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देर से आई भारी बारिश ने सोयाबीन की फसल को किया बर्बाद

देर से आए लेकिन जमकर बरसे बादलों के चलते मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल पूरी तरह बरबाद हुई.

मध्य प्रदेश में देर से आया मानसून सोयाबीन की फसल पर सितम ढा रहा है. कुल उत्पादन में लगभग 70 फीसदी हिस्सेदारी  के साथ मध्य प्रदेश देश में सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य है. यहां, मानसून तय समय से एक माह देर से आया और अब इतनी ज्यादा बारिश हो रही है कि हजारों एकड़ में बोए गए सोयाबीन के बीज सड़ गए हैं. किसानों को खरीफ की फसल में सोयाबीन से खासी उम्मीद रहती है. लेकिन बुआई के बाद धूप न निकलने से बीज पौधों की शक्ल नहीं ले सके और उसके साथ-साथ किसानों की उम्मीदें भी दफन हो गईं.
भोपाल से लगे मिसरोद के किसान बाबूलाल पाटीदार की 20 एकड़ में खड़ी फसल खराब हो गई है. वे बताते हैं, ''बुआई करते ही इतनी बरसात हुई कि सोयाबीन के सारे बीज सड़ गए. अब फसल तो होगी ही नहीं. '' फसल के बरबाद होने से सिर्फ किसानों को ही नहीं, आम लोगों को भी नुकसान उठाना होगा क्योंकि इससे खाद्य तेल महंगा हो सकता है. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयोजक राजेश अग्र्रवाल कहते हैं, ''वैसे तो तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर ज्यादा निर्भर करती है लेकिन फसल खराब होने का असर पड़ेगा. ''
खराब और नकली बीजों की मार
पिछले साल सितंबर में खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल पर बारिश की मार पड़ी थी. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, इससे बीजों की अंकुरण क्षमता 50 फीसदी तक नष्ट हो गई थी. यही बीज इस साल किसानों तक पहुंचे. इंदौर स्थित सोयाबीन अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डॉ. आर.के. श्रीवास्तव कहते हैं, ''इसीलिए किसानों को सलाह दी गई थी कि वे बीजों की अंकुरण क्षमता परखकर ही इस्तेमाल करें. '' राज्य सरकार को बीजों की अंकुरण क्षमता में कमी का अनुमान था इसीलिए उसने मानकीकरण में छूट देते हुए 60 फीसदी अंकुरण क्षमता वाले बीजों के इस्तेमाल की इजाजत दी थी. अब तक यह मानक 70 फीसदी हुआ करता था.
पिछले साल सोयाबीन की फसल 60 लाख हेक्टेयर में लगाई गई थी और उत्पादन 82 लाख टन हुआ था. इस बार कृषि विभाग ने इसका रकबा बढ़ाकर 66 लाख टन कर दिया था. इसके लिए 15 लाख क्विंटल बीजों की जरूरत थी और एक करोड़ टन से ज्यादा उत्पादन का अनुमान था. लेकिन बुआई के लिए सिर्फ 12 लाख क्विंटल बीज ही उपलब्ध हो सके. इसमें से भी बहुत बड़ा हिस्सा खराब निकला. इसी का फायदा उठाकर कुछ कंपनियों ने गैर-मानक बीजों को बाजार में उतार दिया.
नकली बीज किसानों तक न पहुंचे इसलिए प्रदेश सरकार इनकी जांच करवाती है. इस बार भी 130 कंपनियों के बीजों के नमूने की जांच करवाई गई थी जिसमें से 33 कंपनियों के नमूने ही मानक पाए गए. कई कंपनियों के बीजों की, जिन्हें राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था ने स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र दिया था, अंकुरण क्षमता मात्र 8 फीसदी निकली. शिकायत मिलने पर सरकार ने संस्था के प्रबंध संचालक बी.एम. सहारे को निलंबित कर दिया है. इंदौर के कई बीज विक्रेताओं के यहां छापे मारकर अमानक बीजों को जब्त भी किया गया है. सवाल यह है कि फसल की बरबादी के बाद राज्य सरकार की इस सक्रियता से अब क्या हासिल होगा.

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