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केंद्र सरकार का अधिकार

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ध्यान दिलाया कि पश्चिम बंगाल का 37 फीसद हिस्सा अब बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में आ जाएगा

प्रहरियों की गश्त त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर गश्त लगाता बीएसएफ का दस्ता प्रहरियों की गश्त त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर गश्त लगाता बीएसएफ का दस्ता

अक्तूबर की 11 तारीख को गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करके कुछ राज्यों में बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के अधिकार क्षेत्र को एकतरफा रूप से बदलने के अपने फैसले की घोषणा की तो उसका विरोध शुरू हो गया और केंद्र पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने के आरोप लगने लगे. पंजाब की कांग्रेस सरकार और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार का कहना है कि यह अधिसूचना असंवैधानिक है क्योंकि यह कानून और व्यवस्था के मामलों में राज्य को मिले अधिकारों का अतिक्रमण करती है. पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पिछले एक पखवाड़े से अपना विरोध जता रहे हैं. कई लोगों का आरोप है कि भाजपा आलाकमान उन राज्यों में पुलिसिया ताकत हासिल करने के लिए बीएसएफ का उपयोग कर रहा है, जहां वह सत्ता में नहीं है.

वहीं केंद्र का कहना है कि गृह मंत्रालय की यह अधिसूचना केवल कुछ राज्यों में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का 'मानकीकरण' भर करती है. इससे पहले, बीएसएफ के जवान गुजरात की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 80 किमी चौड़ी पट्टी, राजस्थान में 50 किमी चौड़ी पट्टी और असम, पंजाब तथा पश्चिम बंगाल में 15 किमी चौड़ी पट्टी की निगरानी के लिए तैनात थे. अब बीएसएफ के जवान सभी पांच राज्यों में 50 किमी के इलाके की निगरानी करेंगे.

14 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में, टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा:  '(पश्चिम बंगाल) नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ एक लंबी सीमा साझा करता है और जो भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा के 2,164.71 किमी क्षेत्र में फैला है...(गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बाद) राज्य के कुल क्षेत्रफल का करीब 37 प्रतिशत क्षेत्र बीएसएफ के विस्तारित अधिकार क्षेत्र में आ जाएगा और राज्य की कार्यकारी शक्तियों तथा कानून और व्यवस्था बनाए रखने की राज्य पुलिस की क्षमता में हस्तक्षेप करेगा.' उन्होंने गृह मंत्रालय की अधिसूचना को भी असंवैधानिक बताया और कहा कि केंद्र ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने से पहले राज्य सरकार से परामर्श नहीं किया था.

टीएमसी के नेता बीएसएफ के माध्यम से राज्य में केंद्र की बढ़ती पहुंच के राजनैतिक परिणामों को लेकर भी चिंता जता रहे हैं. बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र अब उत्तरी बंगाल के आठ में से छह जिलों में हो गया है. राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे कहते हैं, ''बीएसएफ का नया अधिकार क्षेत्र बंगाल के एक-तिहाई क्षेत्र को कवर करता है—यह बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 50 प्रतिशत के चुनाव को प्रभावित करेगा.'' सब लोगों का आशंका है कि केंद्र की नई पुलिस शक्तियां राज्य के बंटवारे की मंशा से उठे शुरुआती कदम हैं. हालिया अतीत में, भाजपा के कुछ सांसदों ने उत्तरी बंगाल को एक अलग राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बनाने की मांग की थी.

वहीं, बीएसएफ के अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र के 'मानकीकरण' के तर्क पर कायम हैं. वे कहते हैं कि उनकी शक्तियों में कोई वृद्धि नहीं हुई है. नाम न छापने की शर्त पर बीएसएफ पूर्वी क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ''बस अधिकार क्षेत्र का विस्तार हुआ है. बीएसएफ के पास अपराधों की जांच करने की कोई शक्ति नहीं है और उसे संदिग्धों को स्थानीय अधिकारियों को सौंपना पड़ता है. (गृह मंत्रालय की) अधिसूचना जिस नियंत्रण के बारे में बात करती है, वह जरूरत-आधारित होगी. ऐसा नहीं है कि अब 50 किलोमीटर के इलाके में सैनिकों को वर्चस्व बढ़ाने के लिए तैनात किया जाएगा.'' यह सच है कि बीएसएफ के पास वैसी ही शक्तियां है जैसी उसके पास पहले थीं. इसके पास मोटे तौर पर छापेमारी, हिरासत में लेकर प्रारंभिक पूछताछ करने के अधिकार हैं और हिरासत में लिए गए लोगों को 24 घंटे के भीतर राज्य पुलिस को सौंपना होता है. फिर भी, फिलहाल एक केंद्रीय एजेंसी के तौर पर यह राज्य के 37 प्रतिशत हिस्से में एक प्रमुख पुलिस शक्ति बन चुकी है.

पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी ने 15 अक्तूबर को गृह मंत्रालय की अधिसूचना को 'संघीय ढांचे पर सीधा हमला' बताया था और एक ट्वीट करके केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 'इस बेतुके फैसले को तुरंत वापस लेने' की मांग की थी. 25 अक्तूबर को चंडीगढ़ में एक सर्वदलीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने यह दोहराया कि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है और अधिसूचना जारी करने से पहले उनकी सरकार से परामर्श नहीं किया गया था, इसलिए उनकी सरकार अधिसूचना को निरस्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को तैयार है. उन्होंने यह भी कहा कि इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा.

पश्चिम बंगाल में, सौगत रॉय और सुखेंदु शेखर रे जैसे टीएमसी नेताओं ने भी इसे 'संघीय ढांचे पर हमला' करार दिया है. पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में से 10 जिलों के अधिकांश क्षेत्र बीएसएफ के नए अधिकार क्षेत्र में आ चुके हैं. इनमें दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद तथा उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिले शामिल हैं. राज्य के गृह विभाग के अनुसार, इसका मतलब है कि लगभग 50 पुलिस थानों का अधिकार क्षेत्र और बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र आपस में टकराने वाला है. कूचबिहार और दक्षिण दिनाजपुर जिले में तो सभी पुलिस स्टेशन नई अधिसूचना से प्रभावित होंगे; वहीं उत्तरी दिनाजपुर, मालदा और दार्जिलिंग के कुछ हिस्सों में करीब 90 फीसद थानों का अधिकार क्षेत्र प्रभावित होगा.

विपक्षी नेताओं का कहना है कि बीएसएफ का नियंत्रण भाजपा आलाकमान के हाथों में है और उन्हें डर है कि बंगाल को कहीं इसके सांप्रदायिक नतीजे न भुगतने पड़ जाएं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा) के नेता जमीर मुल्ला कहते हैं, ''मालदा में 14 में से नौ और मुर्शिदाबाद में 29 में से 15 थाने अब बीएसएफ के नियंत्रण में होंगे. इन दोनों जिलों में 55 फीसद से ज्यादा मुस्लिम आबादी है.'' उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी कट्टरपंथी गतिविधियों में पहले ही वृद्धि हुई है.

पार्टी के दिग्गज नेता आलोकेश दास एक अन्य डर को लेकर आगाह करते हैं. वे कहते हैं, ''यहां तक कि बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों को भी कभी-कभी धार्मिक समूहों के साथ मंच साझा करते देखा गया है. लोगों की आजीविका प्रभावित होगी. बीएसएफ के पास गिरफ्तारी, जब्ती और छापेमारी की शक्ति है, इसलिए इन जिलों में—जहां अल्पसंख्यक आबादी अधिक है—उत्पीड़न और अनावश्यक नजरबंदी का डर है.''

कुछ लोगों का कहना है कि शक्तियों का दुरुपयोग पहले से ही हो रहा है. टीएमसी के मुखपत्र जागो बांग्ला में लिखे एक कॉलम में, सुखेंदु शेखर रे ने बीएसएफ के ट्रैक रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाया. उन्होंने लिखा कि पिछले पांच वर्षों में निर्दोषों पर हमले के लिए बीएसएफ के लोगों के खिलाफ लगभग 240 मामले दर्ज किए गए थे. बीएसएफ के भ्रष्ट अधिकारियों पर तस्करों के साथ साठगांठ के भी आरोप लगे हैं. नवंबर 2020 में, सीबीआइ ने बीएसएफ के एक कमांडेंट सतीश कुमार को पशु तस्करी और आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया था. उसके भ्रष्टाचार में टीएमसी का एक युवा नेता भी शामिल था.

बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में विस्तार पर टीएमसी और भाजपा के बीच रस्साकशी से जाहिर है कि बात सिर्फ अधिकार क्षेत्र से जुड़े एक विधायी मामले तक सीमित नहीं है. भाजपा नेता दिलीप घोष पूछते हैं, ''बीएसएफ के भ्रष्ट तत्वों के साथ मिलकर टीएमसी के नेता पशु तस्करी कर रहे थे. बीएसएफ के कामकाज का आकलन अब क्या टीएमसी करेगी कि वह ठीक है या नहीं?'' इस जंग के अब अदालत में जाने की संभावना है.

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