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जलते जंगल

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद देश के जंगलों में आग लगना जारी है. राज्य का वन विभाग इसके लिए कर्मचारियों की कमी पर दोष मढ़ते है

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दावानलः कितने असुरक्षित हमारे वन दावानलः कितने असुरक्षित हमारे वन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हाल के दिनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं
  • सरिस्का में 29 मार्च को लगी आग से करीब 10 वर्ग किलोमीटर का इलाका नष्ट हो गया
  • वन निगरानी के पद खाली हैं जिससे कानून का पालन कराने में ढिलाई आ रही है

सरिस्का टाइगर रिजर्व में 29 मार्च को लगी आग के साथ ही जंगल में आग लगने का सीजन (नवंबर से जून) अपने चरम पर पहुंच चुका है. आग तीन दिन तक धधकती रही और भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टरों ने 'बंबी बकेट' (हेलिकॉप्टर में लटकती विशाल बाल्टी) से पानी डालकर आग बुझाने के लिए कई उड़ानें भरीं. इस दावानल से करीब 10 वर्ग किलोमीटर का इलाका नष्ट हो गया. सौभाग्य से वन्यजीवों को कोई बड़ी क्षति नहीं हुई हालांकि यहां के 20 बाघों पर खतरा मंडरा रहा था.

शुष्क और पतझड़ के मौसम में जंगलों में आग लगना सामान्य बात है, लेकिन हाल के दिनों में इन घटनाओं की संख्या बढ़ गई है. आग के जोखिम की मैपिंग करती भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआइ) की जनवरी 2022 में जारी 'स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021' में कहा गया है कि 10 प्रतिशत इलाका भारी जोखिम वाला है जबकि 36 प्रतिशत क्षेत्र मध्यम जोखिम का है. मध्य प्रदेश के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर.एन. सक्सेना कहते हैं, ''महुआ बीनने के लिए जमीन साफ करने की खातिर लोग झाड़ियों में आग लगाते हैं, यह मध्य भारत में जंगल में आग लगने का सामान्य कारण है.'' 

वर्ष 2018 में नेशनल ऐक्शन प्लान ऑन फॉरेस्ट फायर्स (एनएपीएफएफ) आने के बाद से एफएसआइ अब जंगल में संभावित आग की टोह लेने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों जैसे तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर रहा है. शाहनगर में नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) में तय सीमा से अधिक तापमान वाले स्थानों की 24 घंटे में छह बार एल्गोरिद्म के माध्यम से उपग्रह से मॉनिटरिंग होती है.

इस आंकड़े को एफएसआइ को भेजा जाता है जो कि संबंधित पक्षों को सटीक लोकेशन के साथ अलर्ट भेजता है. तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद देश के जंगलों में आग लगना जारी है. राज्य का वन विभाग इसके लिए कर्मचारियों की कमी पर दोष मढ़ते हुए कहता है कि वन निगरानी के पद खाली हैं जिससे कानून का पालन कराने में ढिलाई आ रही है.

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