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इंडिया टुडे सफाईगीरी समिट ऐंड अवार्ड: सफाई का संजीदा संदेश

प्रधानमंत्री ने इंडिया टुडे समूह के पहले सफाईगीरी पुरस्कार दिए और इस मौके पर लोकप्रिय गायकों ने सफाई का सुरीला संदेश दिया.

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कई अन्य संगीतकारों की तरह विविध प्रतिभाओं के धनी गायक-संगीतकार-रिकॉर्ड निर्माता पापोन थोड़ा 'निराश' थे. वे गंभीर विषय पर किसी 'बुद्धिजीवी' की तरह बोलने की तैयारी कर आए थे. इसके बदले उनसे वही करने को कहा गया, जो उनसे हर जगह कहा जाता है यानी गाना गाने को.

यह भी गजब का संयोग था कि पापोन पूरे दिन चलने वाले इस आयोजन में बीच में पहुंचे. उनसे पहले दलेर मेहंदी और उदित नारायण ने अपनी कला का प्रदर्शन किया तो बाद में कैलाश खेर, सोनू निगम और शान ने. उस दोपहर और देर शाम तक इन सबके साथ स्वच्छता दूत की एक उपाधि भी जुड़ गई थी. इन सब सुरीली प्रतिभाओं ने मिलकर गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्तूबर को इंडिया टुडे सफाईगीरी अवॉड्र्स में गजब का समां बांध दिया था. कई लोगों को, गायकों को भी यह एहसास नहीं हुआ था, जैसा पापोन एक झटके में कह गए, कि इस गीत-संगीत से स्वच्छता का एक गंभीर और सौम्य संदेश भी निकलेगा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के ऐलान का अनोखा मौका बन जाएगा. इसका समापन नरेंद्र मोदी के हाथों सफाईगीरी अवॉड्र्स को सौंपने के साथ हुआ.

लेकिन इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ ने अपने उद्घाटन भाषण में जैसा कहा, ठीक उसी बात को गायकों ने भी अपने संदेश में दोहराया. और वह बात यह थी कि संगीत तमाम सांस्कृतिक सीमाओं से परे है और यह लोगों में एकता और उत्साह का जबरदस्त संचार कर देता है.

दर्शकों की भीड़ के सामने गाना वाकई दिलेरी का काम है तो दलेर मेहंदी बेशक दिलों के राजा हैं. उन्होंने सफाईगीरी के सलामी गीत ''सफाई की धुन यार मेरे सुन, ओ रब दे बंदे सफाई बड़ा गुन' तो गाया ही, इसके अलावा उन्होंने अपने और भी कई लोकप्रिय गीतों में सफाई का संदेश पिरोकर बढिय़ा माहौल बना दिया. उनका संदेश ''गंदगी की बैन दी, पूरा इंडिया चमक दा...''
दलेर मेहंदी के पेशेवर गायक के रूप में मशहूर होने के काफी पहले, एक शख्स हर वक्त मुस्कुराते चेहरे और आवाज में 'रुमानी गीत-संगीत' का पर्याय बन गया था. साल 1988 का था और गीत था 'पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा' और वह आवाज थी उदित नारायण की. अगले दो दशक तक सिर्फ हिंदी में ही नहीं, 35 भाषाओं में उनकी सुरीली आवाज का जादू चला. मानो यही जताने के लिए उदित नारायण ने सफाईगीरी टेक अवॉर्ड के विजेता राजागोपालन वासुदेवन को सम्मानित करते वक्त तमिल में गाना सुनाया. उनका संदेश सादगी अपनाकर ही वातावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है. वे अभी भी हैचबैक कार ही चलाते हैं. फिर आए पापोन, वे कुछ हैरान-से थे कि उदित नारायण के सुखद रोमांटिक गीतों के बाद बने माहौल में वे फिट बैठेंगे या नहीं. उन्होंने बर्फी! के गीत 'क्यू, न हम तुम चले टेढ़े-मेढ़े से रास्तों पे नंगे पांव रे' से शुरू किया तो दर्शक थिरकने लगे और आधे घंटे से अधिक समय तक बॉलीवुड और बीहू की धुनों पर लोग झूमते और नाचते रहे.
उनका संदेश अपने गृह-राज्य असम पहुंचकर वे अपने—फैंस से, जो खुद को पापोनिस्ट कहते हैं, अपने शहर और गली-मुहल्लों को लगातार साफ रखने में जुटने को कहेंगे.

पापोन की तरह बॉलीवुड और इंडी रॉक संगीत को एक साथ साधने वाले कैलाश खेर ने 'अल्लाह के बंदे', 'सैंया' और 'तेरी दीवानी' जैसे गीतों से सुरीला समां बांध दिया. खेर ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और चंडीगढ़ प्रशासन को क्रमशः सबसे साफ बाजार (कनॉट प्लेस) और गार्डन (रॉक गार्डन) के लिए सम्मानित किया. इन दोनों ही जगहों पर वे प्रस्तुति दे चुके हैं.
उनका संदेश अपने बैंड कैलासा के साथ कुतुब मीनार में एक शो के दौरान वे मीनार की दीवार पर खुरच कर लिखे 'मोहब्बत का पैगाम' देखकर दंग रह गए थे. उन्होंने कहा, ''हम हिंदुस्तानी प्यार करने में बेजोड़ हैं लेकिन ये भावनाएं हमारे घरों के भीतर ही होनी चाहिए.''

खेर के बॉलीवुड से खट्टे-मीठे रिश्ते हैं तो सोनू निगम को तो मायानगरी का दीवाना तब से कहा जा सकता है, जब उनकी मूंछें भी नहीं उगी थीं, यानी वे बालिग नहीं हुए थे. इस आयोजन के कुछ पहले ही उनके गले की खराश ठीक हुई थी इसलिए उनके लिए ऊंचे सुरों में गाना संभव नहीं था. फिर भी सधे स्वर में गाने वाले सोनू ने ऐसा नशा तारी किया कि उनके पिता भी अपने को गजल गाने से रोक नहीं पाए.
उनका संदेश निम्न मध्य वर्ग से आने वाले सोनू निगम ने कहा कि अगर वे ''शौचालय और साफ-सफाई से जुड़ी' जैसी अच्छी आदतें डाल सकते हैं तो शहरों में रहने वाले दूसरे लोगों के लिए भला यह क्यों मुश्किल होना चाहिए.
टीवी पर काउंटडाउन शो के शुरुआती दौर में हिंदुस्तानियों को झूमने पर मजबूर करने वाले शान ने भी सोनू निगम की तरह दर्शकों को 'चार कदम बस चार कदम, चल दो ना साथ मेरे' की धुन पर झूमने का मौका दे दिया.
उनका संदेश ''कोई कहे कहता रहे, भारत में होगी सफाई....''

हिंदुस्तान के शायद सबसे बड़े 'रॉकस्टार' के लिए मंच तैयार था. आखिर वे कुछ ही घंटों की सूचना पर अपने दम किसी भी स्टेडियम या हॉल को खचाखच भर देने की गारंटी जो दे सकते हैं. जैसा कि अरुण पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते वक्त दर्शकों को याद दिलाया, ''देश के सबसे ऊर्जावान, इकलौती फौज, वह शख्स जिसमें हम सबकी सम्मिलित ऊर्जा से भी ज्यादा ऊर्जा है, सीधे बिहार की राजनैतिक रैलियों से यहां पहुंच रहे हैं.'

इंडिया टुडे सफाईगीरी अवॉर्ड के विजेताओं को पुरस्कार सौंपने के बाद मोदी ने पूछा, क्या मीडिया की तेज निगाहों के इस दौर में हमें एहसास है कि गंदगी की वजह से फैली बीमारियों से हर रोज 1,000 बच्चों की मौत हो रही है. उन्होंने कहा कि एक औसत परिवार इन रोगों के इलाज पर करीब 7,000 रु. खर्च करता है, यह पैसा कहीं और खर्च हो सकता था. उन्होंने कहा कि विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 60 करोड़ लोग खुले में शौच करते हैं और यह संक्रामक रोगों के फैलने की सबसे बड़ी वजह है. इसी वजह से स्वच्छ भारत के आह्वान की जरूरत पड़ी. सरकार ने देश भर में 60 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा था. उन्होंने कहा, ''कल मैंने पूछा कि कितने बन गए हैं क्योंकि गांधी जयंती में एक दिन ही बाकी था. मुझे बताया गया कि 95 लाख शौचालय बन गए हैं.''

दर्शकों की तालियों की गडगड़़ाहट के बीच उन्होंने कहा, ''स्वच्छ भारत अभियान महज सरकारी कार्यक्रम रहकर सफल नहीं होगा. अगर यह सिर्फ मोदी का कार्यक्रम बनकर रह जाएगा तो यह शर्तिया सफल नहीं होगा. यह तभी सफल होगा, जब यह हम सबका कार्यक्रम बनेगा.''

सभी अच्छे विचारों की तरह, जो अमूमन किसी अचानक आई सूझ की तरह उभरते हैं, स्वच्छ भारत का नजरिया भी पिछले साल 15 अगस्त को अपनी पूरी समग्रता में नहीं सोचा गया था, जब प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इसका ऐलान किया. मोदी ने कहा, ''मन किया तो बोल दिया. बड़ा जोखिम था.''
बिलाशक यह जोखिम लेना ही चाहिए था और इससे जूझना भी वाकई वाजिब है.

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