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...और ताव खाएगा सोना

अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी से सोने के बाजार में उथल-पुथल है. वैश्विक बाजार में सोना 1,600 डॉलर प्रति आउंस के पार निकला, जो बीते छह वर्षों का उच्चतम स्तर है

एम. झाजो एम. झाजो

अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी से सोने के बाजार में उथल-पुथल है. वैश्विक बाजार में सोना 1,600 डॉलर प्रति आउंस के पार निकला, जो बीते छह वर्षों का उच्चतम स्तर है. दिल्ली सर्राफा बाजार में बुधवार (08 जनवरी) को सोना 42,080 रु. प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचा. हालांकि, गुरुवार को कीमतों में 1,000 रु. से ज्यादा की गिरावट दिखी.

इस अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का कारण भले हाल में पैदा हुआ भू-राजनैतिक तनाव है. लेकिन बीता साल भी सोने के लिहाज से शानदार रहा, जब  सोने में निवेशकों को करीब 25 फीसद का रिटर्न मिला. विशेषज्ञ मानते है कि सोने की तेजी का यह रुख आगे भी जारी रहेगा.

केडिया कमोडिटीज के प्रबंध निदेशक अजय केडिया कहते हैं, ''सोने की कीमतें मार्च तक 44,000 रु. प्रति 10 ग्राम का स्तर छू सकती हैं. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढऩे की स्थिति में इस साल सोने में 48,000 रु. प्रति 10 ग्राम के भाव देखने को मिल सकते हैं.'' तेजी की इस संभावना के पीछे बड़ी वजह केंद्रीय बैंक और गोल्ड ईटीएफ की ओर से लगातार खरीदारी, रुपए की कमजोरी, शेयर बाजार में मौजूदा स्तर पर जोखिम अधिक होने से सोने की ओर निवेशकों का रुझान वगैहर हैं. गौरतलब है, दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 2019 में रिकॉर्ड 668 टन सोने की खरीदारी की है.

दि बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल कहते हैं, ''सोने के भाव में मौजूदा उठापटक से केवल सटोरियों को फायदा हो सकता है. इस भाव (40,000 के ऊपर) पर सोना खरीदना आम लोगों की पहुंच से बाहर है. इसका असर शादियों के सीजन में हम गिरती मांग के रूप में देखेंगे.'' अभी लोग केवल जरूरत का सोना खरीद रहे हैं या पुराने सोने को बदल रहे हैं. सुस्त पड़े गहनों के कारोबार को सहारा देने के लिए  आगामी बजट में कारोबारी सोने पर आयात शुल्क (12.5 फीसद) में कटौती की मांग कर रहे हैं. हालांकि सरकारी खजाने की मौजूदा हालत को देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही है.

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