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कुलभूषण जाधव- भारत और पाक में कूटनीतिक रस्साकशी

यह हैरानी की बात नहीं है, खासकर इस बात को देखते हुए कि जाधव के साथ अहलूवालिया की यह पहली मुलाकात थी. अगला कदम भारतीय नागरिक के लिए कानूनी सहायता और निष्पक्ष सुनवाई पक्का करने का होगा.

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष  भारतीय अधिकारी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष भारतीय अधिकारी

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने जुलाई में पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव की फांसी रोकने की हिदायत दी थी और उन्हें कूटनीतिक पहुंच देने के लिए कहा था. जाधव आतंकवाद, जासूसी और गड़बड़ी करने के आरोप में 2016 से पाकिस्तान की हिरासत में हैं और 2017 में उन्हें एक फौजी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. भारत अलबत्ता कहता रहा है कि उन्हें ईरान से अगवा किया गया था और पाकिस्तान में उनकी मौजूदगी कभी सबूतों के साथ नहीं बताई गई.

इस हफ्ते भारत के उप-उच्चायुक्त गौरव अहलूवालिया और जाधव के बीच आखिरकार मुलाकात हुई. मगर यह भारत के एतराज के बावजूद पाकिस्तानी अफसरों की मौजूदगी में हुई. उन्होंने पूरी कार्रवाई रिकॉर्ड भी की.

भारत ने 1 अगस्त को कूटनीतिक पहुंच की पेशकश यह कहकर खारिज कर दी थी कि इसके नियम और शर्तें वियना संधि की भावना या कूटनीतिक रिश्तों के मुताबिक नहीं हैं. नई दिल्ली ने पाकिस्तानी प्रतिष्ठान की निगरानी के बगैर 'निर्विघ्न' और 'बेरोकटोक' पहुंच की मांग की थी.

कूटनीतिक पहुंच के बारे में वियना संधि के प्रावधान अस्पष्ट हैं. पाकिस्तान कहता है कि जिन नियमों और शर्तों के तहत पहुंच मुहैया की गई, वे इस संधि के अनुच्छेद 36 (1) (सी) का उल्लंघन नहीं करते, जो बस इतना कहता है कि ''कूटनीतिक अधिकारियों को प्रेषक देश के कैद, हवालात या हिरासत में रखे गए नागरिक से मिलने, उसके साथ बातचीत करने और पत्राचार करने का और उसके कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने का अधिकार होगा'', पर यह साफ-साफ नहीं बताता कि प्रेषक देश (भारत) को कूटनीतिक पहुंच किस तरह दी जानी चाहिए.

दरअसल, अनुच्छेद 36 (2) कहता है कि ''इस अनुच्छेद का प्रयोग अभिग्राही देश के कानूनों और नियमों के अनुरूप किया जाएगा'' और अभिग्राही देश इस मामले में पाकिस्तान है. लिहाजा इस्लामाबाद ने जोर दिया कि उसके अफसर मौजूद रहेंगे, मगर वादा किया कि वे कोई दखलअंदाजी नहीं करेंगे. भारत के सूत्रों ने कहा, ''मानवीय तकाजों के चलते भारत ने अपने एतराज दरकिनार कर दिए'' और इसलिए भी कि उन्हें देखना था कि जाधव की शारीरिक और मानसिक हालत कैसी है.

भारत जिस एक बात पर अड़ गया, वह यह थी कि कमरे में किसी फौजी की मौजूदगी नहीं होगी, जिसे पाकिस्तान ने मान लिया. मुलाकात के लिए मौहाल बहुत अच्छा तो नहीं था, पर भारत को काम चलाना पड़ा. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''यह साफ था कि श्री जाधव पाकिस्तान के बेबुनियाद दावों को मजबूती देने के लिए रटी-रटाई झूठी कहानी बयान करने के बेहद दबाव में दिखाई दिए. अपने उप-उच्चायुक्त की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद और यह देखने के बाद कि आइसीजे की हिदायतों का किस हद तक पालन किया गया, हम आगे की कार्रवाई तय करेंगे.''

यह हैरानी की बात नहीं है, खासकर इस बात को देखते हुए कि जाधव के साथ अहलूवालिया की यह पहली मुलाकात थी. अगला कदम भारतीय नागरिक के लिए कानूनी सहायता और निष्पक्ष सुनवाई पक्का करने का होगा. पाकिस्तान को आइसीजे के फैसले का पूरा पालन करने के लिए एक बार से ज्यादा कूटनीतिक पहुंच मुहैया करवानी होगी.

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