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100 दिन मोदी-जोरदार करेंट

हर घर में बिजली पहुंचाने के बाद अब नया जोर अपेक्षाकृत कम दर पर चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने पर

चंद्रदीप कुमार चंद्रदीप कुमार

अब तक क्या किया गया

अगर मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में देश के हर घर में बिजली पहुंचाने पर जोर दिया गया था, तो उसके दूसरे कार्यकाल में सारा जोर सातों दिन चौबीस घंटे और किफायती बिजली मुहैया करवाने पर है. देश की पावर बास्केट में अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली के उत्पादन का हिस्सा मौजूदा स्तर से कहीं ज्यादा होगा

इसे हासिल करने के लिए दूसरे दौर के सुधार बेहद जरूरी हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को धन मुहैया करवाना और बिल वसूल करने के लिए ज्यादा अधिकार देना शामिल है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय अब प्रीपेड स्मार्ट मीटर हासिल करने और लगाने के लिए राज्य सरकारों पर जोर डाल रहा है. इससे वसूलियां बढ़ाने में मदद मिलनी चाहिए, हालांकि इसमें निवेश भी खासा करना पड़ेगा

ऊर्जा मंत्रालय के अफसरों ने उदय 2.0 ('बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय कायापलट' के लिए उज्ज्वल डिस्कॉम आश्वासन योजना) की बारीकियां तय करना शुरू कर दिया है. इसका मकसद न केवल आखिरी पायदान के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए धन मुहैया करना है बल्कि घाटा कम करने के रास्ते तलाशना भी है.

उदय सुधारों के पहले दौर में नया वित्तीय ढांचा बनाने की व्यापक योजना शामिल थी— नतीजतन डिस्कॉम का कुल कर्ज सितंबर 2015 के (जब उदय लॉन्च किया गया था) 2.7 लाख करोड़ रुपए से घटकर 2016-17 में 1.5 लाख करोड़ रुपए हो गया था. पर हालात फिर बिगडऩे लगे हैं और अब 2.28 लाख करोड़ रुपए (2018-19) के कर्ज के साथ उदय 2.0 का लक्ष्य इन समस्याओं को हल करना है

ऊर्जा मंत्रालय ने जान-बूझकर लोड-शेडिंग के लिए डिस्कॉम को दंडित करने का फैसला लिया है. नियामक आयोग इसके लिए प्रावधान कर रहे हैं, लेकिन इन्हें लागू करना कठिन होगा

क्या यह पर्याप्त है?

भारत की प्रति व्यक्ति बिजली की खपत पिछले 3-4 साल से करीब 1,100 यूनिट पर ठहरी हुई है. इस वित्तीय साल बिजली की खपत में 3.3 फीसद का इजाफा हुआ है. बिजली हालांकि अब देश भर के ज्यादातर घरों में पहुंच गई है, लेकिन व्यावसायिक केंद्रों और स्थानीय निकायों की खपत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है अक्षय ऊर्जा पर जोर देने की वजह से भी ताप बिजली की स्थापित क्षमता काकम उपयोग हो रहा है

जरूरत से ज्यादा क्षमता के बावजूद देश को अब भी रोजाना औसतन 5 घंटे और 38 मिनट की लोड-शेडिंग का सामना करना पड़ रहा है. इससे पता चलता है कि ग्रिड के भीतर आपूर्ति बढ़ाने और वितरण व्यवस्था सुधारों की जरूरत है

और क्या करने की जरूरत है

डिस्कॉम में सुधार के लिए इनाम और सजा का तरीका अपनाना

स्मार्ट मीटर और अन्य उपकरणों की मांग पूरी करने के लिए ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं स्थापित करना

ऊर्जा समझौतों का अब भी पालन नहीं करने वाले राज्यों को दुरुस्त करना. जून और जुलाई में आंध्र प्रदेश की सरकार ने पिछली चंद्रबाबू नायडू की सरकार के वक्त किए गए कई समझौतों को रद्द कर दिया.

बिजली के घाटे को 15 फीसद से नीचे ले आने वाली सरकारों की मदद के लिए नियामकीय प्रोत्साहन की जरूरत है. केवल 15 राज्य अब तक ऐसा करने में सफल रहे हैं

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