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दूध के बाजार पर कब्जे की जंग

सरकारी योजनाओं के कारण प्रदेश के दुग्ध उत्पादन में हुआ इजाफा. बढ़े उत्पादन पर कब्जे के लिए बड़े डेयरी ब्रांडों में होड़.

इटावा जिले से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में बकेवर कस्बे में रहने वाले 21 वर्षीय सौरभ कुमार उम्रदराज किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं. दो साल पहले इंटरमीडिएट के बाद घर की माली हालत खराब होने के चलते सौरभ को पढ़ाई छोडऩी पड़ी. एक साल खेती करने के बाद में हरियाणा में रहने वाले अपने एक दोस्त की प्रेरणा से उन्होंने दूध का व्यवसाय शुरू करने का मन बनाया. जमीन बेचकर और बैंक से उधार लेकर उन्होंने विदेशी नस्ल की होलिस्टिन फ्रिजियन (एचएफ) गायों वाली पहली अत्याधुनिक डेयरी शुरू की. मशीनों से स्वचालित चार माह पहले शुरू हुई यह डेयरी प्रतिदिन सौ एचएफ गायों से 1,000 लीटर से ज्यादा दूध का उत्पादन कर रही है.
 
इसी तरह इटावा से 300 किमी दूर बाराबंकी के टिकैत नगर निवासी 35 वर्षीय जगदीश प्रसाद गुप्ता ने भी दूध व्यवसाय के मायने बदल दिए हैं. देसी गायों पर टिका उनका डेयरी का पुश्तैनी धंधा मंदा पड़ा तो उन्होंने प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘‘कामधेनु योजना’’ की शरण ली. आठ माह की कोशिश से इस साल जून में जगदीश ने विदेशी संकर नस्ल की सौ गायों के बूते अपनी डेयरी को नई शक्ल दी तो उत्पादन तीन गुना बढ़ गया.

यह सिर्फ दुग्ध व्यवसाय में इन दो किसानों की सफलता की कहानी नहीं है. प्रदेश में तकरीबन  300 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने दूध के व्यवसाय को नया नजरिया दिया है. देश का सबसे बड़ा राज्य होने और सर्वाधिक दुधारू पशु आबादी के चलते यूपी भले दूध उत्पादन में पहला स्थान रखता हो, लेकिन प्रति पशु दूध उत्पादन और प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के मानकों पर यह राज्य आज भी क्रमशः सातवें और आठवें पायदान पर खड़ा है.

डेढ़ साल पहले सरकार ने जो प्रयास शुरू किए, उसका असर अब दिखने लगा है. एक साल के में प्रदेश में दूध उत्पादन रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर 620 लाख लीटर प्रतिदिन के आंकड़े को छू रहा है. पर राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन प्रतिदिन केवल 7.1 लाख लीटर का ही उपयोग कर पा रहा है. दूध उत्पादन और उसके संस्थागत व्यावसायिक उपयोग के बीच के फासले को पाटने के लिए अमूल, मदर डेयरी, पारस, नमस्ते इंडिया, ज्ञान डेयरी और अनिक डेयरी जैसी डेयरी उद्योग से जुड़ी बड़ी कंपनियां यूपी में कूद पड़ी हैं.
आगरा के बरहन निवासी पोप सिंह यादव अपनी डेयरी में
(आगरा के बरहन निवासी पोप सिंह यादव अपनी डेयरी में)
आगे निकलने की होड़

मार्च, 2012 में यूपी की सत्ता संभालते ही डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की थी. उनकी यह पहल अब आकार लेती दिखाई दे रही है. अखिलेश कहते हैं, ‘‘अगले दो सालों में उत्तर प्रदेश में दूध का व्यवसाय पंजाब और हरियाणा जैसे प्रदेशों को पीछे छोड़ नई मिसाल स्थापित कर देगा.’’

उन्होंने पिछले साल जनवरी में ‘‘कामधेनु डेयरी’’ योजना की शुरुआत की. इस योजना के तहत लगने वाली डेयरी में किसानों को पंजाब और हरियाणा से संकर नस्ल वाली जर्सी, एचएफ, साहीवाल गायों या मुर्रा प्रजाति की 100 भैंसों की व्यवस्था करनी होती है.

पशुधन विभाग किसानों को गाय-भैंसों की खरीद में मदद करता है. डेयरी खोलने में 1,28,00,000 रु. का खर्च आता है. प्रमुख सचिव, दुग्ध विकास अनंत कुमार सिंह कहते हैं, ‘‘सरकार बैंकों से किसानों को ऋण दिलवाने की व्यवस्था कर रही है. खास बात यह है कि जो किसान समय पर बैंक को किस्त अदा करता है, सरकार उस पर लगने वाला ब्याज खुद अदा करती है.’’ इस प्रकार से एक ‘‘कामधेनु डेयरी’’ स्थापित करने वाले किसान को करीब 32 लाख रु. की सरकारी मदद मिलती है. इस योजना के तहत हर जिले में 5 डेयरियां स्थापित की जा रही हैं.

डेयरी को किसानों में और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश में ‘‘मिनी कामधेनु’’ योजना की शुरुआत हुई. इसमें किसानों को 100 की बजाए 50 अच्छी नस्ल के पशुओं की व्यवस्था करनी है. 52 लाख रु. की लागत वाली इस योजना में सरकार ब्याज के 14 लाख रुपयों की प्रतिपूर्ति कर रही है. विशेष सचिव, दुग्ध विकास सुरेंद्र सिंह बताते हैं, ‘‘मिनी कामधेनु योजना शुरू होने के कुछ ही महीनों में 2,123 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया है.’’
भारत में दूध की स्थिति
छाने को तैयार अमूल
इटावा के भरथना निवासी रामनाथ रोज 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन करते हैं. छह माह पहले तक वे गांव में ही औने-पौने दाम पर दूध बेच देते थे. पर इटावा से सैफई जाने वाली सड़क पर ‘‘नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड’’ की 2.5 लाख लीटर क्षमता वाली योजना ‘‘मदर डेयरी’’ के मई से शुरू होते ही आसपास के जिलों के उनके जैसे तकरीबन एक लाख छोटे किसानों को दूध बेचने के संकट से छुटकारा मिल गया है.

यूपी में बढ़े हुए दूध उत्पादन पर कब्जा जमाने की होड़ में एशिया का सबसे बड़ा डेयरी ब्रांड ‘‘अमूल्य पूरी तैयारी के साथ कूद पड़ा है. लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर चक गंजरिया शहर में 210 करोड़ रु. की लागत से बन रहे पांच लाख लीटर क्षमता वाले अमूल के डेयरी प्लांट का काम शुरू हो गया है. मुख्य सचिव कार्यालय के एक अधिकारी कहते हैं, ‘‘अमूल डेयरी से लखनऊ के आसपास के 16 जिलों की कुल 4,862 दूध समितियों से जुड़े किसान लाभान्वित होंगे.’’ अमूल यूपी में 1,000 करोड़ रु. से अधिक का निवेश करेगा.
कामधेनु योजना के तहत खुली यादव डेयरी
(कामधेनु योजना के तहत खुली यादव डेयरी)
बढ़ती प्रतिस्पर्धा से चुनौती
यूपी के दूध बाजार में दूसरी संस्थाओं के आने से राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन को कड़ी चुनौती मिलने लगी है. इससे निबटने के लिए सरकार 100 करोड़ रु. की योजनाएं शुरू करने जा रही है. प्रतिदिन दो लाख लीटर पन्नी बंद दूध उत्पादन की क्षमता वाली पराग डेयरी को संकट से उबारने के लिए सरकार इसके विस्तार में जुट गई है. पराग डेयरी के जॉपलिंग रोड, लखनऊ स्थित परिसर में प्रतिदिन 25 मीट्रिक टन की क्षमता वाला आधुनिक दही प्लांट लगाया जा रहा है. पौने चार करोड़ रु. की लागत से बनने वाला यह प्लांट अगले साल जून में काम करने लगेगा. इसके अलावा इसी डेयरी परिसर में पांच करोड़ रु. की लागत से प्रदेश का सबसे बड़ा ‘‘ऑटोमैटिक स्टरलाइज्ड फ्लेवर्ड मिल्क प्लांट’’ भी आकार ले रहा है. 10,000 बोतल प्रतिदिन क्षमता वाला यह प्लांट अगले छह माह के भीतर अपना सुगंधित मीठा दूध बाजार में उतार देगा.

राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन के अधिकारी संजीव श्रीवास्तव बताते हैं कि सरकार प्रदेश में नई यूनिटों की स्थापना करने की बजाए पुरानी डेयरियों के ही विस्तार का काम कर रही है. सरकार इसी क्रम में जल्द ही कानपुर में 20 मीट्रिक टन प्रतिदिन दूध पाउडर की क्षमता का एक प्लांट लगाने पर  विचार कर रही है, जो अगले डेढ़ साल में पूरा होगा.
इटावा के पास स्थित मदर डेयरी प्लांट
(इटावा के पास स्थित मदर डेयरी प्लांट)
गरीब किसान उपेक्षित
पर इन योजनाओं का एक स्याह पक्ष भी है. कामधेनु योजना से वही किसान लाभान्वित हो सकता है, जिसकी हैसियत कम-से-कम 15 लाख रु. का शुरुआती निवेश करने की हो. इसी महंगे प्रारूप ने गरीब किसानों को इस योजना से दूर कर दिया है और विपह्नी दलों को सपा सरकार के खिलाफ एक हथियार थमा दिया है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के प्रदेश प्रवक्ता और नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, ‘‘दूध उत्पादन बढ़ाने के नाम पर सरकार अपने चहेते लोगों का उपकृत कर रही है. कामधेनु योजना को गरीब किसान नहीं, बल्कि धनाढ्य ठेकेदारों के हवाले कर सरकार ने एक बड़े घोटाले की नींव रख दी है.’’

इन हमलों से निबटने के लिए सरकार जल्द एक छोटी डेयरी योजना लाने पर विचार कर रही है, जिसमें किसानों को 10 से 15 पशु खरीदने को प्रोत्साहित किया जाएगा. कामधेनु योजना के तहत डेयरी खोलने वाले आगरा के बरहन ब्लॉक निवासी पोप सिंह यादव कहते हैं, ‘‘अचानक ढेरों डेयरियां खुल जाने से दूध के दाम गिर गए हैं. किसान छह माह पहले 35 रु. लीटर बिकने वाला दूध अब 28 रु. लीटर में डेयरी कंपनियों को बेचने को विवश है. जबकि कंपनियां इसी दूध को 45 रु. लीटर पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रही हैं.’’ बहरहाल यूपी में दूध व्यवसाय के उफान के बावजूद इसमें गरीब किसानों की भागीदारी पीछे छूटती दिख रही है.

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