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प्रधान संपादक की कलम से

क्या हम एक नया डिजिटल सवेरा देख रहे हैं या कि ये करंसियां किसी बुलबुले की तरह फट जाएंगी? सरकार को चाहिए कि वह निवेशकों के हितों के संरक्षण के लिए क्रिप्टोकरंसी को नियंत्रित करे

क्रिप्टोकरंसी: नया डिजिटल सवेरा क्रिप्टोकरंसी: नया डिजिटल सवेरा

अरुण पुरी

अगर आप नई सहस्राब्दि पीढ़ी (मिलेनियल या फिर जेन ज़ी) के नहीं हैं तो मुमकिन है क्रिप्टोकरंसी सुनकर आपका माथा चकरा जाए. महामारी ने दुनिया भर में डिजिटल बदलाव को हवा दे दी है. बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी भी उसी बदलाव में से उभरी है. ऑनलाइन लेजर (बही-खाता) और एन्क्रिप्टेड डेटा के जरिए एक डीसेंट्रलाइज्ड सिस्टम सारी जमा-निकासी की जांच-पड़ताल करता है और उसका रिकॉर्ड रखता है. इसे ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी कहा जाता है. तमाम तरह की वित्तीय जमा-निकासी में अमूमन इसी का इस्तेमाल किया जाता है.

कई दशकों से देश में लोग अपनी बचत जमीन-जायदाद या रियल एस्टेट और सोने में निवेश करते रहे हैं. पिछले तीन दशकों से शेयर बाजारों में उछाल ने एक तीसरा रास्ता खोल दिया है. निवेश बैंकर गोल्डमैन सैक्स की एक हालिया रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी ट्रेडिंग वाले सारे शेयरों की कुल कीमत मौजूदा 30 खरब डॉलर से बढ़कर 2024 में करीब दोगुना 50 खरब डॉलर तक पहुंच जाएगी. फिक्स्ड डिपॉजिट पर कम ब्याज दर और रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी के माहौल में महामारी के दौरान निवेशकों का ध्यान चढ़ते शेयर बाजारों की ओर लगा रहा.

बाजार में पैसे की तेज आवक ने भी क्रिप्टोकरंसी के बाजार में भीड़ बढ़ा दी है. वजह साफ है. पिछले दो साल में कीमतों में विस्फोट-सा हुआ है. मार्च 2020 में जब महामारी का प्रकोप शुरू हुआ, एक बिटकॉइन की कीमत 6,483 डॉलर या करीब 4.8 लाख रुपए थी. अब इसकी कीमत 64,862 डॉलर या तकरीबन 48 लाख रुपए है. यानी कीमत में दस गुना बढ़ोतरी हुई. दूसरी क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में भी उछाल दर्ज हुआ है. इस तरह अपना पैसा बढ़ाने को लालायित देश के करोड़ों लोगों ने क्रिप्टोकरंसी की ओर रुख किया है. बिटकॉइन, इथेरियम, बिनांस कॉइन, सोलाना, टीथर, कार्डोनो, एक्सआरपी, पॉलकॉट, डोगेकॉइन और यूएसडी कॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी में 1.5 से 2 करोड़ भारतीयों ने तकरीबन 6 अरब डॉलर (44,400 करोड़ रु.) निवेश किए हैं. दिलचस्प यह है कि सिर्फ खरीद-बिक्री के लिए ही नहीं, देश के लोग क्रिप्टोकरंसी को रियल एस्टेट और सोने की तरह संपत्ति जैसा भी मान रहे हैं.

नैस्कॉम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिप्टो टेक इंडस्ट्री में अब 50 हजार लोग काम कर रहे हैं. यह उद्योग 2030 तक 24.1 करोड़ डॉलर के कारोबार तक बढ़ सकता है, और इससे 8 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. साठ फीसद भारतीय राज्यों ने क्रिप्टो टेक्नोलॉजी को अपना लिया है. 2020 में तमिलनाडु पहला राज्य बना, जिसने सभी सरकारी विभागों और एजेंसियों में ब्लॉकचेन इन्फ्रास्ट्रक्चर पेश किया. सितंबर में महाराष्ट्र सरकार ने आरटी-पीसीआर टेस्ट के नतीजों पर नजर रखने और फर्जीवाड़े से निबटने के लिए दो भारतीय ब्लॉकचेन स्टार्ट-अप्स की मदद ली.

क्रिप्टोकरंसी की शुरुआत 2008 के विश्वव्यापी आर्थिक संकट के बाद वित्तीय लेनदेन के परंपरागत तौर-तरीकों में भरोसा घटने से हुई. उस वक्त एक अज्ञात शख्स ने क्रिप्टोकरंसी की शुरुआत की, जिसे अब बिटकॉइन के नाम से जाना जाता है. लगभग दशक भर तक उसे लेकर तमाम तरह की झिझक और संकोच कायम रहा. भारत में तो उसे संदेह की नजर से देखा जाता रहा. इसकी एक वजह तो यह है कि इसका कारोबार बैंकिंग व्यवस्था के दायरे के बाहर होता है और सरकारी नियंत्रण से दूर है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2018 में क्रिप्टोकरंसी में कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने पिछले साल मार्च में इस प्रतिबंध को हटा दिया. इससे क्रिप्टोकरंसी के कारोबार में तेजी आ गई. इस साल इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में एक कारोबारी टेक्नोलॉजी कंपनी के सह-संस्थापक तथा सीईओ कुणाल नंदवाणी ने क्रिप्टोकरंसी की तुलना किसी बीज से की, ''यानी जितना इसे गाड़ोगे, यह उतना ही उगेगा.''

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में 13 नवंबर को एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें सूत्रों के मुताबिक, क्रिप्टोकरंसी के विज्ञापनों में ''भ्रामक, कहीं ज्यादा का वादा और पारदर्शिता न होने'' के मसले पर विचार किया गया. बैठक में यह भी तय हुआ कि क्यों ''बेलगाम क्रिप्टो मार्केट को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक के लिए पैसा मुहैया करने का साधन बनने की मंजूरी नहीं दी जा सकती.''

सरकार ने क्रिप्टोकरंसी को कानूनी लेनदेन या सामान्य करंसी या मुद्रा बनने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है. इसके बदले बहस इस बात पर है कि क्रिप्टो को संपत्ति या जायदाद की तरह मानकर उसका कारोबार किया जाए. फिर उसे कैसे नियमित/नियंत्रित किया जाए और कैसे उस पर टैक्स लगाया जाए. सरकार जल्दी ही नए नियम-कायदों का ऐलान कर सकती है. शायद संसद के शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरंसी पर व्यापक विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है.

हमारी आवरण कथा 'क्रिप्टो कांटा' के लेखक एग्जीक्यूटिव एडिटर एम.जी. अरुण हैं. इसमें नई उछाल के नफे-नुक्सान और आगे की राह की पड़ताल है. क्या हम एक नया डिजिटल सवेरा देख रहे हैं या कि ये करंसियां किसी बुलबुले की तरह फट जाएंगी? सरकार को चाहिए कि वह निवेशकों के हितों के संरक्षण के लिए क्रिप्टोकरंसी को नियंत्रित करे. निवेशकों को वह पुरानी कहावत याद रखनी चाहिए कि ठोक-बजाकर खरीदो.

अपनी बात करूं तो मेरे मन में क्रिप्टोकरंसी को लेकर हमेशा ही संदेह था. मेरी नजर में यह टेक्नोलॉजी से खेलनेवालों का खेल भर था. मेरे सामने यह सवाल हमेशा बना रहा कि क्या क्रिप्टोकरंसी आपके बैंक खाते में नकदी में बदल सकती है? हाल में एक लड़के ने मेरे सामने इस ट्रांजैक्शन को करके दिखाया. तब मैंने खुद से कहा कि यह तो असली है और इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए मैंने दो क्रिप्टोकरंसी में छोटा-मोटा निवेश किया. अगर यही भविष्य है तो मैं इसका हिस्सा बनना चाहता हूं.

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