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प्रधान संपादक की कलम से

डेटिंग का तरीका बुनियादी तौर से बदल गया है. महामारी का दुस्वप्न जब खत्म होगा, इस दौर में हासिल हुए भावनात्मक जुड़ाव और हमदर्दी की अहमियत शायद तब भी बनी रहेगी. यह अच्छा संकेत होगा

17 फरवरी, 1999 का आवरण; 29 जून, 2016 का आवरण 17 फरवरी, 1999 का आवरण; 29 जून, 2016 का आवरण

अरुण पुरी

मनुष्य सामाजिक प्राणी है. संग-साथ के बिना कैसे रहेगा! शारीरिक और मानसिक अंतरंगता की मानवीय चाहत आदिम जमाने से है. रिश्ते ही हमें और हमारी जिंदगी को परिभाषित करते हैं. पिछले 75 सालों की सबसे भीषण वैश्विक महामारी कोविड-19 ने इनसान के शरीर और मन पर बुरा असर डाला, उनके आपसी रिश्तों को भी उतनी ही गहराई से प्रभावित किया. पिछले साल दुनिया के शायद सबसे कठोर लॉकडाउन में हम अपने घरों में बंद हो गए और एक दूसरे से सामाजिक दूरी बना ली. कहर रिश्तों पर टूटा.

एक लोकप्रिय डेटिंग ऐप के वैश्विक सर्वे से पता चला कि इसमें शामिल 48 फीसद लोगों का अपने साथी के साथ अलगाव हो गया या उन्होंने मिलना बंद कर दिया और जनवरी 2020 के बाद किसी से संबंध नहीं बनाया. इनमें जेनरेशन जेड या नई सहस्त्राब्दि के आसपास जन्मी और हाल के सालों में जवान हुई पीढ़ी के लोग 53 फीसद थे. जब लॉकडाउन में ढील दी गई, तो एक नया डर हावी हो गया. एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुनिया भर में किए गए अध्ययन से पता चला कि इसमें शामिल अधिकांश लोग नए रिश्तों को लेकर जितने रोमांचित थे उतने ही सशंकित भी थे.

मगर तकनीक ने फिर राह दिखाई. पिछले साल 30 मार्च को महामारी पर हमारी पहली आवरण कथा 'कोरोना के दौर में जिंदगी' पर मैंने लिखा था कि तकनीक और इंटरनेट से निर्मित तंत्र ने किस तरह इस आपदा की तकलीफों को कम करने में अनिवार्य भूमिका अदा की थी. बीते डेढ़ साल में महामारी की वजह से डिजिटल कायापलट की रफ्तार तेज हो गई है. घर से काम और वीडियो कॉल अब सामान्य हो गए हैं. यह डिजिटल जीवन अब तय कर रहा है कि लोग किस तरह एक दूसरे से मिलते हैं. ऑनलाइन डेटिंग पहले भी होती रही है, लेकिन अब कोविड और ऐप की भरमार ने डेटिंग का खेल बदल दिया है. फोन पर साथ नेटफ्लिक्स देखना, पार्टी के ऐप और यहां तक कि वीडियो डिनर डेट भी सामान्य हो रहे हैं. इसे डेट फ्रॉम होम या घर से डेटिंग कहा जा सकता है.

मार्च 2020 में एक लोकप्रिय डेटिंग ऐप ने 24 घंटों के भीतर दुनिया भर में 3 अरब स्वाइप दर्ज किए, जो एक दिन में उसके सबसे ज्यादा स्वाइप थे. एक अन्य डेटिंग ऐप के अनुसार मार्च से मई 2020 के बीच पूरी दुनिया में डेटिंग में 700 फीसद का इजाफा हुआ. एक तीसरे ऐप ने दुनिया भर में वीडियो कॉल में 70 फीसद की उछाल दर्ज की. ब्लाइंड डेट या अजनबियों के साथ डेटिंग के दिन अब पीछे छूटते दिखाई देते हैं. एक डेटिंग ऐप के सर्वे से पता चला कि 72 फीसद अविवाहित हिंदुस्तानी अब सोचते हैं कि रू-ब-रू मिले बिना ऑनलाइन किसी के प्यार में पड़ जाना अब मुमकिन है.

नए रुझानों से जाहिर होता है कि वन नाइट स्टैंड या एक रात के दैहिक रिश्तों की बजाय जरूरत ज्यादा वफादार और मजबूत रिश्तों की है. डिजिटल डेटिंग के क्षेत्र में महिलाएं कहीं आगे हैं और जाहिर है कि इसकी वजह उनकी अपनी सुरक्षा भी है क्योंकि मुलाकात के लिए निकलने से पहले वे वर्चुअल माध्यम से बात कर सकती हैं. पारदर्शिता और प्रामाणिकता पर जोर अब अधिक है. ऑनलाइन डेटिंग अपना व्याकरण लेकर आई है. कुछ नए शब्द हैं, मसलन एफओडीए या फोडा यानी 'फियर ऑफ डेटिंग अगेन' या फिर डेट करने का डर; 'हार्डबॉलिंग' यानी अपने इरादों के बारे में ईमानदार होना; 'क्वारंटीन बेइ' यानी महामारी के दौरान संबंध, और 'जम्प्ड' यानी जूम पर डंप कर देना या छोड़ देना.

हमारी आवरण कथा 'डेटिंग के नए नियम' इस बात की पड़ताल करती है कि डेटिंग के इस नए संसार में अविवाहित लोग क्या चाहते हैं. यह सोनाली आचार्जी ने लिखी है. स्थितियों के धीरे-धीरे सामान्य होने के साथ डेटिंग का भविष्य क्या होगा? भारत के एक ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म के एक अध्ययन से पता चला कि वीडियो डेटिंग का दौर लंबा चलने वाला है. उसके 39 फीसद यूजर ने कुबूल किया कि 2021 में पहली डेट के विकल्प के तौर पर वे वीडियो डेट में संभावना तलाश रहे थे. डेटिंग का तरीका बुनियादी तौर से बदल गया है. महामारी का दुस्वप्न जब खत्म होगा, इस दौर में हासिल हुए भावनात्मक जुड़ाव और हमदर्दी की अहमियत शायद तब भी बनी रहेगी. यह अच्छा संकेत होगा.

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