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अब होंगी मायावती आक्रामक

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती के खिलाफ ताज कॉरिडोर मामले में दाखिल याचिका खारिज की. अपनी खोई सियासी जमीन वापस पाने के लिए मायावती जल्द ही अखिलेश सरकार के खिलाफ अभियान शुरू कर सकती हैं. इसका खाका पिछले महीने ही तैयार कर लिया गया था.

मायावती के समर्थकों की दीवाली समय से पहले आ गई है. 5 नवंबर को इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उनके खिलाफ ताज कॉरिडोर मामले में दाखिल याचिका खारिज कर दी. इस मामले में छह अलग-अलग याचिकाएं एक ही उद्देश्य से 2009 में दायर की गई थीं जिन्हें कोर्ट ने एक साथ खारिज कर दिया.

यह याचिका लखनऊ की ममता सिंह और कमलेश वर्मा के वकील चंद्रभूषण पांडे ने दाखिल की थी जिस पर न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तुजा और न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार सिंह ने फैसला सुनाया. पांडे ने कहा कि वे फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. उधर बीएसपी के लिए इससे बेहतर क्या होगा कि ताज कॉरिडोर मामला पूरी तरह खत्म हो जाए. इस फैसले से बीएसपी सुप्रीमो उत्साहित हैं. अपनी खोई सियासी जमीन वापस पाने के लिए अब मायावती जल्द ही सपा के खिलाफ अभियान शुरू कर सकती हैं.

अक्तूबर में बीएसपी द्वारा जारी एक बयान में इस अभियान का खाका खींचा गया था, जिसमें ‘‘माफिया राज्य की वापसी, राज्यभर में भड़के सांप्रदायिक दंगों और सपा के दलित विरोधी रवैए पर सीधा हमला किया गया था.

ताज महल के आसपास के इलाके के सौंदर्यीकरण की परियोजना से जुड़ा ताज गलियारा मामला हालांकि अदालत में दफन हो चुका है, लेकिन उसी के नतीजतन आय से अधिक संपत्ति के मामले में मायावती के खिलाफ  दायर मामला अब भी अधर में है. जेएनयू में समाजशास्त्र के एसोशिएट प्रोफेसर विवेक कुमार कहते हैं, ‘‘यह यूपीए द्वारा सीबीआइ का इस्तेमाल करके मायावती को निशाना बनाने की साजिश का ही हिस्सा है.’’

मायावती ने ताज कॉरिडोर परियोजना 2002 में तब शुरू की थी जब वे प्रदेश में बीएसपी और बीजेपी की मिलीजुली सरकार की मुखिया थीं. उस वक्त आरोप लगे थे कि राज्य सरकार ने केंद्र से पर्यावरणीय अनुमति लिए बगैर परियोजना के लिए 17 करोड़ रु. जारी कर दिए हैं. इस मामले में घोटाले की आशंका से एक अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी.

कोर्ट ने 16 जुलाई, 2003 को सीबीआइ को मामले की जांच के निर्देश दिए थे. लेकिन आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी सीबीआइ की जांच अटक गई है क्योंकि 6 जुलाई, 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मायावती के खिलाफ  दर्ज एफआइआर को रद्द कर दिया था.

वर्मा ने आय से अधिक संपत्ति वाले मामले में 6 जुलाई को आए आदेश की पुनरीक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में फिर याचिका डाली, जिसके बाद 9 अक्तूबर को उसी खंडपीठ ने सभी पक्षों को इस आशय का नोटिस भेजा कि इस मामले को आगे बढ़ाया जा सकता है. लोकसभा में यूपीए की कमजोर स्थिति के चलते यह जांच पूरी तरह कांग्रेस के हाथ का खिलौना होगी और वह बीएसपी का समर्थन लेने के लिए इसका पूरा इस्तेमाल करना चाहेगी.

ताज मामले में मूल याचिका दायर करने वाले अग्रवाल कहते हैं, ‘जब तक सीबीआइ का इस्तेमाल औजार की तरह होता रहेगा, इंसाफ मिलने की उम्मीद बहुत कम होगी.’

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