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100 दिन मोदी-स्वास्थ्य क्षेत्र का इलाज दरकार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंडा पेचीदा और विकासमान है और भारत के बीमार स्वास्थ्य क्षेत्र को सेहतमंद बनाने के लिए राजकाज और नियम-कायदों की मरम्मत जरूरी है

मनीष अग्निहोत्री मनीष अग्निहोत्री

अब तक क्या किया गया

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है और मेडिकल शिक्षा में नए युग का सूत्रपात करने के लिए तैयार है

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन ऐंड रेग्यूलेशन) ऐक्ट 2019 और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स 2012 एक अधिसूचना के जरिए सार्वजनिक पटल पर रख दिए हैं. औने-पौने बिल बनाने और मेडिकल लापरवाही के मुद्दों पर लगाम कसने के लिए इन्हें 11 राज्य और छह केंद्र शासित प्रदेश अपना चुके हैं

हेल्थकेयर सर्विस पर्सोनेल ऐंड क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (प्रोहिबिशन ऑफ वायलेंस ऐंड डैमेज टू प्रॉपर्टी) विधेयक 2019 का मसौदा तैयार है. यह स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े पेशेवरों के खिलाफ हिंसा के कृत्यों को संज्ञेय और गैरजमानती अपराध बनाने की पेशकश करता है.

इसमें स्वास्थ्य कर्मियों (नर्स, दाई, डॉक्टर, मेडिकल छात्र, एंबुलेंस ड्राइवर और सहायकों) को लगी चोटों के लिए और चिकित्सा प्रतिष्ठानों (अस्पताल, क्लिनिक, डिस्पेंसरी, सैनेटोरियम, एंबुलेंस और मोबाइल इकाइयों) की संपत्तियों को पहुंचे नुक्सान या हानि के लिए मुआवजे का प्रावधान है

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए इस साल बजट में 62,659.2 करोड़ रुपए रखे गए हैं—जो पिछले साल से 19 फीसद ज्यादा हैं. इनमें सरकार की ध्वजवाहक बीमा योजना आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाइ) के लिए 6,400 करोड़ रुपए शामिल हैं. इस योजना का मकसद करीब 10.74 करोड़ परिवारों को सेकंडरी और टर्शियरी केयर वाले अस्पतालों में भर्ती होने और इलाज के लिए प्रति परिवार 5 लाख रुपए तक का बीमा कवर देना है

मंत्रालय का एक विवादित कदम सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाताओं के एक काडर का निर्माण करना है, जिन्हें 2022 से शुरू होने वाले 1,50,000 स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों पर रोकथाम और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करने का सीमित लाइसेंस मिलेगा

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय जीनोमिक ग्रिड की योजना का ऐलान किया है जो राष्ट्रीय कैंसर टिश्यू बायोबैंक की तर्ज पर भारतीय कैंसर मरीजों के जीनोमिक डेटा का अध्ययन करेगी

क्या यह पर्याप्त है?

भारत में स्वास्थ्य देखभाल और स्वास्थ्य बीमा, दोनों खराब राजकाज और कमजोर नियम-कायदों के शिकार हैं, जिनके दायरे से 86 फीसद ग्रामीण और 82 फीसद शहरी आबादी अब भी बाहर है और इसलिए इस क्षेत्र को सुधारों की बेहद जरूरत है

देश में डॉक्टरों, नर्सों, सहयोगी स्वास्थ्य कर्मियों और लैब तकनीशियनों की बेहद कमी है और बदकिस्मती से बजट में इसे दूर करने का कोई प्रावधान नहीं है. स्वदेशी टेक्नोलॉजी के विकास की खातिर बुनियादी चिकित्सा विज्ञानों में और दूसरे क्षेत्रों में शोध और विकास की फौरन जरूरत है

और क्या करने  की जरूरत है

स्वास्थ्य मंत्रालय को एबी-पीएमजेएवाइ के तहत 1,300 भारत मेडिकल पैकेजों की कीमतों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि विसंगतियां दूर कर योजना को प्राथमिकता के साथ पूरे देश में शुरू किया जा सके

भारत को 2022 तक डब्ल्यूएचओ के मानदंड के मुताबिक हर 1,000 नागरिकों पर एक डॉक्टर की दिशा में काम करने की जरूरत है. फिलहाल यह अनुपात 1,655 नागरिकों पर एक डॉक्टर है; साथ ही एमबीबीएस सीटों की संख्या 42,000 से बढ़ाकर 1,00,000 करना भी जरूरी है

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