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प्रधान संपादक की कलम से

शेरगिल फलांगती ओटीटी कार्यशाला का बयान कुछ इस तरह करती हैं, ''अनेक प्रोजेक्ट कतार में हैं. लेखन लगातार जारी है, कितने ही अनुभवी और नए-नवेली आवाजें अपनी जगह तलाशती और काम लेकर आ रही हैं.''

15 नवंबर, 1992 का आवरण और 19 जुलाई, 2000 का आवरण 15 नवंबर, 1992 का आवरण और 19 जुलाई, 2000 का आवरण

अरुण पुरी

हमने अंग्रेजी इंडिया टुडे के 31 मई, 1984 के 'बड़े बजट के बादशाह' शीर्षक वाले अंक में बॉलीवुड की तीन सबसे कामयाब शख्सियतों-निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की तस्वीरें कवर पर छापी थीं. यह तिकड़ी दुनिया के सबसे बड़े फिल्मोद्योग में बड़े बजट की फिल्मों और तड़क-भड़क वाले सेट के बेजोड़ दबदबे का आईना थी. टेलीविजन अभी जमीन तलाश रहा था और मोबाइल और इंटरनेट अपने शैशवकाल में थे.

करीब चार दशक बाद 4जी कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और माकूल कंटेंट से भारतीय मनोरंजन जगत में एक नया विस्फोट हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों-कस्बों के गैंगस्टर से लेकर उलटे-पलटे शहरी रोमांस, स्त्री-उत्पीड़न और ऐतिहासिक कथानक शामिल हैं. ये सभी शो इंटरनेट के जरिए और आपके स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्ट टीवी (एक और प्लेटफॉर्म 'ओवर द टॉप' या ओटीटी) पर उपलब्ध हैं. दर्शकों के लिए मनोरंजन का कमोबेश वैसा ही कारून का खजाना खुल गया, जैसा हमने तीन दशक पहले सैटेलाइट टीवी और लोकप्रिय धारावाहिकों के आगाज के दौर में देखा था.

पिछले साल महामारी की वजह से लॉकडाउन के दौर में सिनेमाघरों के फाटक बंद हुए और लोग घरों में कैद हुए तो ओटीटी पर दर्शकों की संख्या करीब तिगुनी हो गई. मार्च 2021 में ईवाइ-फिक्की की रिपोर्ट के मुताबिक, ओटीटी ग्राहक 2019 में 1.05 करोड़ से 2020 में 2.8 करोड़ हो गए.

ओटीटी का आगाज भारत में हुआ तो उसे खासकर बाकी वैश्विक कंटेंट-हॉलीवुड फिल्मों और हाउस ऑफ का काड्रर्स, नार्कोस और गेम ऑफ थ्रोन्स जैसे मौज-मस्ती वाले शो के लिए ही जाना जाता था. उसमें स्थानीय कथानकों की चाशनी ने समूचे देश में उसकी दीवानगी पैदा कर दी और मनोज बाजपेयी, पंकज त्रिपाठी जैसे निपट नए सितारों को जन्म दिया और सैक्रेड गेम्स, द फैमिली मैन, मिर्जापुर और स्पेशल ऑप्स जैसे शो नमूदार हुए. भारत में तकरीबन 40 ओटीटी प्लेफॉर्म हैं और धुआंधार लोकप्रियता का फायदा उठाने कुछ और आने को हैं. अनुमान है कि 2020 में उन पर 1,200 घंटे के मौलिक कंटेंट दिखे और उम्मीद है कि यह दोगुना होकर 2023 तक 3,000 घंटे सालाना हो जाएगा. यह भी आंका गया है कि 2021 में ओटीटी प्लेटफॉर्म कंटेंट पर 1 अरब डॉलर (करीब 7,300 करोड़ रु.) का निवेश करेंगे. यह घटनाक्रम इस वक्त की बुलंदी जैसा है.

आकलन है कि 2021 में भारत में स्मार्टफोन वालों की तादाद 76 करोड़ पहुंच जाएगी, जो चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर होगी. आश्चर्य यह है कि परदे का आकार कोई मायने ही नहीं रखता क्योंकि भारत में तकरीबन 70 फीसद लोग मोबाइल पर ही वीडियो देखते हैं. इसमें यह भी जोड़ लें कि स्मार्टफोन की कीमतें लगातार गिर रही हैं. यही नहीं, भारत में इंटरनेट का डेटा सबसे सस्ता है, कई लोग केबल टीवी कनेक्शन कटवा कर 'कॉर्ड नेवर्स' की नई पीढ़ी की ओर बढ़ रहे हैं.

ओटीटी हर उम्र-वर्ग, स्त्री-पुरुष, पसंद के लिहाज से विविध कंटेंट से बड़े खजाने की पेशकश कर रहा है. यहां भाषा भी बेलगाम है. डब की गई या सबटाइटल वाले शो देखना पहले ही हमारी आदत में शुमार हो चुका है. अनुमान है कि 2025 तक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बिताए कुल वक्त में क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट की खपत 50 फीसद बढ़ जाएगी और अगली बढ़ोतरी दूसरे और तीसरे दर्जे की शहरों में होगी. ऑनलाइन शो देखने में आए इस उछाल ने रचनात्मक प्रयोगों की भी सूनामी पैदा कर दी है.

बॉलीवुड के बड़े नाम भी अब ओटीटी कंटेंट की ओर मुड़ रहे हैं और बड़े फिल्मी सितारे भी लहर पर सवार होने लगे हैं. इससे कंटेंट निर्माण का एक नया व्याकरण तैयार हो रहा है क्योंकि उसका मकसद मौज-मस्ती के शो पेश करना है. कुछ कंटेंट तो सीमाएं लांघ रहे हैं और कंटेंट पर नियम-कायदे लादने की मांग उठ रही है क्योंकि ये सेंसरशिप बोर्ड के तहत नहीं आते. इंडस्ट्री इस दिशा में संगठित हो रही है.

लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफॉर्म में तीन नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और आल्टबालाजी ने चार साल में 150 वेब शो और 90 फिल्में पेश कर दी हैं. दिलचस्प यह है कि उन सभी के रचनात्मक विभाग की मुखिया महिलाएं हैं. अमेजन प्राइम वीडियो में इंडिया ओरिजनल्स की प्रमुख अपर्णा पुरोहित, नेटफ्लिक्स में कंटेंट वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल और बालाजी टेलीफिल्म्स की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एकता कपूर की तिकड़ी भारतीय दर्शकों का स्वाद बदल रही हैं. ये ताकतवर महिलाएं कमाई का ऐसा साम्राज्य खड़ा कर चुकी हैं, जो उनके समकालीन फिल्म निर्माता सपने में भी नहीं सोच सकते. हर रोज उनके सामने ऐसे प्रस्तावों के ढेर लग जाते हैं, जो उनसे अपने कंटेंट तैयार करने की मांग करते हैं.

हमारी आवरण कथा 'मनोरंजन की मलिकाएं' इस बड़े बदलाव की कथा है, जिसे सीनियर एडिटर सुहानी सिंह ने लिखा है. ग्रुप फोटो एडिटर की फोटो शूट के लिए पहली बार शेरगिल, कपूर और पुरोहित एक साथ खड़ी हुईं. शेरगिल फलांगती ओटीटी कार्यशाला का बयान कुछ इस तरह करती हैं, ''अनेक प्रोजेक्ट कतार में हैं. लेखन लगातार जारी है, कितने ही अनुभवी और नए-नवेली आवाजें अपनी जगह तलाशती और काम लेकर आ रही हैं.'' वाकई यह हम सबके लिए खुशखबरी है. देखिए और मजे लूटिए!

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