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ओडिशाः 'कालिया' की कालिख

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'कालिया' योजना में उभरी गड़बडिय़ों  से राजनैतिक सरगर्मी बढ़ी और विपक्ष हमलावर

मनोज स्वैन मनोज स्वैन

नवीन पटनायक के लिए चुनावी बूटी साबित हुई 'कालिया' (कृषक असिस्टेंस ऐंड लाइवलीहुड फॉर इनकम ऑगमेंटेशन) योजना विवादों में आ गई है. ओडिशा सरकार के कृषि मंत्री अरुण कुमार साहू का बयान आया कि 3.41 लाख ऐसे अपात्र लाभार्थी हैं जिन्होंने इस योजना के करोड़ों रुपए हजम कर लिए.

मंत्री ने इस फर्जीवाड़े का आंकड़ा दिया तो विपक्ष को सरकार पर हमला करने का अवसर मिल गया. नतीजतन, भाजपा और कांग्रेस उच्चस्तरीय जांच की मांग करने लगीं. बीजद सरकार के पैरोकार प्रताप केसरी देव को मीडिया के सामने आना पड़ा. उन्होंने कहा कि अपात्र लोगों की संख्या उतनी नहीं है जितना मंत्री बता रहे हैं. उनकी संख्या 32,000 ही है.

लेकिन पटनायक सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. विधानसभा के अगले सत्र में विपक्ष 'कालिया' को लेकर सरकार को घेरेगा. लाभार्थियों की सूची फाइनल की जा रही है. फर्जी तौर पर रकम लेने वालों से पैसा वापस मांगा जा रहा है. इस बीच दूसरी किस्त खातों में अब तक ट्रांसफर नहीं हुई है.

यह फर्जीवाड़ा पात्र और अपात्र लोगों की छानबीन के बाद सामने आया. ओडिशा सरकार पहली किस्त में 'कालिया' के तहत 51.05 लाख छोटे, सीमांत, खेतिहर किसानों और कृषि मजदूरों को आर्थिक सहायता प्रदान कर चुकी है. इसमें 36.34 लाख छोटे और सीमांत किसानों और 14.70 लाख खेतिहर मजदूरों को पांच हजार रुपए की सहायता दी गई. सरकार की इस महत्वाकांक्षी स्कीम का लाभ खेतिहर और सीमांत छोटे किसानों को नकद मिल रहा है.

यह वर्ग ओडिशा में भाजपा के बढ़ते ग्राफ के बावजूद राज्य में नवीन और उनकी पार्टी का वर्चस्व बनाए रखने में सहायक हुआ. भाजपा को यह एहसास था, तभी उसने चुनाव से ऐन पहले इसके ऐलान पर आपत्ति की और चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी. कालिया का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था. हालांकि अब पता चल रहा है कि योजना का लाभ शीघ्र देने के लिए पात्रता चयन में भी भारी गड़बड़ी हुई. कृषि व किसान कल्याण मंत्री अरुण कुमार साहू ने कहा कि कालिया स्कीम में फायदा लेने वाले अपात्र लोगों को पैसा लौटाना होगा.

मंत्री के बयान के बाद हड़कंप मच गया. भाजपा और कांग्रेस हमलावर हो उठीं. लेकिन नवीन सरकार की नुक्सान भरपाई की कोशिश भी नया विवाद पैदा कर गई. बीजद प्रवक्ता प्रताप केसरीदेव कृषि मंत्री साहू का खंडन करते दिखे. भाजपा महासचिव पृथ्वीराज हरिचंदन कहते हैं कि पूरे प्रकरण में किसान बलि का बकरा बन रहे हैं. कालिया योजना में कुछ तो ऐसा हुआ जिसे राज्य सरकार छिपाने का प्रयास कर रही है. इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने कहा कि चुनावी फायदे के लिए सरकारी खजाने की लूट हुई है.

सूत्रों के मुताबिक, सूची में तमाम सरकारी कर्मचारी, बड़े तथा संपन्न किसान और भारी संख्या में नाबालिगों के नाम तक शामिल कर दिए गए हैं. सरकार ने चेतावनी जारी की है कि सभी अपात्र लाभार्थी भारतीय स्टेट बैंक के संबंधित खाते में योजना में मिले रुपए जमा करें. फिर, 'कालिया' योजना का लाभ लेने वाले करीब 20,000 सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन वगैरह से यह राशि काटी जाएगी.

फर्जी तौर पर 'कालिया' की रकम डकारने वालों में 9,000 तो नाबालिग हैं. इसके अलावा 12,000 बड़े किसान हैं. ये अपात्र हैं. नाबालिगों को मिली राशि की वसूली के लिए उनके परिवार प्रमुखों से कहा गया है. उन्हें इतनी छूट दी गई है कि ये लोग किस्तों मे रकम अदायगी कर सकते हैं. कालिया के विज्ञापन और इसके ऐलान केलिए किसानों की सभा आयोजन पर 50 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. योजना की घोषणा इसी साल 21 फरवरी को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पुरी की विशेष सभा में की थी.

घोषणा से पहले ओडिशा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग के चेयरमैन बलवंत सिंह ने राज्य के सभी 314 ब्लाकों को तीन-तीन लाख रुपए यानी 9.42 करोड़ रुपए रिलीज करने को कहा था. हर ग्रांम पंचायत को किसानों की सुविधा, सूचना, कृषि शिक्षा और संचार की मद में 50,000 रुपए दिए गए. कुल 32.5 करोड़ खर्च हुए. विपक्ष इसे बड़ा घोटाला मान रहा है. अब देखना है, नवीन इसे कैसे संभालते हैं.

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