scorecardresearch
 

प्रधान संपादक की कलम से

अर्थव्यवस्था लंगड़ाती हुई सामान्य होने की कोशिश कर रही है मगरहमें काफी मेहनत और कोशिश करनी होगी. पटरी पर वापसी कैसी होगी, यह बहुत हद तक सरकारी नीतियों, सुधारों की दिशा और सरकारी दखल की मात्रा पर निर्भर करेगी.

9 सितंबर, 2020 का आवरण 9 सितंबर, 2020 का आवरण

अरुण पुरी

छह महीने पहले देश में कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने के लिए दुनिया में सबसे सख्त लॉकडाउन लगाया गया. इससे थोड़े समय के लिए संक्रमण थामा तो जा सका लेकिन ऐसा आर्थिक संकट छाया, जो वायरस की तरह ही तेजी से चारों ओर पसर गया. दो कारोबारी तिमाहियों के बाद, हम संक्रमण के 56 लाख मामलों और 90,000 मौतों के साथ न सिर्फ दुनिया में दूसरे नंबर के सबसे ज्यादा संक्रमण वाले देश हैं, बल्कि जी-20 देशों की अर्थव्यवस्थाओं में भी सबसे बुरे हाल में हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, भारत की वृद्धि दर इस पूरे वित्त वर्ष में -4.5 फीसद रहेगी. जाहिर है, 2020 भयावह वर्ष है, जैसा हाल में देखा नहीं गया. आर्थिक वृद्धि के तीनों प्रमुख इंजन—घरेलू खपत, सरकारी खर्च और निजी निवेश बैठ गए हैं.


समस्या की गंभीरता और अर्थव्यवस्था की दशा को समझने के लिए हमने सभी प्रमुख क्षेत्रों का जायजा लिया. हमारा मकसद यह देखना था कि क्या हर क्षेत्र को कुछ खास उपायों की जरूरत है. हमने यह जानने के लिए अर्थव्यवस्था का एक मोटा सर्वे किया. हमारी आवरण कथा 'आशा और हताशा' को एग्जीक्यूटिव एडिटर एम.जी. अरुण ने कलमबंद किया है. यह उन 17 क्षेत्रों को जायजा लेती है, जो अर्थव्यवस्था की गाड़ी को सरपट दौड़ाए रहते हैं. ये क्षेत्र हैं-मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल उद्योग, खुदरा व्यापार, उपभोक्ता सामान, शिक्षा, उड्डयन, खिलौने, स्वास्थ्य सेवा, दवा उद्योग, परिवहन और लॉजिस्टिक, बेशकीमती नग और जेवरात, जूते-चप्पल, कपड़ा और परिधान, यात्रा और पर्यटन, और मनोरंजन. हमारे संवाददाताओं ने देश भर में इनमें हर क्षेत्र को देखा-जांचा-परखा कि वे हमारी परेशानी के पैमाने पर कहां बैठते हैं. यानी भारी मुसीबत, मामूली मुसीबत या कोई परेशानी नहीं के तीन खांचे में कहां बैठते हैं.


उन्होंने पाया कि देश के 31 फीसद कार्यबल को रोजगार और सकल मूल्य संवर्धन में 55 फीसद की हिस्सेदारी रखने वाला सेवा क्षेत्र भारी मुसीबत में है. आवभगत और उड्डयन जैसे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हैं. हमारे घरेलू एयरलाइनों की कमाई अप्रैल-जून 2019 में 25,517 करोड़ रु. से घटकर अप्रैल-जून 2020 में 3,651 करोड़ रु. रह गई. भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) का आकलन है कि होटल उद्योग 1.4 लाख करोड़ रु. का नुक्सान उठाएगा.
दूसरे, बेशकीमती नग और जेवरात के कारोबार में आधी कमाई भी नहीं दर्ज हो पा रही है. यह क्षेत्र भी 48 लाख लोगों को रोजगार और जीडीपी में 3.1 फीसद का योगदान देता है. इन कहानियों के पीछे ऐसी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था है, जो रोजगार जाने, वेतन कटौती और आजीविका छिनने से सहमी हुई है.


जीडीपी में 4.33 फीसद की हिस्सेदारी रखने वाला 8.8 लाख करोड़ रु. कारोबार वाला रियल एस्टेट क्षेत्र कोविड-19 के दौर के पहले से ही खाली पड़े मकानों और खरीदारों की कमी से जूझ रहा है. यह क्षेत्र देश के सात बड़े शहरों में इस साल की पहली छमाही में बिक्री में 49 फीसद गिरावट झेल रहा है. 8.7 लाख करोड़ रु. वाले वाहन उद्योग में अप्रैल जैसा महीना कभी नहीं बीता, जब बिक्री शून्य हुई. उद्योग के एसोसिएशन 25-40 फीसद की नकारात्मक वृद्धि की आशंका जता रहे हैं. हालांकि उम्मीद की किरण इसमें दिख रही है कि लोग सार्वजनिक वाहनों के बदले निजी वाहनों में सफर करना पसंद कर रहे हैं. इससे 1.91 करोड़ रोजगार और जीडीपी में 4.28 फीसद का योगदान देने वाले इस उद्योग में जान लौट सकती है.

ऐसी मायूसी के आलम में कुछ क्षेत्रों में उजियारा भी चमका है. ये वे क्षेत्र हैं जो लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के दौर में फले-फूले. मसलन, महामारी ने ई-शिक्षा के लिए भारत को अमेरिका के बाद दूसरा बड़ा देश बना दिया. उम्मीद है कि यह क्षेत्र 2021 तक 95 लाख उपभोक्ताओं के साथ 14,479 करोड़ रु. कमाई करने लगेगा. ई-कॉमर्स लोगों के बाहर निकलने से डरने की वजह से बढ़ा. अब कयास है कि अगले चार साल में यह क्षेत्र तीन गुना बढ़कर 7.4 लाख करोड़ रु. का हो जाएगा. स्वास्थ्य सेवा बाजार भी 2022 तक तीन गुना बढ़कर 8.6 लाख करोड़ रु. का हो जाएगा.


लेकिन ये आशा की किरणें थोड़ी और दूर की लगती हैं. अर्थव्यवस्था लंगड़ाती हुई सामान्य होने की कोशिश कर रही है मगर उस पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा रहे हैं. और राय किस कदर बंटी हुई है, वह अर्थशास्त्रियों और कारोबारियों के उन अनुमानों से पता चलता है कि कैसे अर्थव्यवस्था में जान लौटेगी. हर कोई अंग्रेजी के अक्षरों में संकेत दे रहा है.


इन संकेतों को देखिए:

V : तेज वापसी

L : लंबी मंदी

U : धीरे-धीरे सुधार

W : उथल-पुथल का दौर

K : कुछ बढेंग़े और कुछ में गिरेंगे

अब इसमें मुझे अपना Z जोड़ लेने दीजिए. मेरी भविष्यवाणी यह है कि कोरोना के संक्रमण जैसे बढ़ेंगे और आंशिक लॉकडाउन लागू किए जाते रहेंगे, अर्थव्यवस्था ऊपर-नीचे जाती रहेगी. सरकारी नीतियां टुकड़े-टुकड़े में बन रही हैं, यानी आर्थिक वृद्धि का कोई पैटर्न नहीं है. आखिर में अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी.


हमें V के आकार वाली पटरी पर वापसी चाहिए. हमें काफी मेहनत और कोशिश करनी होगी. पटरी पर वापसी कैसी होगी, यह बहुत हद तक सरकारी नीतियों, सुधारों की दिशा और सरकारी दखल की मात्रा पर निर्भर करेगी.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें