेत्र का खर्च इस पीपीपी के जरिए ज्यादा से ज्यादा लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचेगा.

स्मार्ट डिलिवरी
इस योजना के लिए डेटा जुटाने का केंद्र चंडीगढ़ में मुख्यालय वाला सिटीजन रिसोर्स इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट (सीआरआइडी) है. यह नोडल एजेंसी सीधे खट्टर को रिपोर्ट करती है. युवा पेशेवरों को मौके पर किए गए सर्वेक्षणों के जरिए जुटाए गए डेटा को प्रमाणित और उसे विभिन्न विभागों के लिए प्रॉसेस करने में मसरूफ देखा जा सकता है.

नागरिकों का सभी प्रमाणित डेटा पीपीपी नंबर के जरिए अधिकारियों को उपलब्ध है. इससे किसी भी तरह की सरकारी सेवा हासिल करने के लिए सहायक दस्तावेज लगाने की जरूरत खत्म हो जाएगी. मिसाल के तौर पर, हरियाणा की नागरिक श्रुहति मलिक और उनके पति को अपने बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराने के लिए अपने आधार के ब्योरे जमा करने की जरूरत नहीं पड़ी.

श्रुति के पीपीपी नंबर से न केवल सारी जानकारी मिल गई बल्कि स्तनपान करा रही माताओं से जुड़ी उन सारी योजनाओं का ब्यौरा मिल गया जिनकी वे हकदार हैं, साथ ही उनका आवासीय पता और बैंक अकाउंट नंबर भी मिल गया, जिसमें सरकार उन्हें मिलने वाले लाभ को हस्तांतरित कर सकती है.

पीपीपी नंबर के दो हिस्से हैं—एक सात-नंबर की फैमिली आइडी, और आठवां अंक परिवार विशेष के सदस्यों की सूचना से जुड़ा है. नागरिकों को दिए जा रहे पीपीपी स्मार्ट कार्ड में राज्य में उनकी संपत्ति का डेटा, आय, किसी तरह की पेंशन के साथ ही छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य और उन्हें उपलब्ध दूसरे लाभ की जानकारी है. खट्टर का कहना है, ''हकदार लाभार्थियों की प्राय: कोई आवाज नहीं होती. इसका विचार शासन को उनके द्वार तक ले जाना है.’’

हरियाणाः परिवारों को पहचान पत्र क्यों दे रही सरकार
हरियाणाः परिवारों को पहचान पत्र क्यों दे रही सरकार

लेकिन इस परियोजना की वजह से कुछ हलकों में लोगों की 'संवेदनशील’ जानकारी सरकार के कब्जे में होने को लेकर आशंका पैदा हो गई है. अक्तूबर में पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट में दाखिल याचिका में इस योजना पर रोक लगाने की मांग की गई. याचिका में दलील दी गई कि परिवारों की वित्तीय जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम है.

लेकिन खट्टर का कहना है कि परिवार पहचानपत्र में शामिल जानकारी पहले से ही लोगों की जानकारी में है. इसके अलावा, आधार से जुड़ी निजता की बहस के मद्देनजर हरियाणा सरकार का कहना है कि डेटा जुटाने और उसके प्रॉसेसिंग के लिए किसी निजी एजेंसी का प्रयोग नहीं किया गया है. हरियाणा के एक प्रमुख अधिकारी कहते हैं, ''राज्य सरकार की सेवाओं को पाने के लिए डेटा अपनी मर्जी से देना है. अगर वे कोई सेवा नहीं ले रहे हैं तो वे डेटा न देने के लिए स्वतंत्र हैं.’’

खट्टर शासन के मामले में परिवार पहचान पत्र की अहमियत बताते हैं: ''आधार व्यक्ति विशेष का होता है और इससे डुप्लीकेसी तथा फंड की लीक को रोकने का उद्देश्य सधा है, और नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाया गया है. लेकिन हमारा समाज परिवार उन्मुखी है. हम पारिवारिक ढांचे पर आधारित नीतियां बनाते हैं. इसमें (आधार में) परिवार की जरूरतों को पूरी करने वाले डेटा की पहचान नहीं की गई है.’’

खाका
अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व वाला इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आइटी मंत्रालय भी यूनिवर्सल फैमिली रजिस्ट्री (यूएफआर) तैयार करने के लिए काम कर रहा है. इसका उद्देश्य केंद्र और राज्य की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए यूनीक फैमिली आइडी तैयार करना है. यूनीक फैमिली आइडी बनाने का काम 2017 में हरियाणा के साथ ही तमिलनाडु और कर्नाटक में शुरू किया गया था. छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश भी इस पर विचार कर रहे हैं.

पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की 2011 में स्वीकृत सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) के निष्कर्षों को 2015 में प्रकाशित किया गया. इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर केंद्र और राज्य सामाजिक क्षेत्र के विभिन्न लाभों को वितरित करते हैं. खट्टर का कहना है, ''एक लाख से ज्यादा लोग या तो सरकारी नौकरी पा गए हैं या आयकर दाता बन गए हैं, पर उन्होंने एसईसीसी के आधार पर लाभ उठाना जारी रखा है. इस नई आइडी में उन्हें बाहर कर दिया जाएगा और सबसे हकदार लोगों को लाभ दिया जाएगा.’’ 

हरियाणा के करीब 69 लाख परिवारों में से 64 लाख को पीपीपी के तहत सात-अंकों वाला आइडी जारी कर दिया गया है. हरियाणा के एक अधिकारी का कहना है, ''पीपीपी में व्यक्तियों की यूनिक आइडी को स्थापित करने के लिए आधार आधारित प्रमाणन का प्रयोग किया जाता है. आंकड़े को अपडेट करते समय कुछ क्षेत्रों के लिए ई-केवाइसी किया जाता है. प्रमाणन के लिए आधार का प्रयोग पीपीपी के डेटा की विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए किया जाता है.’’

सबसे पहले अटल सुविधा केंद्रों के जरिए सीआरआइडी डेटा जुटाता है. यह डेटा परिवार खुद मुहैया कराते हैं और पांच सदस्यों वाली 20 हजार स्थानीय समितियां इसे प्रमाणित करती हैं. प्रत्येक टीम 300 परिवारों को प्रमाणित करती है. परिवार के कम से कम तीन सदस्यों की आय के आंकड़े को स्वीकार किया जाता है.

हरियाणा में कुल 1.8 लाख रु. वार्षिक आय वाले परिवार को गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) माना जाता है, जबकि राष्ट्रीय मानक 1.2 लाख रु. है. खट्टर का कहना है, ''इस आइडी की बदौलत बीपीएल लाभार्थियों को किसी तरह का फॉर्म भरे बगैर सीधे उनके बैंक खाते में लाभ पहुंचाया जाएगा.’’

अगला स्तर
इस साल अप्रैल में कोविड की दूसरी लहर के दौरान इस पहचान पत्र प्रणाली का इस्तेमाल प्रभावित बीपीएल परिवारों के चिकित्सा बिलों का खर्च उठाने की राज्य सरकार की योजना के लिए किया गया. हरियाणा के जिन नागरिकों ने निजी अस्पतालों में इलाज कराया उन्हें प्रति मरीज प्रति दिन एक हजार रु. और घर पर इलाज कराने वाले बीपीएल परिवारों को कुल पांच हजार रु. दिया गया.

राज्य के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, ''लाभ का वितरण सौ फीसद था और पैसा कहीं लीक नहीं हुआ. अब हम इसे बढ़ाकर राज्य सरकार की सारी योजनाओं को इस आइडी से जोड़ रहे हैं.’’

खट्टर सरकार ने मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना को पीपीपी से जोड़ दिया है, जिसमें परिवार विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए प्रीमियम के रूप में प्रति वर्ष 6,000 रु. पाने के हकदार हैं. सरकार ने राज्य के सबसे निर्धन एक लाख ऐसे परिवारों की पहचान कर ली है जिन्हें मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत मदद दी जाएगी.

इस योजना का उद्देश्य आय बढ़ाने के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है. खट्टर का कहना है, ''हमने सात सरकारी विभागों की पहचान करके उन्हें ऐसे परिवारों की वार्षिक आय कम से कम एक लाख रु. करने की रणनीति तैयार करने को कहा है.’’ अधिकारियों के मुताबिक, इन परिवारों को साल में 250 दिन—400-500 रु. की—मजदूरी से आय के इन लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है.

सीआरआइडी के प्रमुख वी. उमाशंकर का कहना है कि हरियाणा के 28 लाख लोग किसी न किसी रूप में सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उनके डेटा का मानकीकरण करके परिवार आइडी के तहत डालने से सरकार को हकदार लाभार्थियों तक पहुंचने में मदद मिलती है. वे चहकते हुए कहते हैं, ''आखिरकार, हमारे पास डेटा है और ये सब प्रमाणित है.’’

पीपीपी काम कैसे करता है?

पहला चरण: सिटीजन रिसोर्स इन्फॉर्मेशन डिपार्टमेंट (सीआरआइडी) परिवार के सदस्यों के प्रमुख डेटा जुटाता है—अन्य ब्यौरों के अलावा, नाम, उम्र, संबंध, परिवार की आय, पेशा और शिक्षा प्रोफाइल.

दूसरा चरण: डेटा प्रमाणित करने के बाद हर परिवार को एक पीपीपी नंबर दे दिया जाता है. परिवार के हर सदस्य के प्रमाणित डेटा—जैसे छात्रवृत्ति , पेंशन, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लाभ, सरकारी एजेंसियों से अदायगी—को जोड़ा जाता है.

तीसरा चरण: राज्य के हर नागरिक को मिले पीपीपी नंबर से उसके खातों को जोड़ा जाता है.

चौथा चरण: नागरिक उन सरकारी लाभों को हासिल करने के लिए पीपीपी नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनके वे हकदार हैं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
ऐप में खोलें×