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नई सोचः तकनीक की आवाज

फिर भी दो महीने में हमारा बीटा वर्जन तैयार था.'' फिलहाल छह लोगों की टीम एलेक्सा डेवलपर रिवार्स्ड प्रोग्राम के तहत कंपनियों के लिए एलेक्सा स्किल्स का निर्माण कर रही है.

टीम वर्क दिव्यांश चौरसिया (बाएं) और राहुल चौहान टीम वर्क दिव्यांश चौरसिया (बाएं) और राहुल चौहान

मृणि देवनानी

जब दाखिले से जुड़ी पूछताछ के लिए वॉएस ऐप हो तो यूनिवर्सिटी को फोन करने की जहमत भला क्यों? वाएसम्स आवाज पर आधारित स्टार्ट-अप है. इसका आविष्कार गलगोटिया यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा के कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजीनियरिंग के छात्र राहुल चौहान और दिव्यांश चौरसिया ने किया है. एलेक्सा और गूगल असिस्टेंट के लिए कौशलों का निर्माण करते-करते दोनों छात्रों ने कंपनियों को अपने उत्पादों में आवाज की खूबियां जोडऩे में मदद की.

कंपनी 2017 में तब शुरू की, जब उन्हें आवाज से संचालित ऐप के जरिए दाखिले से जुड़े सवालों का समाधान करने का विचार सूझा. इस जोड़ी के योगदान का जिक्र अमेजन की एलेक्सा टीम और गूगल के डेवलपर विशेषज्ञों में किया गया है.

अड़चनों से पार

चौहान कहते हैं, ''हमारा पहला प्रोजेक्ट दो से तीन महीनों में पूरा हो गया. हमारे सामने कई चुनौतियां आईं—टेक्नोलॉजी नई थी, संसाधन मौजूद नहीं थे और डॉक्युमेंटेशन स्तरीय नहीं था. फिर भी दो महीने में हमारा बीटा वर्जन तैयार था.'' फिलहाल छह लोगों की टीम एलेक्सा डेवलपर रिवार्स्ड प्रोग्राम के तहत कंपनियों के लिए एलेक्सा स्किल्स का निर्माण कर रही है. शेरोज उनके सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है और वे अपना उत्पाद इसी साल लॉन्च करेंगे.

चौरसिया कहते हैं, ''हमने नई तकनीकें सीखीं और सीखा कि मिल-जुलकर कैसे काम करें.'' उनके प्रोजक्ट को अब दुनिया भर की कंपनियों की तवज्जो मिल रही है. चौहान भारत से लिए गए 10 एलेक्सा स्टुडेंट एन्फ्लुएंसर्स में से एक हैं, वहीं चौरसिया वॉएसक्स की अगुआई कर रहे हैं.

एक नजर में

वॉएस ऐप स्टार्ट-अप, वॉइसक्स का आविष्कार राहुल चौहान और दिव्यांश चौरसिया ने किया है. यह अन्य कंपनियों के उत्पादों में आवाज आधारित फंक्शन जोडऩे में उनकी मदद करती है.

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