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फिर बाढ़ का कहर

इस मॉनसून में एक बार फिर भीषण बाढ़ ने असम के जनजीवन को बेहाल कर दिया. उचित नियोजन और प्रबंधन के अभाव में राज्य तकरीबन हर साल इस त्रासदी को झेलने को मजबूर

एएनआइ एएनआइ

असम में 22 जुलाई को जब एक दिन में अब तक के सबसे अधिक कोविड-19 के संक्रमण के मामले की खबर आई, तो ठीक उसी दौरान पूर्वोत्तर का यह राज्य भीषण बाढ़ से भी जूझ रहा था. फिलहाल, असम दोहरी मार का सामना कर रहा है. 22 जुलाई को ही ब्रह्मपुत्र नदी गुवाहाटी में खतरे के निशान से 8 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी. वहीं केंद्रीय जल आयोग ने ब्रह्मपुत्र नदी के जलस्तर में 24 जुलाई की रात को 9 सेंटीमीटर की वृद्धि की आशंका और पलटन बाजार में गंभीर बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी.

राज्य के विभिन्न इलाकों से बाढ़ की चिंताजनक तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं. इनमें स्थानीय लोगों के फंसे होने से लेकर प्रसिद्ध काजीरंगा नेशनल पार्क के जानवरों के भी वीडियो सामने आए हैं. राज्य के कुल 33 जिलों में से 26 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. गोलपारा जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है जहां पांच लाख से अधिक लोगोंका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने 21 जुलाई को असम के बोंगईगांव जिले में एक राहत कैंप का दौरा करने के बाद लिखा, ''असम में मौजूदा बाढ़ की वजह से करीब 24 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 276 राहत कैंप स्थापित किए हैं.'' असम राज्य आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एएसडीएमए) के मुताबिक, 23 जुलाई की शाम तक यह आंकड़ा काफी बढ़ गया. राज्य में हजारों लोगों ने राहत केंद्रों में शरण ले रखी थी और 93 लोगों की मौत हो चुकी थी. (देखें बॉक्स)

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केवल लोगों को ही नहीं बल्कि जानवरों को भी प्रभावित इलाकों से बाहर निकाला जा रहा है और उन्हें राहत केंद्रों तथा अन्य सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है. राहतकर्मियों की ओर से गैंडा के एक बच्चे को रेस्क्यू करने का ऐसा ही एक वीडियो वायरल हुआ. काजीरंगा नेशनल पार्क भी इस बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इसकी वजह से पार्क के करीब 113 वन्य जीव मारे जा चुके हैं, जिनमें एक दर्जन गैंडा और 93 हिरण शामिल हैं. असम में तबाही की खबर विदेश में चिंता का सबब बन गई. ब्रिटेन के प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी केट मिडल्टन ने भी इसको लेकर गहरा दुख जताया. उन्होंने काजीरंगा नेशनल पार्क के डायरेक्टर पी. शिवकुमार को लिखा कि वे पार्क और वन्य जीवों को हुए भारी नुक्सान से दुखी हैं.

पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश की वजह से असम की नदियों में उफान आया हुआ है. केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारी शरत चंद्र कलिता ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र का जल स्तर 19 जुलाई से ही लगातार बढ़ रहा था. केवल गुवाहाटी में ही नहीं, बल्कि इसका जलस्तर डिब्रूगढ़, तेजपुर, गोलपारा समेत अन्य जगहों पर भी खतरे के निशान के ऊपर था. एएसडीएमए के मुताबिक, राज्य की धनसिरी नदी, कुशियारा नदी, कोपिली और संकोश नदी में खतरे के निशान से ज्यादा पानी था, जिससे उसके आसपास के इलाकों में बाढ़ आ गई.

असम के लिए इस तरह की बाढ़ कोई नई बात नहीं हैं. तकरीबन हर साल इस मौसम में इस राज्य को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है. दरअसल, असम ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों के बेसिन में स्थित है. ब्रह्मपुत्र घाटी पूर्वोत्तर की सबसे लंबी घाटियों में शामिल है. एएसडीएमए की एक रिपोर्ट असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र घाटी 5,80,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली है, जिसमें से 70,634 वर्ग किलोमीटर असम में पड़ता है. रिपोर्ट कहती है, ''असम में इस बेसिन की लंबाई पूर्व-पश्चिम दिशा में 1,540 किलोमीटर है और उत्तर-दक्षिण मं इसकी अधिकतर चौड़ाई 682 किलोमीटर है.

इस जियो-क्लाइमेटिक स्थिति की वजह से असम में ब्रह्मपुत्र और बराक नदी के बेसिन में बाढ़ का खतरा बना रहता है.'' रिपोर्ट यह भी कहता है कि बाढ़ के लिए कुछ प्राकृतिक और मानवजनित कारक जिम्मेदार हैं. उसके मुताबिक, इस इलाके में बहुत अधिक डायनेमिक मॉनसूनी बारिश और फिजियोग्राफिक परिस्थिति (प्राकृतिक भूगोल संबंधी) इसकी एक वजह हैं. ब्रह्मपुत्र बेसिन दुनिया में सबसे अधिक पानी छोड़े जाने वाली जगहों में शामिल है. इसके साथ ही इसकी घाटी की सीमित चौड़ाई और अचानक समतलन तथा उतार-चढ़ाव, ये सभी मिलकर बहुत ही ज्यादा पानी निकास की स्थिति पैदा कर देते हैं और नतीजनतन बाढ़ आ जाती है.

एएसडीएमए की यह रिपोर्ट जियो-क्लाइमेट स्थितियों के अलावा ब्रह्मपुत्र नदी के साथ मानवजनित छेड़छाड़ की ओर भी इशारा करती है. रिपोर्ट कहती है, ''मॉनसून में भारी बारिश और ऊपरी वॉटरशेड्स से भारी मात्रा में गाद और मल का लोड बढऩे से बाढ़ की स्थिति आ जाती है. वॉटरशेड्स जियोलॉजिकली अस्थिर होते हैं और वन कटाई तथा भूउपयोग के बदलने से उन्हें नुक्सान पहुंचता है.'' बाढ़ आने के कई और कारक भी हैं. यहां की नदियों के किनारों के कटाव और फिर अनियोजित तरीके से तटबंधों के निर्माण ने भी इसमें योगदान दिया है.

हालांकि बाढ़ से केवल असम ही नहीं जूझ रहा है. बिहार भी बाढ़ से हलकान है और खासकर उत्तरी बिहार में स्थिति चिंताजनक है. 22 जुलाई को राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि राज्य में 10 जिलों के 245 पंचायत के करीब 4.6 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. इससे राज्य में 13,000 लोग अपना घर छोडऩे को मजबूर हुए हैं. राज्य के जल संसाधन विभाग के मुताबिक, कई जगहों पर कोसी, बूढ़ी गंडक और कमला बलान जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. बिहार में अभी से बाढ़ की बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर इस साल भी यहां इसके भीषण होने का खतरा मंडरा रहा है.

फिलहाल, असम के हालात

ज्यादा चिंताजनक हैं. हालांकि मुख्यमंत्री सोनोवाल ने दावा किया कि राज्य में चौबीसों घंटे राहत अभियान चल रहा है और राज्य बाढ़ की इस चुनौती से उबर जाएगा. लेकिन, हर साल आने वाली इस बाढ़ का अब तक कोई ठोस और स्थायी कारगर उपाय नहीं किया जा सका है. वहीं हर साल बाढ़ प्रबंधन को लेकर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं.

असम के राज्यपाल जगदीश मुखी ने बाढ़ के स्थायी और वैज्ञानिक उपाय की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने एक बयान में कहा कि बाढ़ राज्य के सामाजिक-आर्थिक स्थिति को हर साल नुक्सान पहुंचाता है. उन्होंने जोर दिया, ''साल में एक बार (सालाना) इस समस्या पर ध्यान देना उचित नहीं है, मेरी सलाह है कि इसका स्थायी और वैज्ञानिक समाधान तलाशा जाना चाहिए और मैं इसमें मदद के लिए केंद्र से बात करूंगा.''

देशभर में 2007 से लेकर 2017 तक बाढ़ की वजह से 21 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं तो इसी अवधि में देशभर में बाढ़ के कारण ढाई लाख करोड़ रुपए से भी अधिक का नुक्सान हुआ है. अभी असम में राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन बड़े पैमाने पर जान-माल का नुक्सान रोकने के लिए इसका स्थायी समाधान जरूरी है, जिसकी सुध शायद नेताओं को नहीं है.

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