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जम्मू-कश्मीरः दिखावे का चुनाव

पीडीपी के वरिष्ठ नेता का आरोप है कि भाजपा घाटी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए इन चुनावों का बेजा इस्तेमाल कर रही है. घाटी में भाजपा के पास एक भी विधानसभा सीट नहीं है और न ही लोकसभा सीट.

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निगरानीः बडगाम में 8 अक्तूबर को मतदान केंद्र पर तैनात सुरक्षाकर्मी
निगरानीः बडगाम में 8 अक्तूबर को मतदान केंद्र पर तैनात सुरक्षाकर्मी

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में 5 अक्तूबर को आतंकवादियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के दो कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी. इसके बाद निकाय चुनावों में श्रीनगर के डलगेट वार्ड के 15 उम्मीदवारों में शामिल मुजम्मिल जान ने अपना नाम वापस ले लिया. इस घटना की दहशत चुनाव के पहले चरण के मतदान यानी 8 अक्तूबर तक कायम रही और कुल 84,000 मतदाताओं में से केवल 8.2 प्रतिशत ही वोट देने को बाहर निकले.

हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज नायकू ने 'उम्मीदवारों की आंखों में तेजाब डालकर अंधा' कर देने की धमकी दी है. आतंकवादियों की धमकी के अलावा घाटी के दोनों प्रमुख दलों, एनसी और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के चुनाव के बहिष्कार के कारण भी मतदान का प्रतिशत कम रहा.

पूर्व मंत्री नईम अख्तर ने इसे ''धोखाधड़ी वाला चुनाव जिसमें बाहरी उम्मीदवारों को लोगों पर थोपा जा रहा है'' करार देते हुए कहा कि इससे ''कश्मीरियों के दिलों में भारतीय राज्य के प्रति भरोसा और घटेगा.'' पीडीपी के वरिष्ठ नेता का आरोप है कि भाजपा घाटी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए इन चुनावों का बेजा इस्तेमाल कर रही है. घाटी में भाजपा के पास एक भी विधानसभा सीट नहीं है और न ही लोकसभा सीट. उसका घाटी में कोई आधार ही नहीं है इसलिए वह नगरपालिका चुनावों का इस्तेमाल, पिछले दरवाजे से अपनी जगह बनाने के लिए कर रही है.

घाटी में निकाय चुनावों में अधिकतम सीटें जीतकर भाजपा, अपने पहले प्रयास में ही सात नगरपालिकाओं में बहुमत हासिल कर रही है. आतंकवादियों की धमकी और एनसी-पीडीपी के चुनावों के बहिष्कार की बदौलत भाजपा के 70 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जाएगा. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश अनंतनाग, शोपियां, कुलगाम और पुलवामा जिलों में हैं. ये दक्षिण कश्मीर के वे जिले हैं जो आतंकवाद के गढ़ हैं और जहां भाजपा के कार्यकर्ता कभी पैर रखने की भी हिम्मत नहीं कर पाते.

घाटी के 598 नगरपालिका वार्डों में से 244 में कोई चुनाव नहीं होगा क्योंकि इन सीटों पर सिर्फ एक उम्मीदवार ने पर्चा भरा है. 167 वार्ड ऐसे हैं जहां किसी ने पर्चा नहीं भरा इसलिए इन वार्डों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा. राज्य चुनाव आयोग, पंचायत चुनाव के बाद जनवरी में किसी समय इन वार्डों में 'उपचुनाव' कराने की योजना बना रहा है. एनसी के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने इसे 'जम्हूरियत का मजाक' बताया.

घाटी में निकाय चुनावों को लेकर ज्यादा उत्सुकता रही क्योंकि उम्मीदवारों के नामों की जानकारी मतदाताओं समेत किसी को भी नहीं थी. आतंकवादी खतरों के कारण बहुत ज्यादा गोपनीयता बरती गई और प्रत्याशियों ने वोट मांगने के लिए कोई प्रचार नहीं किया.

वहीं अख्तर कहते हैं, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घाटी का चुनाव, बिना घाटी की भागीदारी के कराने के उसी पुराने कांग्रेसी ढर्रे को अपना लिया है?''

70 भाजपा उम्मीदवार घाटी में निर्विरोध चुने गए क्योंकि एनसी-पीडीपी ने बहिष्कार किया है

 —असित जॉली और मोअज्जम मोहम्मद

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