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टक्कर देते सोरेन

सोरेन कहते हैं कि उनके पास सीबीआइ या ईडी जैसी एजेंसियों से डरने की कोई वजह नहीं है

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खुली चुनौती : ईडी के समन पर नहीं पहुंचे सोरेन
खुली चुनौती : ईडी के समन पर नहीं पहुंचे सोरेन

अमिताभ श्रीवास्तव

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन क्रिकेटर नहीं रहे हैं, लेकिन बढ़ती कानूनी चुनौतियों से बचने की कोई जगह न रह जाने पर अब वे फ्रंट फुट पर खेलने की रणनीति अपना रहे हैं. वही रणनीति जो कोई आदर्श टी-20 बल्लेबाज गेंद के अनपेक्षित स्विंग को बेअसर करने के लिए अपनाता है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से कथित खनन घोटाले में पूछताछ के लिए नए समन जारी किए जाने के ठीक एक दिन बाद, बीते 11 नवंबर को उनकी यह रणनीति एक बार फिर दिखी. उन्होंने दो ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जिनसे उनकी लोकप्रियता बहुत बढ़ जाने की उम्मीद थी.

इनमें से एक झारखंड में नौकरियों में आरक्षण का स्तर बढ़ाकर 77 प्रतिशत करने से संबंधित है, जबकि दूसरा विधेयक अधिवास की स्थिति और स्थानीय निवासी के रूप में चिह्नित करने की पात्रता निर्धारित करने के लिए वर्ष 1932 को निर्धारक वर्ष बनाता है. इस कदम से साफ है कि कानूनी चुनौतियों से निबटने के लिए उनकी रणनीति राजनीतिक कदम के दम पर असमंजस की स्थिति बनाकर  बढ़त हासिल करने की है. 

ईडी के समक्ष पूछताछ के लिए 3 नवंबर को पेश होने के पहले समन पर सोरेन यह कहते हुए हाजिर नहीं हुए थे कि केंद्रीय एजेंसी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है. ईडी को खुद गिरफ्तार करने की चुनौती देते हुए सोरेन ने कहा था कि कोई वजह नहीं है कि वह ईडी या सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों से डरें. 11 नवंबर को उन्होंने कहा, ''हम जेल से भी भाजपा का सफाया कर देंगे.'' 

झामुमो के एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि अगर ईडी सोरेन को गिरफ्तारी करता है या राज्यपाल रमेश बैस चुनाव आयोग की कथित सलाह के अनुसार उन्हें अयोग्य ठहराने की सिफारिश करते हैं, तो इसेलिए भी सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन के पास वैकल्पिक योजना है. झामुमो के इस अंदरूनी सूत्र का कहना है, ''हम तुरंत न्यायिक राहत की मांग करेंगे. वैकल्पिक रूप से सोरेन अपनी पत्नी कल्पना, मां रूपी या पिता शिबू सोरेन को कामचलाऊ उत्तराधिकारी बना सकते हैं. गठबंधन के सभी विधायकों से संभावित सीएम उम्मीदवारों के समर्थन के पत्र भी ले लिए गए हैं.''

ईडी झारखंड में अवैध खनन के मामलों में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए सोरेन से पूछताछ करना चाहता है. जुलाई में गिरफ्तार किए गए सोरेन के राजनीतिक सहयोगी पंकज मिश्रा के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के अलावा एजेंसी ने रांची की एक विशेष अदालत को सूचित किया है कि खनन घोटाला अनुमानत: 1,000 करोड़ रुपए का है. आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मनरेगा फंड के कथित दुरुपयोग से संबंधित मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार करने के बाद ईडी ने अवैध खनन की तरफ रुख किया था.

ईडी की जांच सीएम आवास तक पहुंचने की आशंकाओं के बीच सोरेन दोनों विधेयकों पर तेजी से आगे बढ़े हैं. उन्हें पता है कि इन विधेयकों के कानून बनने के बाद भी अदालत में चुनौती दी जा सकती है, जब तक कि केंद्र इन कानूनों को नौवीं अनुसूची में शामिल करके न्यायिक जांच के दायरे से परे न कर दे. अगर केंद्र सरकार ऐसा नहीं करती है, तो इससे सोरेन को भगवा पार्टी के खिलाफ लोगों में नाराजगी भड़काने का मौका मिलेगा.  कार्यकाल में दो साल से अधिक समय शेष है और सोरेन कठिन स्थिति में फंसे हैं. उन्हें अयोग्य ठहराए जाने की संभावना बनी हुई है और ईडी के समन को हमेशा टाला नहीं जा सकता. लेकिन, यह स्पष्ट है कि सोरेन कड़ी टक्कर दिए बिना हार नहीं मानेंगे. 

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