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कारोबारः सौंदर्य की नायिका

फाल्गुनी नायर नायका की संस्थापक-सीईओ हैं और भारत में सौंदर्य की भाषा नए तरीके से गढ़ रही हैं. बंपर आइपीओ के बाद एक महिला के नेतृत्व वाला भारत का पहला यूनीकॉर्न अब सभी श्रेणियों में जाने की तैयारी कर रहा है. सौंदर्य की महारानी को अगला बड़ा कदम उठाने में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

फाल्गुनी नायर फाल्गुनी नायर

उनका ओखला में दफ्तर बिल्कुल मोहतरमा की शख्सियत जैसा ही है. न कोई धांसू पेंटिंग, न शानदार फर्नीचर, न तड़क-भड़क, बस कुछ जरूरी-सा सामान और खुला-खुला-सा. उसकी मालकिन फाल्गुनी नायर नवंबर की ठंडी सुबह उसमें पैर रखती हैं तो लहराती फूलदार साड़ी में जो किसी खास मशहूर डिजाइनर की नहीं, साधारण जूती, एक पर्स और जूट के थैले में लंच लिए हैं.

अभी कुछ ही दिन तो हुए कि नायका के चमत्कारी आइपीओ (28 अक्तूबर को लॉन्च और 80 गुना ओवर सब्सक्राइब) आया और 58 वर्षीया नायर को ब्लूमबर्ग की अरबपतियों की सूची में किरण मजूमदार शॉ की जगह भारत की सबसे अमीर खुदमुख्तार महिला के खिताब से नवाजा गया था.

(10 नवंबर को उनकी कंपनी का बाजार मूल्य 14 अरब डॉलर या 1.05 लाख करोड़ रु. आंका गया, जो कोल इंडिया, हिंडाल्को और गोदरेज जैसों से ज्यादा है). हालांकि मोहतरमा नायर इस खिताब को खास तवज्जो नहीं देती हैं, आखिर उनके लिए यह बुलंदी नहीं, बल्कि महज शुरुआत है.

नायर की कहानी एफएसएन ई-कॉमर्स वेंचर्स (नायका की मूल कंपनी) की शेयर बाजारों तहलका मचाने वाली शुरुआत की बदौलत अब जानी-पहचानी है और मीडिया में न जाने कितनी बार दोहराई जा चुकी है. गुजराती परिवार में जन्मीं और अब मुंबई में बस गईं नायर के तो खून में कारोबार दौड़ता है, व्यापार और निवेश की बातें आम पारिवारिक बातचीत का हिस्सा हैं.

उनके पिता उनकी मां की मदद से बियरिंग्स की कंपनी चलाते हैं. वे पढ़ाई-लिखाई में तेज रही हैं और पढ़ाई तथा करियर भी सही दिशा में ही आगे बढ़ा. मुंबई के सिडनहम कॉलेज ऑफ कॉमर्स ऐंड इकोनॉमिक्स में पढ़ाई, अहमदाबाद के भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) से ग्रेजुएशन, जहां वे क्लास ऑफ ’85 में थीं, जिसमें हर्षा भोगले भी थे. उन्होंने करियर की शुरुआत ए.एफ. फर्गुसन से की और 2012 में छोड़ने के पहले तक कोटक महिंद्रा कैपिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर थीं.

नायर ने जब उद्यमी बनने की ओर छलांग लगाने की सोची तो वे उम्र की अर्द्धशतक पार कर चुकी थीं. वे कहती हैं, ''महिला होने के नाते हम दिमाग में अवरोध बैठा लेते हैं कि उद्यमी नहीं बन सकते और प्रोफेशनल करियर में छोटे बच्चों की मां को संतुलन कायम करने में मदद मिलती है. उद्यमी बनने का अर्थ लंबी छलांग लेने और वक्त को लेकर प्रतिबद्ध होने का है. मुझे एहसास था कि 50 वर्ष की होने के पहले मुझे करना है क्योंकि किसी मुकाम पर पहुंचने के लिए कम से कम 8-10 साल तो लगेंगे ही.’’

नायका, एक शुरुआत 
नायका ही नायर के दिमाग में इकलौता आइडिया नहीं था. उन्होंने सौंदर्य उद्योग में जमकर लगने के पहले कई दूसरे क्षेत्रों में भी हाथ आजमाया. उनकी और पति संजय नायर (जिनसे वे आइआइएम में मिली थीं) की फाइनेंस की पृष्ठभूमि (वे निवेश फर्म केकेआर के सीईओ हैं) के चलते फंडिंग की कोई समस्या नहीं थी.

लेकिन निवेशकों और संबंधित ब्रांड वालों को अपने आइडिया के लिए राजी कर पाना अलग बात थी. नायका फैशन की प्रमुख और अपनी मां का दाहिना हाथ, उनकी 32 वर्षीया बेटी अद्वैता याद करती हैं कि सैकड़ों निवेशकों के साथ बैठकें हुईं, जिन्हें उनकी प्रतिबद्ध मां अपने प्रस्ताव की अहमियत नहीं समझा सकीं.

निवेशकों में भरोसे की कमी ने आखिर नायर की प्रतिबद्धता को और मजबूत ही किया. ''इसी से मेरी शुरुआत हुई कि उद्यमियों को दूसरों से कुछ कदम आगे बढ़कर तैयार करना होता है. मैं ऐसा आइडिया साकार करना चाहती थी, जिसमें दूसरों का यकीन नहीं था. अगर हर किसी को एक ही आइडिया पसंद आता तो पहले ही काफी होड़ शुरू हो गई होती.’’

उनसे अक्सर पूछा गया, ''सौंदर्य ही क्यों?’’ नायर कहती हैं, ''यह कारोबार आपको काफी विकल्प मुहैया कराता है और बहुत कुछ अलग करने की जरूरत थी. यूं समझिए कि हैरॉड्स या सैक्स फिफ्थ एवेन्यू में सौंदर्य का कारोबार ग्राउंड फ्लोर पर काफी बड़ी जगह में फैला है, लेकिन इसके उलट भारत में यह किसी कोने में सिकुड़ा है.

खुदरा दुकानें सौंदर्य प्रसाधन के उत्पाद बेचती थीं, लेकिन सैकड़ों खुदरा दुकानों के बावजूद कारोबार सौ करोड़ में नहीं पहुंचा होगा. इसलिए खुदरा दुकानों के लिए कई तरह के उत्पाद रखने में आर्थिक समझदारी नहीं थी. लिहाजा मैंने ई-कॉमर्स का रास्ता चुना क्योंकि वह देश के कोने-कोने में पहुंच जाता है.’’ 

हालांकि, उन्होंने 2012 में ई-कॉमर्स की ओर जाने का फैसला किया, तब उनकी कहानी कामयाब नहीं हुई थी. इस क्षेत्र में पहले कदम बढ़ाने वाला फ्लिपकार्ट अभी पहला ही फंड नहीं जुटा पाया था. लेकिन नायर जानती थीं कि उन्हें क्या चाहिए, यानी इन्वेंट्री आधारित घरेलू मिल्कियत वाला कारोबार. वे कहती हैं, ''हम वेंचर कैपिटलिस्टों को कब्जा सौंपने को तैयार नहीं थे.’’

कारोबारः सौंदर्य की नायिका
कारोबारः सौंदर्य की नायिका

इस तरह शुरू में उन्होंने खुद फंडिंग का फैसला किया. उसके बाद से कंपनी ने फंडिंग के 13 चक्र देखे (देखें आंकड़ों में नायका) और कैटरीना कैफ और आलिया भट्ट जैसे निवेशक आगे आए. लेकिन कंपनी के सूचीबद्ध होने के बाद भी नायर और उनके परिवार के पास 56.7 प्रतिशत शेयर हैं. 

नायर ने ई-कॉमर्स में आगे बढ़ने की रणनीति के बदले ग्राहकों को स्वाभाविक तौर पर अपनी ओर खींचने का फैसला किया. ''हमने गौर किया कि दुनिया भर में सौंदर्य प्रसाधन कैसे बिकते हैं. हमने भारतीय ग्राहकों की विशेष जरूरतों का भी अध्ययन किया और यह भी कि डिजिटल माध्यम से कैसे मुहैया कराया जाए. हमने ग्राहकों की जानकारी के अधिकार को केंद्र में रखा जबकि लोगों ने आगाह किया कि इससे ग्राहक बिदक जाएंगे और यह 20 सेकंड के नियम (खरीद के बाद चेक आउट) के खिलाफ होगा, जिस पर ज्यादातर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म चलते हैं.

लेकिन हम इस बारे में मन बुना चुके थे कि हमारे ग्राहक पूरी जानकारी लें, पांच बार पढें. और फिर चाहे न खरीदें. आखिरकार हमें यकीन हो गया कि ग्राहक अहमियत समझेंगे और खरीदेंगे.’’ नायका का फ्री शिपिंग या डिस्काउंट देने से इनकार भी इसी अपनी ओर खींचने की रणनीति का हिस्सा है. ''गलत रंग की लिपस्टिक डिस्काउंट देकर बेचने से बेहतर है कि पूरी कीमत में सही रंग की लिपस्टिक बेची जाए, क्योंकि गलत रंग खरीदने के बाद ग्राहक नहीं लौटते.’’

अद्वैता कहती हैं, ''हम चर्चा को डिस्काउंट से स्टाइल की ओर ले जा रहे हैं. प्लेटफॉर्मों को ऐसा नजरिया पेश करने की जरूरत है कि ग्राहक सैकड़ों उत्पादों को देख हैरान न हो जाए. मैं टीम से हमेशा कहती हूं कि मुझे यह न बताओ कि कितने ब्रांड भेजे गए, बल्कि यह बताओ कि कितने खारिज किए गए.’’

ढर्रे को तोड़ना
अगला कदम दुनिया भर के दनादन दौरे थे, ताकि ब्रांड कंपनियों को भारत की कथा—जनसंख्या के फायदे और ब्यूटी मार्केट की अब तक न भुनाई गई क्षमता—बताई जा सके और नायका की फेहरिस्त में शामिल किया जा सके. कनाडा के ब्रांड एम.ए.सी. कॉस्मेटिक्स और हुदा ब्यूटी राजी हो गए. ब्रांड कंसल्टेंट तथा रिटेल विशेषज्ञ हरीश बिजूर कहते हैं, ''नायिका ने वर्चुअल बाजार में अच्छे किस्म की दौड़ शुरू की.

अमेजन और फ्लिपकार्ट की दुनिया में नायका ने एक नया एहसास जोड़ा.’’ कंपनी उत्पादन करने वालों से सामान खरीदती और अपने गोदाम में रखती है. वह कारोबार शुरू करने के पांच साल बाद नुक्सान-नफा की बराबरी पर आ पाई और ग्राहकों के लिए कीमत 1,000 रु. से 500 रु. और 300 रु. तक घटा पाई. फिलहाल वह अपने प्लेटफॉर्म पर 4,078 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड वेबसाइट, ऐप, कियोस्क, नायका लक्स, नायका ऑन ट्रेंड पर बेचती है. इसके भुवनेश्वर और रायपुर जैसे टायर-2 और टायर-3 शहरों समेत 40 शहरों में 80 स्टोर हैं.

नायर की कमजोरी यह है कि वे वित्तीय मामले और आंकड़े तो समझती हैं मगर तकनीकी बातों से वाकिफ नहीं हैं. वह वक्त भी आया जब उनका चीफ टेक्नोलॉजी अफसर विदा हो गया और उन्हें नए सिरे से टीम बनानी पड़ी. दूसरी चुनौतियां भी आईं. वे कहती हैं, ''जब ज्यादा ऑर्डर मिलने लगे, हमारे पास ईआरपी (यानी एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग या आपूर्ति शृंखला और खरीद का प्रबंधन) का अभाव था, हमने माल जैसे-तैसे रखा था, उसका पूरा हिसाब नहीं लगा पाते थे.

इसलिए हमें मार्केटिंग बंद करनी पड़ी और पुराने माल को निकालने के चक्कर में दो महीने तक कम ऑर्डर उठाने पड़े.’’ इस तरह नायर को एक अच्छा सबक मिला कि संसाधन वक्त से पहले जुटाओ.

नकल दूसरी समस्या थी. नायका इकलौता ऑनलाइन रिटेलर था, जो लग्जरी ब्रांड विक्टोरियाज सेक्रेट बेचता था, लेकिन उसे कंपनी से संदेश मिला कि जहां से माल खरीदा गया है, वह कंपनी का अधिकृत विक्रेता नहीं है तो नायका ने फौरन उसे वापस ले लिया.
पिछले साल से महामारी दूसरी अग्रिपरीक्षा थी. देश में लॉकडाउन लग गया, सिर्फ जरूरी जिंसों की ही सप्लाइ की छूट थी. नायका ने जरूरी पर्सनल केयर और स्वास्थ्य उत्पाद बेचना शुरू किया.

नायर की ताजा चुनौती बंपर लिस्टिंग के फौरन बाद आई. नायका ने पिछले साल के मुकाबले इस सितंबर की तिमाही में मुनाफे में 1.1 करोड़ रु. या 96 प्रतिशत की कमी दर्ज की. कंपनी के मुताबिक, यह आक्रामक मार्केटिंग और विज्ञापन का नतीजा था: उसका खर्च सितंबर की तिमाही में 286 फीसद बढ़कर 121 करोड़ रु. हो गया जबकि पिछले साल वह 31.5 करोड़ रु. था. उसने राजस्व में पिछले साल के मुकाबले 885 करोड़ रु. यानी 47 फीसद का इजाफा दर्ज किया.

बकौल बिजूर, ''ब्रांड उतना ही अच्छा होता है, जितना उसका मुनाफा. जब ब्रांड विस्तार करता है, तो खासियत खो देता है, तब वह कोई ब्रांड नहीं रह पाता.’’ इसलिए, अब नायर और नायका का फोकस टिकाऊपन पर होगा. इस मामले में उन्हें अपने पुराने बॉस से प्रेरणा मिली. ''मैं उन कामयाब कारोबारी लीडरों से प्रेरणा पाती हूं, जो अपना कारोबार सही दिशा में ले जा पाए. टिकाऊ कारोबार की सीख मुझे उदय कोटक से मिली.’’

आगे का सफर
नायर तैयार हैं. पर्सनल केयर और फैशन उद्योग का कारोबार साल 2025 तक 106 खरब रु. तक पहुंच सकता है. भारतीय सौंदर्य प्रसाधन बाजार 2025 तक 22 खरब रु. का हो सकता है, जो साल 2020 में 11 खरब रु. का था. भारतीय फैशन बाजार भी साल 2025 तक 87 खरब रु. तक पहुंच सकता है, जो 2020 के कैलेंडर वर्ष में 38 खरब रु. का था. यह अनुमान मैनेजमेंट कंसल्टेंट रेडसीअर की रिपोर्ट का है, जिसे नायका ने मार्केट रिसर्च का जिम्मा सौंपा है.

आगे नायका को अपना प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बढ़ाना जारी रखना होगा. उसे ग्राहकों की संतुष्टि और बढ़ती होड़ में अच्छी कीमत तथा भारी डिस्काउंट भी देना होगा. कंपनी लाइफ स्टाइल कैटेगरी में बढ़ रही है और मर्दों के लिए कई प्रोडक्ट लॉन्च कर रही है. बेटी अद्वैता कहती हैं, ''लोग जो दो साल में करना चाहते हैं, हम उसे छह महीने में करना चाहते हैं.’’

फिलहाल तो नायर की सफलता की इस कहानी से दुनिया भर की उन महिला उद्यमियों को शह मिलनी चाहिए, जो फंडिंग हासिल करने या मुकाम तक पहुंचने के लिए दुराग्रहों से मोर्चा ले रही हैं. डेटा ट्रैकर वेंचर इंटेलिजेंस के डेटा से पता चलता है कि 2019 में 150 स्टार्ट-अप को हासिल कुल फंडिंग का सिर्फ 6.5 फीसद ही उनको मिले, जिनकी स्थापना या सह-स्थापना महिला उद्यमियों ने की थी.

कंपनी सूचीबद्ध होने के मौके पर नायर की बातों से उम्मीद जगनी चाहिए: ''मैंने नायका की शुरुआत बिना किसी अनुभव के 50 वर्ष की उम्र में की. मुझे उम्मीद है कि नायका का सफर आप सबको अपनी जिंदगी की नायिका (हीरोइन) बनने की प्रेरणा दे सकता है.’’

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