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इरादे के पक्के

 2006 में उस वक्त कमाल हो गया जब गौड़ गंगा-1, गौड़ गंगा-2 और गौड़ गंगा-3 टावर महज तीन दिन में बिक गए.

मनोज गौड़ मनोज गौड़

मनोज गौड़

54 वर्ष  प्रबंध निदेशक, गौर्स ग्रुप्स

क्योंकि पिता बी.एल. गौड़ के छोटे बिल्डर अपार्टमेंट के बिजनेस को 25 साल में रियल एस्टेट का एक बड़ा खिलाड़ी बना दिया. 1994 से शुरू करके अब तक 50,000 यूनिट्स बेच चुके मनोज गौड़ सरकार की ओर से उठाए गए सुधारात्मक कदमों की वजह से रियल एस्टेट के लिए आए कठिन दौर में भी न केवल मजबूती से जमे रहे बल्कि ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर ले गए. 2018 में 10,000 यूनिट बेचकर चार हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया

क्योंकि 2002 में मनोज गौड़ ने सघन आबादी वाले और बेतरतीब बसे इंदिरापुरम की तरफ अपना ध्यान केंद्रित किया. वहां पर उन्होंने गौड़ ग्रीन सिटी जैसी प्रॉपर्टी बनाई.

बस यही उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इसके बाद तो गौड़ ग्रीन एवेन्यू, गौड़ हाइट्स, गौड़ वलेरियो जैस कई सफल प्रोजेक्ट्स की झड़ी लगा दी. 2006 में उस वक्त कमाल हो गया जब गौड़ गंगा-1, गौड़ गंगा-2 और गौड़ गंगा-3 टावर महज तीन दिन में बिक गए

क्योंकि गौड़ ने छह और रियल एस्टेट उद्योगपतियों के साथ मिलकर क्रॉसिंग रिपब्लिक जैसी पहली टाउनशिप बनाई.

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