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कमजोर दिल वाले दूर रहें

क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कई मुद्राओं में बिटकॉइन के लेनदेन को मुमकिन बनाते हैं. ये एक्सचेंज उस वॉलेट का लोगों या संस्थाओं से मिलान करते हुए केवाइसी की मांग करेंगे. लेकिन एक्सचेंज से बाहर लेनदेन आसान हैं.

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बिटकॉइन
बिटकॉइन

अब इंटरनेट के बाद सबसे बड़ा बुलबुला क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन साबित हो रहा है. इस वक्त 1.67 करोड़ बिटकॉइन वजूद में हैं, जिनका मूल्य इन पंक्तियों के लिखे जाते वक्त की कीमत के हिसाब से 267 अरब डॉलर से ज्यादा है (एक की कीमत 16,000 डॉलर के हिसाब से). इसके आकार को समझने के लिए यह देखिए कि 1 दिसंबर को प्रचलन में मौजूद रुपयों का कुल मूल्य तकरीबन 252 अरब (65 रु. का 1 डॉलर के हिसाब से) था.

जनवरी 2017 में बिटकॉइन की खरीद-फरोख्त 1,000 डॉलर से कम पर की जा रही थी और दिसंबर के पहले पखवाड़े में यह 16,000 डॉलर पर पहुंच गया. कीमत में 2,000 फीसदी के इस इजाफे से इसके कारोबार में भारी वृद्घि हुई. अब कई हिंदुस्तानी इसमें जुट गए हैं और कई शेयर बाजार भी रुपए में बिटकॉइन का कारोबार होने दे रहे हैं.

बिटकॉइन की कीमत में जबरदस्त उतार-चढ़ाव आते रहते हैं: एक ही सत्र में 20 फीसदी का बदलाव आम बात है. इसकी तुलना में सोने की कीमत में पूरे साल तकरीबन 8 फीसदी का बदलाव आया. यही उतार-चढ़ाव इसे बेहद जोखिम भरा बना देता है. आज आप एक बिटकॉइन में एक कार खरीद सकते हैं, अगले हफ्ते हो सकता है, दो कारें खरीद लें या फिर महज एक दोपहिया भर. इसलिए अगर आप बिटकॉइन में लेनदेन कर रहे हैं, तो अपनी पूरी रकम को इसमें दांव पर लगा देना नासमझी होगी. इसलिए थोड़ा-थोड़ा खेलें.

नौसिखुओं के लिए बिटकॉइन यूनीक कंप्यूटर कोड की लड़ी है. नए बिटकॉइन गणित के सवालों को हल करके बनाए (निकाले) जाते हैं. हरेक कॉइन यानी सिक्के को 10 करोड़ यूनीक हिस्सों में बांटा जा सकता है जिन्हें 'सातोशी' कहते हैं. इसका यह नाम इसके मशहूर अविष्कारक सातोशी नाकामोतो के सक्वमान में रखा गया है.

बिटकॉइन चतुर क्रिप्टोग्राफी से बनाए जाते हैं. इसमें एक खुले, बांटे गए, इलेक्ट्रॉनिक खाते का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे 'ब्लॉकचेन' कहा जाता है जिसमें समय की मोहर लगे लेनदेन के 'ब्लॉक' होते हैं. इसके बनाए जाने के बाद बिटकॉइन में हुआ हरेक लेनदेन ब्लॉकचेन में लगातार दर्ज होता रहता है. ब्लॉकचेन की प्रति कोई भी डाउनलोड कर सकता है और कॉइन के लेनदेन का इतिहास देख सकता है.

बिटकॉइन को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है. हरेक वॉलेट की एक सार्वजनिक आइडी संख्या या सार्वजनिक चाभी होती है. हरेक वॉलेट की एक निजी चाबी भी है जो केवल उसके मालिक को पता होती है. अगर यह चाबी गुम जाए तो इसमें रखे कॉइन गायब हो जाएंगे और उन्हें वापस हासिल करने का कोई तरीका नहीं है.

लेनदेन उस सार्वजनिक खाता संख्या के साथ इस निजी चाबी का इस्तेमाल करके किए जाते हैं ताकि 'निश्चित कॉइन' को दूसरे वॉलेट में डाला जा सके. हरेक लेनदेन एक खास 'हैश' (एनक्रिप्टेड) मेसेज या संदेश तैयार करता है जिसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. सार्वजनिक चाबी लगाकर कोई भी इस मैसेज की तस्दीक कर सकता है. जब लेनदेन का संदेश भेज दिया जाता है, तो यूजर आसानी से जांच कर सकता है कि (i) वॉलेट में वे निश्चित कॉइन वाकई हैं या नहीं और (ii) एक ही कॉइन से दो लेनदेन करके कोई धोखाधड़ी तो नहीं हो रही है. जब ज्यादातर यूजर लेनदेन की प्रामाणिकता की तस्दीक कर देते हैं तब एक नए 'ब्लॉक' में उस लेनदेन को जोड़कर ब्लॉकचेन को अपडेट कर दिया जाता है. एक लेनदेन की तस्दीक करने में 10 मिनट लगते हैं.

क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कई मुद्राओं में बिटकॉइन के लेनदेन को मुमकिन बनाते हैं. ये एक्सचेंज उस वॉलेट का लोगों या संस्थाओं से मिलान करते हुए केवाइसी की मांग करेंगे. लेकिन एक्सचेंज से बाहर लेनदेन आसान हैं. एक नया वॉलेट बनाएं, इसमें कॉइन रखें और नकदी के लिए निजी चाबी की अदला-बदली करें. गुमनाम रहते हुए कई सारी मुद्राओं में बिटकॉइन का लेनदेन करना सीमा-पार रकम भेजने का आसान तरीका है. केवल जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा कुछ और देश इसे मुद्रा के तौर पर मान्यता देते हैं.

ज्यादातर दूसरे देश अभी इसे परिभाषित नहीं कर पाए हैं. अगर अलीबाबा और अमेजन सरीखे और ज्यादा कारोबारी इसे स्वीकार कर लेते हैं, तो इनकी उपयोगिता बढ़ जाएगी. नेस्डक और शिकागो बोर्ड ऑफ  ट्रेड बिटकॉइन पर वायदा करारों की पेशकश कर रहे हैं. यह लेनदेन के लिए आकर्षक पूंजी है, पर यह जोखिम से भी बावस्ता है. फिलहाल हमारे सामने एक बुलबुला है और अगर लेनदेन में इजाफा होता है तो यह बुलबुला और बड़ा हो सकता है. मगर बुलबुलों के साथ दिक्कत यह है कि ये फूट जाते हैं.

खेल और युवा मामलों के राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने देश में खेल प्रतिभाओं पर भरपूर भरोसा जताते हुए कहा कि देश में खेलों का जबरदस्त माहौल है. उन्होंने दावा किया कि भारत में एक नहीं, 100 उसैन बोल्ट पैदा किए जा सकते हैं. राठौड़ ने 2004 में एथेंस ओलंपिक में रजत पदक जीता था. बड़े सपने देखना महत्वपूर्ण है. लेकिन ऐसा देश जहां ओलंपिक पदकों की कोई खास परंपरा नहीं है, वहां ऐसा दावा करना बड़बोलापन ही कहा जाएगा कि उसैन बोल्ट जैसे 100 चैंपियन खोजे जा सकते हैं.

ऐसे दावे आशावाद और खुशफहमी के बीच की महीन लाइन क्रॉस करते दिखते हैं. यहां तक कि पदक जीतने वालों की टकसाल कहा जाने वाला चीन भी ओलंपिक के आखिरी दौर के तेज धावकों के लिए अभी संघर्ष कर रहा है. फिर, ऐसे में भारत का 100 उसैन बोल्ट पैदा करने का दावा हवा-हवाई ही होगा. जमैका के उसैन बोल्ट दुनिया के सबसे तेज धावक हैं. उनके नाम कई रिकार्ड दर्ज हैं.

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